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देरी से कब्जा लेने वालों को नुकसान:13 फीट जमीन के लिए 6 साल से भटक रहे हैं चालीस भूखंड मालिक

जैसलमेर8 दिन पहलेलेखक: सुधीर थानवी
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  • नगरपरिषद की कॉलोनी में पहले कब्जे लेने वालों को पूरी मिली जमीन, कम जमीन का मामला राष्ट्रीय आयोग तक पहुंचा

नगरपरिषद की कार्यप्रणाली को लेकर आमजन भलीभांति वाकिफ है लेकिन 13 फुट जमीन के लिए किसी को 6 साल तक चक्कर कटवा सकती है, यह शायद किसी ने नहीं सोचा होगा। इतना ही नहीं अपने अधिकारियों द्वारा चलाई गई नोटशीट को दरकिनार कर आने वाला हर अधिकारी अपनी मनमानी चला रहा है।

नगरपरिषद किस दिशा में कार्रवाई कर रही है यह उसे खुद को नहीं पता है। इस बीच में परेशान आम आदमी हो रहा है। जिससे नगरपरिषद को शायद कोई लेना देना नहीं है। 2009 में काटी गई लक्ष्मीचंद सांवल कॉलोनी के कुछ ब्लॉक में सड़कें बेतरतीब बनने से तथा शुरूआत में भूखंड बनाने वालों ने सही नाप नहीं किया जिससे कई भूखंडों की साइज छोटी पड़ गई।

मौके पर उतनी जमीन ही अब उपलब्ध नहीं है। सर्वाधिक परेशानी बी ब्लॉक के करीब 40 भूखंड मालिकों को आ रही है। जिसने पहले मकान या चार दीवारी बना ली, उसे तो पूरी जमीन मिल गई, पीछे वाला भूखंड स्वत: ही 13 फुट कम पड़ गया।

ऐसे समझे पूरे मामले को , 2015 में कम जमीन का पता चला, नगरपरिषद ने गंभीरता से नहीं लिया

2009 में लक्ष्मीचंद सांवल कॉलोनी का आवंटन हुआ। बी ब्लॉक में एक तरफ 35 गुणा 70 और उसके पीछे 30 गुणा 60 के भूखंड काटे गए। 35 गुणा 70 के आगे 60 फीट और 30 गुणा 60 के आगे 30 फीट सड़क है। दोनों तरफ सड़क बनने से बीच में 130 फीट जगह होनी चाहिए लेकिन मौके पर 117 फीट ही जगह है। ऐसे में जिसने भूखंड की चारदीवारी या मकान बना लिया है उसके लिए दिक्कत नहीं है और जो नहीं बना सका वह अब तक पूरे भूखंड के लिए भटक रहा है।

कॉलोनी जब आवंटित हुई तब यहां तरीके से डिमार्केशन नहीं था। करीब 5-6 साल तक लोगों ने अपने भूखंडों को देखा तक नहीं। बाद में 2015 में पंकज शर्मा अपने भूखंड को देखने गए और नाप किया तो 13 फीट जमीन कम मिली। नगरपरिषद को पत्र लिखा, जवाब नहीं मिला, कलेक्टर को पत्र लिखा, संपर्क पोर्टल में शिकायत दर्ज करवाई लेकिन समस्या का समाधान नहीं।

2019 से नगरपरिषद का मूड बदला और कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार
पंकज शर्मा ने बताया कि चार साल तक कार्रवाई नहीं हुई तो आखिरकार उपभोक्ता मंच का सहारा लेना पड़ा। यहां तुरंत फैसला भूखंड मालिक के पक्ष में हो गया, यहां तक कि नगरपरिषद को 1 लाख रुपए का मानसिक हर्जाना भी देने के आदेश दिए गए। नगरपरिषद ने मंच के फैसले को नहीं माना। बाद में पंकज ने कोर्ट की अवहेलना की याचिका दर्ज करवाई। तब जाकर नगरपरिषद की आंख खूली और स्टेट फोरम में अपील की। वहां से भी नगरपरिषद की अपील को खारिज कर दिया गया। अब नगरपरिषद राष्ट्रीय आयोग तक पहुंच गई है।

उपभोक्ता मंच के राष्ट्रीय आयोग तक पहुंचा नगरपरिषद का मामला
नगरपरिषद के अधिकारियों को यह पता है कि सड़क सही नहीं बनाई, डिमार्केशन सही नहीं किया, इस वजह से 13 फीट जगह मौके पर कम पड़ रही है और इसका निस्तारण भूखंड मालिकों को अन्यत्र भूखंड देना ही है। लेकिन इसे नहीं मानते हुए नगरपरिषद कानूनी लड़ाई में दिल्ली तक पहुंच गई और लाखों रुपए फिजूल में खर्च कर रही है। वर्तमान में यह मामला दिल्ली में उपभोक्ता मंच के राष्ट्रीय आयोग में लंबित है और आगामी पेशी 15 अप्रैल को है।

40 भूखंड मालिकों में से एक ने ही ली कोर्ट की शरण
पंकज शर्मा अकेले कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, शेष भूखंड मालिक नगरपरिषद में प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। उन्हें यह भी पता है कि पंकज शर्मा वाले मामले में फैसला होने के बाद सबको राहत मिल जाएगी। फिलहाल नगरपरिषद इस ओर ध्यान ही नहीं दे रही है। 6-7 साल से लोग चक्कर काट रहे हैं और नगरपरिषद को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है।

नगरपरिषद की कार्रवाई में बदलाव पर ही संदेह
नगरपरिषद में इस तरह से कार्रवाई में बदलाव संदेह के घेरे में है। कई मर्तबा ऐसा देखा गया है कि नगरपरिषद अपनी कार्रवाई को अचानक से बदल देती है। इस मामले में अभी तक स्पष्ट सामने कुछ भी नहीं आया है। लेकिन 13 फीट जमीन के लिए 30 से 40 लोगों को 6 साल से चक्कर कटवाने के पीछे क्या राज है? यह सबसे बड़ा सवाल है।

नगरपरिषद ने कहा परिवादी को कब्जा दिया
इस मामले में सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि पंकज शर्मा ने जब संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई तब उसमें नगरपरिषद ने पहले तो भ्रमित करने का प्रयास किया बाद में संपर्क पोर्टल में यह जवाब दे दिया कि मौके पर परिवादी को कब्जा दे दिया गया है। ​​​​​​​

मैंने 2015 में पहला प्रार्थना पत्र दिया था, उसके बाद से लगाकर पत्र व्यवहार कर रहा हूं लेकिन आजतक नगरपरिषद ने किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया है। वर्तमान में नगरपरिषद इस मामले को लेकर नेशनल फोरम में पहुंच गई है। उसके लिए 15 तारीख को पेशी है।
पंकज शर्मा, भूखंड मालिक

मेरा एक भूखंड बी ब्लॉक में 35 गुणा 70 का है। मौके पर जमीन 35 गुणा 57 ही मौजूद है। नगरपरिषद से गुहार लगाने के बाद भी मामले का निस्तारण नहीं किया जा रहा है।
झबरसिंह सोढ़ा, भूखंड मालिक

फिलहाल यह मामला मेरे ध्यान में नहीं आया है। यदि लोगों की वाजिब समस्या है तो उसका शीघ्र निस्तारण करवाने का प्रयास किया जाएगा। मामले की पूरी पड़ताल व मौका स्थिति देखने के बाद ही कुछ कह सकता हूं।
फतेहसिंह मीणा, आयुक्त, नगरपरिषद

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