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अच्छी खबर:40 करोड़ से 29 सीमा चौकियों तक पहुंचेगा हिमालय का पानी

जैसलमेर16 दिन पहलेलेखक: दीपक शर्मा
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  • जैसलमेर की 122 बीओपी तक नहरी पानी पहुंचाने की तैयारी, बीएसएफ जवानों को मिलेगी बड़ी राहत

देश की सीमा पर तैनात जवानों को रखवाली के लिए विषम परिस्थितियों के बीच काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान दूर दराज तक किसी इंसान का नामो निशान तक नहीं है। जिसके बीच जवान सीमित संसाधनों के बीच देश की सेवा में जुटे हुए है।

यहां तक सीमा चौकियों पर देश के रखवालों को पीने के पानी के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है। जिस पर बीएसएफ द्वारा अब जैसलमेर की सभी सीमा चौकियों पर नहर का पानी पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी गई है। जिसके तहत 29 बीओपी व 2 एडीएम बेस तक नहरी पानी पहुंचाने का काम भी शुरू हो गया है।

इसके लिए सरकार द्वारा 29 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है। जिसके बाद अब पाईप लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इसके साथ ही बाकी रही सीमा चौकियों के प्रस्ताव भी सरकार के लिए भिजवा दिए गए है। स्वीकृति मिलने के साथ ही सभी बीओपी तक पाईप लाइन के माध्यम से नहर का पानी सुलभ उपलब्ध हो पाएगा।

बॉर्डर पर 29 बीओपी तक बिछ रही है पाइप लाइन, शेष 9 के भेजे प्रस्ताव, जलदाय विभाग व बीएसएफ को सौंपी काम की जिम्मेदारी

एक बार फिर नहर बनी जीवनदायिनी: दूर दूर तक फैले रेगिस्तान के बीच जीवनदायिनी बनकर आई नहर एक बार फिर बीएसएफ के जवानाें के लिए उपयोगी साबित हो रही है। रेगिस्तान में पहले जहां खेती करना किसी सपने जैसा था। वहीं इंदिरा गांधी नहर ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया। जिसके बाद जैसलमेर में हरियाली के साथ ही हजारों की संख्या में मुरब्बाे से किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुधर गई।

बीएसएफ व जलदाय विभाग को सौंपा काम, 150 करोड़ रुपए से ज्यादा की है योजना

अब तक टैंकर से जलापूर्ति पर करोड़ों रुपए खर्च किए

जैसलमेर से लगती लंबी सीमा पर बीओपी पर कार्यरत जवानों के लिए बीएसएफ द्वारा फिलहाल वाटर टैंकर के माध्यम से पीने के पानी की सप्लाई की जा रही है। हालांकि कुछ बीओपी में ट्यूबवैल के माध्यम से पानी निकाला जा रहा है ताकि वहां पर कार्यरत बीएसएफ के जवानों को पानी मिल सके। जैसलमेर से लगती 472 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 122 सीमा चौकियां है। जिस पर बीएसएफ की दो बटालियन नॉर्थ व साउथ मॉनिटरिंग करती है।

इन सीमा चौकियों में से कुछ में ट्यूबवैल खुदे हुए है। जिससे जवान अपनी प्यास बुझाते है। लेकिन अधिकांश बीओपी तक बीएसएफ द्वारा वॉटर टैंकर के माध्यम से पिछले सालों में करोड़ों रूपए खर्च कर दिए गए है। लेकिन अब सीमा चौकियों पर पानी पहुंचाने का स्थाई काम हो रहा है।

गर्मियों में जवानों को होती है सबसे ज्यादा परेशानी

देश की सीमा पर तपते मरुस्थल पर तैनात जवानों को गर्मी के मौसम में सर्वाधिक पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है। हालांकि बीएसएफ द्वारा लगातार बीओपी तक टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है। लेकिन अब पाईप लाइन के माध्यम से सभी बीओपी को नहर से जोड़ने के बाद पानी की समस्या मूल रूप से खत्म हो जाएगी। 472 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई ऐसी अग्रिम चौकियां है जो सुदूर स्थित है। जिसमें कम से कम 30 किलोमीटर तक रहवासी क्षेत्र नहीं है।

ऐसे में बीओपी पर रहने वाले जवानों को हर व्यवस्था अपने स्तर पर ही करनी होती है। हालांकि बीएसएफ द्वारा बीओपी पर टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। लेकिन विपरीत परिस्थितियां होने पर जवानों को पीने के पानी तक के लिए परेशानी हो सकती है। ऐसे में ही बीएसएफ द्वारा हर बीओपी तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि जवानों को विपरीत परिस्थितियों में भी जल संकट का सामना नहीं करना पड़े।

काम पूरा होने तक टैंकरों से बीओपी तक होगी जलापूर्ति

साउथ सेक्टर की सभी बीअोपी तक पानी पहुंचाने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे जा चुके है। जिसके बाद स्वीकृति का इंतजार है। स्वीकृति मिलने के साथ ही साउथ सेक्टर की सभी बीओपी के लिए काम शुरू कर उन्हें पाइप लाइन के माध्यम से नहरों से जोड़ दिया जाएगा। फिलहाल वाटर टैंकर के माध्यम से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। -अरविंद घिल्डीयाल, कमांडेंट, साउथ सेक्टर।​​​​​​​

पाइप लाइन का काम चल रहा है जल्द ही मिलेगा मीठा पानी​​​​​​​

नॉर्थ सेक्टर के तहत सभी बीओपी के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे। जिसमें से कुछ की स्वीकृति मिल गई है। पाइप लाइन का काम चल रहा है। जल्द पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा होने के बाद बीओपी को नहर से पानी उपलब्ध करवा दिया जाएगा। जिससे बीओपी पर कार्यरत बीएसएफ की टीम को पानी सुलभ उपलब्ध हो जाएगा। -ए. के. सिंह, उपमहानिरीक्षक, नॉर्थ सेक्टर।​​​​​​​

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