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विदेशी मेहमान:विदेशों से खेतोलाई व चाचा पहुंची कुरजां, छह माह प्रवास रहेगा

लाठी4 दिन पहले
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  • अगले छह माह तक तालाबों के आस-पास डेरा डाले रहेगी कुरजां, देशी पर्यटक देखने पहुंचेंगे

क्षेत्र में गत एक सप्ताह से गांवों के ऊपर अपने पड़ाव स्थल की जांच पड़ताल करने के लिए आकाश में चक्कर लगा रहे कुरजां पक्षी मंगलवार को सुबह अपने पड़ाव स्थल पहुंचे। कुरजां पक्षी के पहले जत्थे ने खेतोलाई, चाचा गांव के पास स्थित तालाबों पर दस्तक दी है।

मंगलवार को सुबह खेतोलाई गांव के पास स्थित तालाब पर कुरजों को स्वच्छंद विचरण करते हुए देखा गया है। इससे पहले कुरजां पक्षियों के जत्थे ने एक सप्ताह तक गांव के ऊपर चक्कर लगाकर अपने पड़ाव स्थल की पहचान की। मंगलवार को अपने स्थल पर दस्तक देने के बाद क्षेत्र के पक्षी प्रेमियों के चेहरों पर खुशी की लहर आ गई है।

कुछ दिन तक करेंगे प्रवास

पक्षी प्रेमी राधेश्याम पेमाणी ने बताया कि प्रवासी पक्षी कुरजां के एक सप्ताह पूर्व क्षेत्र में उड़ान भरते हुए गए थे। उनमें से दो जत्थे मंगलवार सुबह अपने पड़ाव स्थल खेतोलाई, चाचा गांव के पास तालाबों पर उतर आए हैं। अब कुरजां के शेष पक्षी भी कुछ दिन तक आकाश में उड़ते हुए अपने परंपरागत पड़ाव स्थल की पहचान एवं पूरी जांच पड़ताल करेंगे। उसके बाद कुछ ही दिनों में शेष पक्षी भी नीचे उतरेंगे। तापमान में गिरावट के साथ ही क्षेत्र में पक्षियों की संख्या में वृद्धि होगी।

खुले मैदान में डालते हैं डेरा

पक्षी विशेषज्ञ डॉ. दिवेश सैनी बताया कि प्रवासी पक्षी कुरजां का वजन करीब दो से ढाई किलो होता है। यह पानी के आसपास खुले मैदान और समतल जमीन पर ही अपना अस्थाई डेरा डालकर रहते हैं। इन पक्षियों का मुख्य भोजन वैसे तो मोतिया घास होती है और पानी के पास पास पैदा होने वाले कीड़े मकोड़े खाकर अपना पेट भरते हैं। क्षेत्र में अच्छी बारिश होने पर खेतों में होने वाले मतीरे की फसल भी इनका पसंदीदा भोजना माना जाता है। यहां वे लाठी सहित खेतोलाई, भादरिया चाचा, धोलिया, डेलासर, लोहटा गांव के पास स्थित तालाब व खडीनों पर देखे जा सकते हैं।

ऐसे आती हैं कुरजां

कुरजां एक खूबसूरत पक्षी है जो सर्दियों में साइबेरिया से ब्लैक समुद्र से लेकर मंगोलिया तक फैले प्रदेश से हिमालय की ऊंचाइयों को पार करता हुआ हमारे देश में आता है। सर्दियां हमारे मैदानों और तालाबों के करीब गुजारने के बाद वापस अपने मूल देश में लौट जाता है। यह पांच से आठ किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ता है।

6 माह का होगा प्रवास

कुरजां सितंबर के प्रथम सप्ताह में लाठी क्षेत्र पहुंच जाती है तथा मार्च में वापसी की उड़ान भरती है। इस दौरान छह माह के शीतकालीन प्रवास में यह पक्षी यहां हजारों की तादाद में एकत्रित होकर क्षेत्र को पर्यटक स्थल का रूप दे देते हैं। उल्लेखनीय है कि कुरजां के कारण लाठी क्षेत्र में देसी-विदेशी पर्यटकों की चहल-पहल बढ़ जाती है।

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