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अनदेखी:37 गौशालाओं का गत साल का 7 करोड़ 42 लाख का अनुदान अटका

जैसलमेर3 महीने पहले
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  • राज्य सरकार की वित्तीय मंजूरी के अभाव में गौशालाओं को अनुदान जारी नहीं, संचालकों के लिए संचालन करना हुआ मुश्किल

जैसलमेर की 37 गौशालाओं को पिछले साल का अनुदान अब तक जारी नहीं किया गया है। जिससे अब गौशाला संचालकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। जानकारी के अनुसार 37 गौशालाओं को करीब 7 करोड़ 42 लाख का भुगतान किया जाना है। जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति भी जारी कर दी गई है।

लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं देने से अब तक पैसे गौशालाओं तक नहीं पहुंचे हैं। जिससे अब गौशाला का संचालन बहुत मुश्किल हो गया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा 2016 में विधेयक से गौ संरक्षण निधि के नाम से गौशालाओं को मदद पहुंचाने के लिए बजट का प्रावधान किया गया। जिसे आगे शुरुआत में 3 महीने के लिए और आगे जाकर उसे 6 महीने के लिए बढ़ाया गया।

कई जिलों को अनुदान का भुगतान, जैसलमेर की अनदेखी से कर्जदार बनी गौशालाएं
प्रदेश के अन्य जिलों में गौशालाओं के अनुदान का भुगतान कर दिया गया है। लेकिन जैसलमेर जिले की गौशालाएं अभी भी अनुदान का इंतजार कर रही है। वर्तमान तक गौशालाओं को अनुदान की दूसरी किश्त जारी होनी थी। लेकिन अभी तक पहली किश्त भी जारी नहीं होने के कारण जैसलमेर इसमें काफी पीछे चल रहा है।

जैसलमेर जिले में इस वित्तीय वर्ष की किश्त मई-जून में जारी होनी थी। जो आज तक जारी नहीं हुई है। जिससे गौशाला संचालकों के लिए इतना लंबा समय अब भारी पड़ रहा है। गौशालाओं के ऊपर लाखों का कर्जा हो गया है। गौशालाओं को संचालित करने वाली संस्थाओं के लिए गोवंश के लिए चारे व पशु आहार की व्यवस्था करना अब टेढ़ी खीर बन गया है।

बाजार से उधार मिलना हुआ बंद एक हजार गौ वंश पर खर्च होते हैं 10 लाख
गौशाला संचालकों ने अनुदान के भरोसे बाजार से चारा व पशु आहार उधार ले लिया। जिससे अब गौशालाएं कर्ज में डूब गई है। इसके साथ ही अब बाजार से उधार चारा व पशु आहार मिलना भी बंद हो गया है। जिससे गायों के लिए चारे की व्यवस्था करना भी गौशाला संचालकों के लिए परेशानी बन गया है।

गौशालाओं की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। जैसलमेर में इन दिनों गौशालाओं का संचालन करना बेहद मुश्किल हो गया है। आमतौर पर एक हजार गौ वंश पर एक महीने में करीब 10 लाख रूपए का खर्च होता है। गौ संवर्द्धन निधि से मिलने वाले अनुदान से गौशाला को काफी संबल मिलता है। लेकिन लंबे समय से किश्त जारी नहीं होने से अब गौशालाओं में आर्थिक संकट गहरा गया है।​​​​​​​

सरकार द्वारा हर वित्तीय वर्ष में मई जून महीने में गौ संवर्द्धन निधि के माध्यम से अनुदान जारी करना होता है। यह अनुदान साल में दो बार जारी होता है। लेकिन इस साल अभी तक इस अनुदान की पहली किश्त भी नहीं दी गई है। जिससे अब गौशालाओं का संचालन मुश्किल हो गया है। गौशाला के लिए बाजार में 50 लाख रूपए तक का कर्ज हो गया है। अब धीरे धीरे स्टॉक भी खत्म हो रहा है। इसके साथ अब बाजार में चारा व पशु आहार भी व्यापारियों ने उधार देने से मना कर दिया है। जिससे अब परेशानी और भी बढ़ गई है।
मानव व्यास, तुलसी गौशाला

चुनावों के कारण अनुदान थोड़ा लेट हुआ है। इस संबंध में अब उपखंड अधिकारी से परीक्षण करवाकर जल्द ही पैसा गौशालाओं को वितरित कर दिया जाएगा।
आशीष मोदी, कलेक्टर

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