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ग्रहों की चाल:अधिक मास आज से, कृष्ण की पूजा से मिलेगा पुण्य

जैसलमेरएक महीने पहले
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  • अधिकमास में मांगलिक कार्य रहेंगे बंद, 16 अक्टूबर को समाप्त होगा

भारतीय पंचांग अनुसार शुक्रवार 18 सितम्बर 2020 को प्रतिपदा तिथि से अधिक मास के रूप में आश्विन मास प्रारंभ हो रहा है। इस मास को पुरुषोत्तम मास के रूप में भी जाना जाता है। स्वर्णनगरी के युवा ज्योतिषाचार्य उमेश आचार्य ने बताया कि चंद्र मास में सूर्य संक्रांति नहीं आती है तो अधिक मास हो जाता है। सौर एवं चंद्र मास के अंतर को पूरा करने के लिए हर तीसरे साल अधिक मास आता है। 18 सितंबर से शुरू हो रहा आश्विन अधिक मास 16 अक्टूबर तक रहेगा।

आचार्य ने बताया कि अधिक मास में मांगलिक कार्याें को वर्जित माना गया है, जबकि धर्म कर्म करने से अधिक फल मिलता है। पुरुषोत्तम मास में किए गए दान पुण्य, स्नान की शास्त्रीय महत्ता है। इस मास में पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण की विधि पूर्वक पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पुरषोतम मास में पुरुषोत्तम सहस्त्र नाम स्त्रोत का पाठ अति लाभदायक सिद्ध होता है।
तीन साल में एक बार आता है अधिक मास, इस बार आश्विन मास में
उमेश आचार्य ने बताया कि भारतीय ज्योतिष गणनानुसार सौर वर्ष का मान 365 दिन 5 घंटे 48.8 मिनट तथा चंद्र वर्ष का मान 354 दिन होता है। सौर एवं चंद्र वर्ष के बीच हर साल रहने वाले 11 दिन के अंतराल के कारण प्रति तीन साल के बाद एक अधिक मास आता है।
इस बार आश्विन मास है अधिक मास: इस साल 16 सितंबर व 17 अक्टूबर को होने वाली कन्या एवं तुला संक्रांतियों के बीच में एक पूरा चांद्र मास व्यतीत होने से आश्विन मास अधिक मास हो गया है। इस मास में गृह प्रवेश, चूडाकरण, यज्ञोपवीत, विवाह, भवन निर्माण का श्री गणेश, देव प्रतिष्ठा, कुआं व बावडी निर्माण, अन्नप्राशन, समावर्तन, नामकरण, शपथ ग्रहण सहित अन्य मांगलिक काम ठीक नहीं माने जाते।

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