अनदेखी:जिला अस्पताल में 12 दिन से एलिजा टेस्ट किट नहीं, रेपिड टेस्ट से जांच को मजबूर

जैसलमेर2 महीने पहले
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जैसलमेर. जवाहर अस्पताल के शिशु वार्ड के सभी बैड हुए फुल। - Dainik Bhaskar
जैसलमेर. जवाहर अस्पताल के शिशु वार्ड के सभी बैड हुए फुल।
  • डेंगू का खतरा बढ़ा, रोजाना 40 से 50 मरीज आ रहे, विभाग नहीं दे रहा ध्यान

जिले में डेंगू कहर बरपा रहा है और चिकित्सा विभाग के जिम्मेदार इस मामले में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। सरकारी अस्पताल के साथ साथ जिले के निजी अस्पतालों में इन दिनों सिर्फ डेंगू के मरीजों की ही भरमार है। बावजूद इसके चिकित्सा विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है।

जिम्मेदारों की लापरवाही का नमूना तो तब सामने आया जब सरकारी रिकार्ड में 2 अक्टूबर के बाद एक भी डेंगू मरीज की एंट्री नहीं होने पर भास्कर पड़ताल की गई तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जिम्मेदारों ने बताया कि एलिजा टेस्ट किट खत्म हो चुका है और फिलहाल रेपिड टेस्ट ही किए जा रहे हैं। चूंकि रेपिड टेस्ट को डेंगू के लिए सही नहीं माना जाता है इसलिए रिकार्ड में डेंगू मरीजों की एंट्री नहीं की जा रही है। दूसरी तरफ सरकारी अस्पताल में लगे चिकित्सकों का कहना है कि रोजाना 40 से 50 मरीज डेंगू के सामने आ रहे हैं।

चिकित्सा विभाग के जिम्मेदारों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है कि डेंगू के मरीज बड़ी तादाद में बढ रहे हैं। निजी अस्पताल हाउस फुल हो चुके हैं और सरकारी अस्पताल में डेंगू के मरीजों की कतारें लगी पड़ी है। यहां तैनात चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश मरीज डेंगू के ही आ रहे हैं।

सरकारी रिकाॅर्ड में सिर्फ 89 डेंगू के मरीज, हकीकत में 50 रोगी तो जोधपुर रेफर हो चुके

जिले में लोग डेंगू के कहर से परेशान है। हर गली मोहल्ले में दर्जनों डेंगू मरीज मिल रहे हैं। हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं और चिकित्सा विभाग इसे लेकर कतई गंभीर नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में सरकारी रिकार्ड में सिर्फ 89 मरीज ही बताए जा रहे हैं। जबकि वास्तविकता में यह आंकड़ा बहुत ज्यादा है। डेंगू के 50 से ज्यादा केस तो जोधपुर रेफर हो चुके हैं

सवाल : इतनी गंभीर लापरवाही क्यों ?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि चिकित्सा विभाग इस मामले में इतनी बड़ी लापरवाही क्यों कर रहा है। जब रेपिड टेस्ट मान्य ही नहीं है तो सरकारी अस्पताल में इससे डेंगू मरीजों की जांच क्यों की जा रही है। इसका जवाब शायद किसी के पास नहीं है। इतना ही नहीं जिम्मेदारों को इसकी जानकारी तक नहीं है, उनका कहना यह है कि उन्हें आज ही इसकी जानकारी मिली है कि एलिजा टेस्ट किट खत्म हो गए हैं। जबकि मेडिकल रिलीफ सोसायटी के पास लाखों रुपए का बजट पड़ा है।

रेपिड टेस्ट को सही नहीं मानने वाले भी कर रहे वही जांच

​​​​​​​चिकित्सा विभाग के जिम्मेदारों को जब भी डेंगू के मरीज अधिक आने के बारे में पूछा जाता तो वे एक ही जवाब देते कि निजी अस्पताल वाले रेपिड टेस्ट करते हैं जिसे हम नहीं मानते लेकिन अब हालात यह है कि सरकारी अस्पताल में ही रेपिड टेस्ट हो रहा है। क्योंकि एलिजा टेस्ट किट खत्म हो चुके हैं।

मुझे एलिजा टेस्ट किट खत्म होने की जानकारी नहीं है। यह पीएमओ स्तर का ही मामला है। यदि ऐसा है तो जल्द ही एलिजा टेस्ट की व्यवस्था की जाएगी। डॉ. कुणाल साहू, सीएमएचओ, जैसलमेर।

मुझे दो तीन पहले ही इसकी जानकारी मिली है और अब हमने जल्द ही इसकी व्यवस्था करवा दी है। एक दो दिन में एलिजा किट मिल जाएंगे और उसके बाद से फिर से एलिजा किट से जांच शुरू कर दी जाएगी। डॉ. जे.आर. पंवार, पीएमओ, अस्पताल।

डेंगू से बच्चे ज्यादा प्रभावित
अस्पताल का बच्चा वार्ड फुल हो चुका है और हालात यह है कि बरामदे में बेड लगाने पड़ रहे हैं। बच्चों में डेंगू तेजी से फेल रहा है और जिम्मेदार डेंगू की जांच को लेकर गंभीर नहीं है। जानकारों का कहना है कि यदि एलिजा टेस्ट किट से जांच हो तो मरीज का उपचार भी सही ढंग से हो पाए। वर्तमान में संदिग्ध डेंगू मरीज मानकर ही जांच की जा रही है।

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