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  • On The Death Of Loved Ones Forced To Call A Man By Paying Money For The Post mortem; There Is No Post mortem Employee In The Largest Government Hospital For 3 Years

यहां पोस्टमार्टम के लगते हैं पैसे:अपनों कि मौत पर पोस्टमार्टम के लिए पैसे देकर आदमी बुलाने पर मजबूर, सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में 3 साल से नहीं है पोस्टमार्टम करने वाला कर्मचारी

जैसलमेर2 महीने पहले
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जवाहर हॉस्पिटल कि मोर्चरी। - Dainik Bhaskar
जवाहर हॉस्पिटल कि मोर्चरी।

जैसलमेर जिले के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल जवाहर अस्पताल में पिछले 3 सालों से शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए एक से दो हजार रूपए चुकाने पड़ रहे हैं। एक तो किसी अपने के जाने का दुख ऊपर से पोस्टमार्टम के लिए मनचाहे पैसे लेने से परिजनों पर दुखों की दोहरी मार पड़ रही है।

गौरतलब है कि मेडिकल रिलीफ सोसायटी द्वारा पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को 300 रूपए व स्वीपर को 100 रुपए देने का प्रावधान है, लेकिन गत कुछ समय पहले एकमात्र मेल स्वीपर के रिटायर होने के बाद बाहर से ही स्वीपर बुलाया जाता है। बाहर से आने वाला स्वीपर कम से कम 2 हजार रुपए लेता है जिसका भुगतान मरीज के परिजनों से लिया जाता है. जिससे गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को दुखों की दोहरी मार झेलनी पड़ती है।

जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे

हाल ही एक युवक द्वारा आत्महत्या करने के बाद उसके परिजनों द्वारा स्वीपर को दो हजार रुपए का भुगतान किया गया। उस समय बदहवास परिजनों की यह स्थिति थी कि उनके पास दो हजार रुपए नहीं थे। उन्होंने आस-पास के लोगों से मांगकर दो हजार रुपए इकट्‌ठे किए और स्वीपर को दे दिए। ऐसे मामले साल 2018 से चल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

जिम्मेदार मजबूर, बता रहे अपनी परेशानी

आमतौर पर उन शवों का ही पोस्टमार्टम करवाया जाता है जिनकी मौत दुर्घटना या संदिग्ध परिस्थितियों में होती है। उस पर पहले से परेशान परिजनों पर पोस्टमार्टम के बाद मनचाहे रुपए देने का दबाव बनाया जाता है जिससे अधिकांश परिजन पोस्टमार्टम करवाने से दूरी बनाते हैं। अस्पताल के पीएमओ डॉ जे आर पंवार बताते हैं कि साल 2018 में हमारे पास एक ही कर्मचारी था वो रिटायर हो गया। उसके बाद पोस्टमार्टम में आने वाली दिक्कतों को लेकर हमने आगे उच्चाधिकारियों को भी बताया, लेकिन हल नहीं निकल रहा है।

प्लेसमेंट एजेंसी के द्व्सरा अगर किसी को लगाएं तो उसको 6 हज़ार से ज्यादा नहीं मिलता, ऐसे में कोई भी कर्मचारी आने को तैयार नहीं है। हमने राज्य सरकार को भी अवगत करवाया है। पिछले सप्ताह ही हमने उनको इस समस्या को लेकर लिखा है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। डॉ जे आर पंवार बताते हैं कि कई बार बहुत ही गरीब आदमी आते हैं ऐसे में बाहर से पोस्टमार्टम करने आने वाले को कई बार मैंने भी अपनी जेब से पैसे दिये। मजबूरी है क्या करें।

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