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गौशाला संचालकों में हड़कंप:गौशालाओं में फर्जी तरीके से अनुदान उठाने की जांच करने पहुंची टीम पर संचालक दबाव की राजनीति में जुटे

जैसलमेरएक महीने पहले
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  • गौशालाओं के अनुदान में फर्जीवाड़ा, जयपुर और जोधपुर से आई जांच टीम

गौशालाओं में अनुदान में फर्जीवाड़े की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम मंगलवार को जैसलमेर पहुंची। टीम की भनक लगते ही गौशाला संचालकों में हड़कंप मच गया। जयपुर व जोधपुर से पहुंची चार सदस्यीय टीम अतिरिक्त निदेशक डॉ. चक्रधारी गौतम के नेतृत्व में जैसलमेर पहुंची।

टीम ने मौके पर पहुंचकर फर्जीवाड़े की जांच शुरू की। इधर, भनक लगते ही संचालक हरकत में आए और टीम सदस्यों पर दबाव की राजनीति शुरू की गई। गौरतलब है कि भास्कर ने 20 मार्च को ‘जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा; 12 गौशालाओं में एक भी गोवंश नहीं और 6 ने एक साल में उठाया 62 लाख का अनुदान’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। इसके बाद संचालकों की पोल खुलकर सामने आ गई थी।

पशुपालन विभाग के कर्मचारियों के साथ मारपीट

गौशालाओं में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद संचालकों ने बासनपीर गांव के पास पशुपालन विभाग के कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की थी। पशुपालन विभाग के कर्मचारियों ने वहां से भागकर अपनी जान बचाई। पशुपालन विभाग के कर्मचारी इतने डरे हुए हैं कि वे पुलिस में जाकर एफआईआर करवाने से भी कतरा रहे है। उसके बावजूद भी फर्जी गौशाला चलाने वाले संचालकों द्वारा अब भी पशुपालन विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि पिछले भौतिक सत्यापन को रद्द कर नया भौतिक सत्यापन किया जाए ताकि उन्हें अनुदान मिल सके।

अब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा फर्जीवाड़े का सच

जांच टीम के जैसलमेर पहुंचने से पहले ही गौशाला संचालकों ने अपने प्रयास तेज कर दिए। जांच करने के लिए जैसलमेर पहुंची टीम के साथ पूरे दो दिन तक गौशाला संचालकों का जमावड़ा उनके साथ रहा। इतना ही नहीं फर्जी गौशाला चलाने वाले संचालकों द्वारा लगातार टीम पर दबाव भी बनाया गया।

इसके साथ ही गत भौतिक सत्यापन में जिन गौशालाओं में एक भी गोवंश नहीं पाया गया। जांच टीम द्वारा गौशालाओं का निरीक्षण किया जा चुका है। हालांकि गौशाला संचालकों ने गत भौतिक सत्यापन की तुलना में मैनेज करते हुए जांच टीम के सामने गौशाला में गाये इकट्ठी कर ली। लेकिन वे सभी पालतु गाये होने के कारण उन पर टैग नहीं लगा हुआ था। इसके साथ ही गायों के खाने के लिए ना तो गौशालाओं में चारा मिला और ना ही गायों का गोबर।

लगातार गौशालाओं का निरीक्षण किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट में जो कुछ भी होगा हम उच्चाधिकारियों को अवगत करवा देंगे। हमारा भी आखिरी उद्देश्य यहीं है कि जो सरकारी राशि गोवंश के उत्थान के लिए दी जानी है। उसका सदुपयोग किया जाए। -डॉ. चक्रधारी गौतम, जांच टीम अधिकारी

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