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कोरोना कर्फ्यू:बसें बंद रहने से टैक्स चुकाने में असमक्ष संचालकों ने की टैक्स माफी की मांग

मायलावास2 महीने पहले
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कोरोना काल में पटरी से उतरे निजी बसों के चरमराए आर्थिक ढांचे को मजबूती देने के लिए प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन शाखा मायलावास के सदस्यों ने सीएम अशोक गहलोत एवं राज्य परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास को पत्र लिखकर 4 माह का टैक्स माफ करने के साथ आर्थिक पैकेज के जरिए राहत देने की मांग की है। ज्ञापन में बताया कि कोविड-19 के चलते राज्य सरकार की ओर से अप्रैल माह से बसों के संचालन पर रोक लगाई गई थी, जाे 10 जून से हटाई गई है।

ऐसे में मोटर व्हीकल एक्ट में नाॅन यूज के तहत टैक्स में छूट का प्रावधान दिया हुआ है। लॉकडाउन में बसों का संचालन पूर्ण रूप से बंद था, ऐसे में प्रत्येक वाहन मालिक को एक माह में टैक्स के रूप में 8 से 50 हजार रुपए तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। निजी ऑपरेटर यूनियन ने बताया कि गत वित्तीय वर्ष के प्रारंभ से अब तक कोरोना संक्रमण महामारी के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य में वायुयान एवं रेल यान के साथ हमारी स्टेज कैरिज की यात्री बसें पूर्ण रूप से प्रभावित हुई हैं। यात्री भार के अभाव में गत वर्ष से अब तक बसें खड़ी हुई हैं। कुछ बसें ही चल पाई हैं, वह भी घाटे में रही।

मार्ग पर यात्री नहीं है। राज्य में शादी, बारात, बुकिंग पार्टी, पर्यटक, स्कूल-कॉलेज, फैक्ट्री, संस्थान एवं अस्पताल आदि कार्य के लिए आने-जाने वाले यात्रियों का भारी अभाव रहा है। परिवहन विभाग का टैक्स भी कर्जा करके जमा कराया है। इंश्योरेंस का रुपया भी बर्बाद हुआ है। बस मालिकों पर टैक्स, इंश्योरेंस, टायर मेंटेनेंस, चालक-परिचालकों की तनख्वाह आदि का कर्ज चढ़ चुका है। अब कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। भविष्य में भी अभी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। सरकार राजस्थान रोडवेज को बचाने के लिए करोड़ों रुपए महीना देकर जीवन दान देती है, लेकिन निजी बस संचालक हमेशा से ही टाइम पर टैक्स भरते हैं।

कोरोना कर्फ्यू के कारण राजस्थान का संपूर्ण बस संचालन बंद हो गया था। इसकी सूचना संबधित आरटीओ कार्यालय को भेजी जा चुकी है। वर्तमान में राजस्थान में 10 जून तक सभी बसों का संचालन पूर्णतया बंद था। ऐसे में सभी प्रकार की यात्री बसों का भी 4 माह का पूर्णतया मोटर वाहन टैक्स भी नई बसों के समान पूर्ण माफ करने एवं बस संचालकों को आर्थिक पैकेज देने की मांग की। इस अवसर पर नारायणसिंह मायलावास, रतनसिंह भायल मवड़ी, सुरेंद्रसिंह भायल, सुमेरसिंह खिंची, नारायण सैनी मायलावास, सिकंदर खां बालोतरा, जुगताराम थापन, जोगदास थापन, गणपतदास सहित यूनियन के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

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