भास्कर विशेष:1971 युद्ध में देवी के चमत्कार से पाक रेंजर्स आपस में ही लड़े, आज भी मंदिर में है खण्डित प्रतिमाएं

जैसलमेर10 दिन पहले
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जैसलमेर के तनोट, घंटियाली, देगराय, तेंबडे़राय शक्तिस्थलों पर नवरात्रा में नौ दिन होती है पूजा-अर्चना। - Dainik Bhaskar
जैसलमेर के तनोट, घंटियाली, देगराय, तेंबडे़राय शक्तिस्थलों पर नवरात्रा में नौ दिन होती है पूजा-अर्चना।
  • हिंगलाज का स्वरूप है आवड़ मां, घंटी नाम के राक्षस का वध किया इसलिए बनी घंटियाली

देश की पुरानी रियासतों में जैसलमेर भी शामिल था। हालांकि वर्ष 1947 में विलय होने के बाद रियासतों का वर्चस्व पूरी तरह से खत्म हो गया। लेकिन रियासकाल से जैसलमेर शक्तिपीठों का प्रमुख केंद्र रहा। इसका कारण यह है कि जैसलमेर का भाटी राजवंश देवी भक्त रहा है। इस कारण जैसलमेर में शक्तिपीठों का बहुत महत्व है।

जैसलमेर में आवड़ को कुलदेवी स्वांगिया के रूप में पूजा जाता है। चारणों की कथा के अनुसार चेलक गांव के देवी भक्त मामड़ चारण के घर में शक्तियों ने अवतार लिया। लौद्रवा के परमार शासक जसभाण मावडिय़ा का मुख देखकर ही राज्य कार्य में लगते थे। एक दिन लौद्रवा का जैन वाठीया सेठ किसी राजा के पास सुबह पहुंचा। राजा नाराज हुए। सेठ ने कहा कि आप जिसका मुंह देखते हो वह तो निसंतान है। जब यह बात मावडिय़ा को मालूम हुई तो वे बहुत दुखी हुए और संतान प्राप्ति के लिए हिंगलाज देवी की सात बार पैदल यात्रा करने का संकल्प लिया। देवी ने प्रसन्न हो कर उन्हें वरदान मांगने को कहा। मावडिय़ा ने शक्ति को अपने घर अवतार लेने का निवेदन किया। इसके बाद मामड़ जी चारण के घर पालना रूप में सात बेटियों व एक बेटे के रूप में अवतार लिया।

महारावल तणु ने तनोट में बनाया था देवी का मंदिर
आवड़ द्वारा महारावल तणु को चमत्कार दिया। तणु ने तनोट नगरी को बसाया। जहां आवड़ का मंदिर बनाकर उसे तनोट मंदिर का नाम दिया। इसके बाद घंटी राक्षस को मारने पर घंटियाली, भाई महिरक्ख को पीवणा सांप द्वारा डसने पर पनोधरराय, काणोद गांव के पास एक रात रूकने से कालेडूंगरराय, महारावल के भाई वहादरियां को चमत्कार दिखाने पर भादरियाराय के रूप में देवी विख्यात हुई।

1971 के युद्ध में दिखाया था चमत्कार पाक सैनिक आपस में ही लड़ने लगे थे
1971 के युद्ध में जहां तनोट में बम गिरने के बाद भी नहीं फटे। पाक रेंजर्स भी घंटियाली तक पहुंच गए थे। इस दौरान उन्होंने मंदिर की प्रतिमाओं को भी खण्डित कर दिया था। प्रतिमाएं खण्डित करने के बाद घण्टियाली माता के चमत्कार के कारण पाकिस्तानी सैनिक आपस में ही लड़ने लगे। प्रदेश में जैसलमेर एकमात्र ऐसी जगह है।

सबसे ज्यादा 50 साल तक तेंबेडे़ में रही आवड़
आवड़ सन 999 में अदृश्य हो गई। सशरीर 191 साल सशरीर धरती पर रही। इतिहास के अनुसार आवड़ का जन्म से लेकर अदृश्य होने तक 13 साल की बालिका के रूप में ही रही। इसके साथ ही वे करीब 50 साल तेंबड़े में रही। तेंबड़े राक्षस को मारने के बाद आवड़ माता ने अपने हाथ से शिला रखते हुए उसकी गुफा को बंद कर दिया था।

शिक्षा के साथ गाे सेवा भी, एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है भादरिया में
भादरियाराय मंदिर आस्था के साथ शिक्षा व गाे सेवा में भी सबसे आगे है। मंदिर प्रबंधन की खासियत है कि इस मंदिर में बनी लाइब्रेरी एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में शामिल है। इसके साथ ही 6 किलोमीटर तक फैले गौशाला में 5 हजार से ज्यादा गाये रहती है। संत हरवंशसिंह निर्मल ने कुछ सालों तक भादरिया में ही गुफा में रहकर कठोर तपस्या की। जिसके बाद वे भादरिया महाराज के नाम से विख्यात हुए। भादरिया को एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी का भी गौरव प्राप्त है। मंदिर के नीचे हजारों की संख्या में पुस्तकों का संग्रहण है। सीमावर्ती जिले में इतनी बड़ी लाइब्रेरी होने से शैक्षणिक रूप से विद्यार्थियों के लिए भी बेहद फायदेमंद है।

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