तैयारी / अगस्त में पंचायतीराज चुनाव होने की संभावना, नेता अभी से तैयारी में जुट गए

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दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 07:55 AM IST

जैसलमेर. पंचायती राज चुनावों की तैयारी शुरू हो चुकी है। पहले पंचायतों के सीमांकन को लेकर और बाद में कोरोना के चलते इस बार चुनाव नहीं हो पाए। फरवरी में होने वाले चुनाव अभी भी पेंडिंग है। अब संभावना जताई जा रही है कि अगस्त माह के बाद कभी भी पंचायती राज चुनाव हो सकते हैं। जैसलमेर में अधिकांश ग्राम पंचायतों के चुनाव शेष है। वहीं पंचायत समिति के प्रधानों व जिला प्रमुख का चुनाव होना बाकी है।

प्रशासन ने भी वोटर लिस्टें तैयार कर ली है। अब नेता और वोटर्स चुनाव के इंतजार में है। गौरतलब है कि कोरोना के चलते तीन माह तक लॉकडाउन रहा और अब धीरे धीरे लॉकडाउन खुल गया है। सरकारी कार्यालय भी खुल गए हैं और लोगों में कोरोना का भय भी कम हो रहा है। अब सरकार धीरे धीरे सभी प्रक्रियाएं शुरू कर रही है। 10वीं व 12वीं की परीक्षाएं भी लगभग हो चुकी है। स्कूलें खोलने की तैयारी है वहीं चुनाव भी करवाए जाने हैं। 

कांग्रेस के दोनों ही परिवार जिला प्रमुख की सीट पर कब्जा करने के मूड में, भाजपा अभी साइलेंट मोड पर है 
कांग्रेस में दो दिग्गज परिवार अभी भी आमने सामने हैं। इनके लिए यह चुनाव वर्चस्व की लड़ाई बन चुका है। फकीर परिवार की ओर से पूर्व जिला प्रमुख अब्दुला फकीर उम्मीदवार हो सकता है वहीं धणदे परिवार की ओर से एक बार फिर विधायक रूपाराम अपनी बेटी अंजना को जिला प्रमुख बनवाना चाहते हैं। दोनों ही परिवारों में इस पद को लेकर इतनी खींचतान है कि किसी भी शर्त पर समझौता होना मुश्किल है। भाजपा की ओर से तैयारी शुरू कर दी है लेकिन वह अभी साइलेंट मोड पर है। 

फकीर परिवार को पंचायतीराज चुनावों का ज्यादा अनुभव 

फकीर परिवार पिछले कई वर्षों से जिला प्रमुख पद पर हैं। भाजपा ने जितने भी प्रयास किए हमेशा विफलता मिली। गत बार एससी की सीट रिजर्व होने पर फकीर परिवार ने धनदे परिवार को यह सीट जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय कांग्रेस में एकजुटता थी। लेकिन उसके बाद इनके बीच तकरार शुरू हो गई। फकीर परिवार को इन चुनावों का खासा अनुभव है लेकिन पिछले 6 सालों में विधायक रूपाराम भी सक्रिय है। ऐसे में इस बार दोनों की तकरार कांग्रेस के लिए मुसीबत बन सकती है। 

  • नगरपरिषद चुनाव जैसी स्थिति भी बन सकती है - नगरपरिषद चुनाव में कांग्रेस की ओर से दो धड़े आमने सामने थे। फकीर परिवार ने हरिवल्लभ कल्ला को सपोर्ट किया वहीं विधायक रूपाराम धनदे ने कमलेश छंगाणी को कांग्रेस की टिकट दिला दी। इन चुनावों में भाजपा को फायदा नहीं मिला।
  • दोनों पक्ष अपने दांव खेलने की तैयारी में - नगरपरिषद चुनावों में फकीर परिवार ने धनदे परिवार को पटखनी दी। 21 पार्षद कांग्रेस के जीते लेकिन पार्टी की टिकट लाने वाले को विधायक जिता नहीं पाए। ऐसे में विधायक चुनावों का बदला लेने की तैयारी में है।

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