पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

इंसानों के साथ पल रहा THE GREAT INDIAN BUSTERD:गोडावण कंजर्वेशन ब्रीडिंग प्रोगाम में 18 बच्चे हो रहे बड़े, एक्सपर्ट टीम कर रही पालन; ऐसा करने वाला देश का पहला डेजर्ट नेशनल पार्क बना जैसलमर

जैसलमेर8 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
गोडावण पक्षी। - Dainik Bhaskar
गोडावण पक्षी।

देश के बड़े डेजर्ट नेशनल पार्क में जैसलमेर में स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क भारत का पहला ऐसा अभयारण्य बन गया है। जहां गोडावण का प्रजनन केंद्र बनाया गया है। प्रजनन केंद्र में 2019 से अब तक 18 अंडों में से 18 चूजे निकले हैं। एक टीम अपने बच्चों की तरह इनका पालन पोषण कर रही है। दुर्लभ राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण के विशेष प्रोजेक्ट के तहत जैसलमेर के सम में डीएनपी की चौकी को प्रजनन केंद्र में बदलकर उनका कुनबा बढ़ाने की सफल कोशिश की जा रही है।

सम गांव में गोडावण का प्रजनन केंद्र
सम गांव में गोडावण का प्रजनन केंद्र

गोडावण कंजर्वेशन ब्रीडिंग प्रोगाम
जिला अधिकारी वन्य जीव अभयारण्य कपिल चंद्रवाल ने तमाम जानकारी देते हुए बताया कि गोडावण कंजर्वेशन ब्रीडिंग प्रोगाम 2019 के तहत भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून, भारत सरकार और राज्य सरकार में एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ। जिसके तहत गोडावण के संरक्षण के लिए इन-सीटू व एक्स-सीटू कार्यक्रम बनाए गए। चूंकि जैसलमेर गोडावण विचरण का बड़ा क्षेत्र है और यहां वन्य जीव अभयारण्य भी बड़ा है। इसलिए सम इलाके में गोडावण के संरक्षण व उनके कुनबे को बढ़ाने के लिए हेचरी (प्रजनन केंद्र) का निर्माण करवाया गया।

गोडावण प्रजनन केंद्र में वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम बिश्नोई (फाइल फोटो )
गोडावण प्रजनन केंद्र में वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम बिश्नोई (फाइल फोटो )

2019 से अब तक 18 अंडों से निकले चूजे
डीएफ़ओ कपिल चंद्रवाल बताते हैं कि इस हेचरी में एक्स-सीटू कार्यक्रम (क्षेत्र से बाहर ले जाकर संरक्षण) के तहत गोडावण के अंडे जो सुरक्षित स्थानों पर नहीं पाए गए, उनको यहां लाकर उसमें प्रजनन प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। साल 2019 से लेकर साल 2021 तक गोडावण के कुल 18 अंडे मिले हैं। गोडावण के विषय विशेषज्ञों की 8 सदस्यों कि टीम की निगरानी में 18 चूजे निकले हैं। अब इन शर्मीले पक्षियों को बच्चे की तरह पाल पोसकर बड़ा करने की प्रक्रिया जारी है ताकि बड़े होकर ये भी अंडे दें और जो प्रजाति लुप्त होने को है उसका कुनबा बढ़ाया जा सके।

गोडावण को हाथों से दाना खिलाते हुए।
गोडावण को हाथों से दाना खिलाते हुए।

शर्मीले पक्षी की बच्चे की तरह होती है सेवा
गोडावण बहुत ही शर्मीला पक्षी होता है। ये अकेले रहना ज्यादा पसंद है। ये इंसानी भीड़ से बेहद दूर ही रहता है। ऐसे में इसके प्रजनन को सफल बनाना बहुत ही कठिन कार्य था। डीएफओ कपिल चंद्रवाल बताते हैं कि ऐसे शर्मीले पक्षी को पालना, उसे वयस्क बनाना और इंसान की आदत लगाना ये अपने आप में बेहद मुश्किल काम था। लेकिन हमने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए इस विषय के विशेषज्ञों की मदद ली। सम स्थित गोडावण प्रजनन केंद्र में 8 विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है जो अंडे से चूजे के निकलने से लेकर उसके वयस्क होने तक उसका अपने बच्चों से भी ज्यादा ख्याल रखती है। उसे इंसान की आदत लगाने के लिए उसे अपने हाथों से खाना खिलाने से लेकर उसे बाहर पिंजरे में टहलाने तक का कार्य ये टीम करती है।

पहली बार इंसानों के साथ दिख रहा गोडावण।
पहली बार इंसानों के साथ दिख रहा गोडावण।

प्रजनन केंद्र की 35 साल तक की योजना
कपिल चंद्रवाल ने बताया कि जैसलमेर के सम में स्थापित हेचरी (प्रजनन केंद्र) की योजना करीब 35 साल की है। चूंकि मादा गोडावण साल में केवल एक बार ही अंडा देती है। अंडे से चूजे निकलने से लेकर उसके वयस्क होकर अंडे देने लायक बनने में करीब 4 साल का समय लगता है। इस साल बारिश बहुत ही कम हुई है इसलिए नए अंडे नहीं मिले हैं। अंडों को ढूंढा जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) के नाम से पुकारे जाने वाले गोडावण दुनिया में गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी के तौर पर दर्ज है। हमने इस प्रोजेक्ट में ये तय किया है कि प्रजनन केंद्र की पहली जनरेशन जो अभी तैयार हो रही है इनको नहीं छोड़ेंगे। इनसे ही आगे की प्रजनन की क्षमताएं पैदा करेंगे। इसने पैदा होने वाली इनकी सेकंड जनरेशन को डीएनपी क्षेत्र एवं अन्य जगह छोड़ा जाएगा ताकि इनकी तादाद बढ़े।

खबरें और भी हैं...