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  • Ravana Dahan Did Not Happen Before 1984, The Princely State's Vijayadashmi Festival Was Celebrated For The Last Time During The Shooting Of The Film Reshma And Shera.

विजयादशमी विशेष:1984 से पहले नहीं होता था रावण दहन, रियासतकालीन विजयादशमी पर्व आखिरी बार फिल्म रेशमा और शेरा की शूटिंग के दौरान मनाया था

जैसलमेर2 महीने पहले
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जैसलमेर के महारावल शक्ति के उपासक थे और नवरात्रा के बाद विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाते थे। यहां रावण दहन की परंपरा नहीं थी। विजयदशमी पर राजा का दरबार सजता था और सशस्त्रों की पूजा के साथ दरबार के हाथी व घोड़ों की पूजा की जाती थी। जैसलमेर रियासतकाल में इस पर्व का काफी महत्व था। पूरा शहर इसे देखने उमड़ता था। 1969 में जैसलमेर में रेशमा व शेरा की शूटिंग के दौरान रियासतकालीन विजयादशमी पर्व को आखिरी बार धूमधाम से मनाया गया था।

इतिहासकार नंदकिशोर शर्मा के अनुसार 1970 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजाओं को दिया जाने वाला वित्तीय लाभ (प्रीविपर्स) बंद कर दिया और उसके बाद से भव्य रूप से होने वाला यह कार्यक्रम बंद हो गया। उसके बाद 1984 में रावन दहन की परंपरा शुरू हुई जो अब तक चली आ रही है। शहर के पूनम स्टेडियम में रावण दहन किया जाता है, लेकिन पिछले दो साल से काेरोनाकाल की वजह से कार्यक्रम स्थगित है।

इतिहास; पहले 3 दिन तक चलता था दशहरा

जैसलमेर में रावण दहन की परंपरा नहीं थी। यहां के राजा शक्ति के उपासक थे और वे इस पर्व को नवरात्र के बाद विजया दशमी के रूप में धूमधाम से मनाया करते थे। यह पर्व तीन दिन तक चलता था। दशहरे पर चैनपुरा मोहल्ले के उत्तर में बने बुर्ज में राजा का सिंहासन लगता था। जवाहर निवास से एक भैंसे को भगाया जाता था। भैंसा डेडानसर रोड तक जाता।

वहां मंदिर में प्रवेश करने पर उसकी बलि नहीं चढ़ाई जाती थी। जैसलमेर का दशहरा पर्व हर बार अष्टमी से शुरू होता था। अष्टमी को बकरे की और 9वीं को भैंसे की बलि चढ़ाई जाती थी। यह आयोजन दुर्ग के चौक में होते थे। बुजुर्गों के अनुसार 1984 में जैसलमेर में विजय दशमी पर रावण दहन की परंपरा शुरू हुई। शुरूआत में व्यास बगेची के आगे रावण दहन होता था और उसके बाद से पूनम स्टेडियम में रावण दहन शुरू हुआ।

रेशमा व शेरा फिल्म में वास्तविक पर्व का शूट
1971 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म रेशमा और शेरा में जैसलमेर का दशहरा पर्व फिल्माया गया था। विजय दशमी के दिन ही सोनार दुर्ग के चौक में इसकी शूटिंग हुई थी और फिल्म में लाइव दशहरा पर्व बताया गया है। फिल्म की शूटिंग के दौरान ही भैंसे की बलि चढ़ाई गई थी। उसके बाद से यहां भैंसे की बलि नहीं हुई। फिल्म रेशमा और शेरा में दर्शाया गया दशहरा पर्व आखिरी था।

इस बार भी लगातार दूसरे साल नहीं होगा रावण दहन
कोरोना के चलते इस बार भी लगातार दूसरे साल रावण दहन नहीं होगा। इससे पहले 2019 में रावण का पुतला जलाकर दशहरे का पर्व मनाया गया था। इसके बाद 2020 में कोरोना के कारण इस पर्व का आयाेजन नहीं हुआ। इसके साथ ही इस बार भी रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाएगा।

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