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पूर्व आयुक्त की भूमिका पर सवाल:रिपोर्ट 1 माह 22 दिन बाद जारी नहीं, करोड़ों के फर्जी बिल व जमीनों के आवंटन को लेकर संदेह

जैसलमेरएक महीने पहले
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जैसलमेर. नगरपरिषद कार्यालय (फाइल फोटो)। - Dainik Bhaskar
जैसलमेर. नगरपरिषद कार्यालय (फाइल फोटो)।
  • नगरपरिषद की बैठक की प्रोसिडिंग जारी नहीं करने से पूर्व आयुक्त की भूमिका पर उठे सवाल

नगरपरिषद में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर चर्चाएं जोरों पर है। गत दिनों पूर्व आयुक्त के 8 माह के कार्यकाल में 118 करोड़ के भुगतान व जोनल डवलपमेंट में एक ही चेक से साढ़े तीन करोड़ के भुगतान को लेकर मामला गरमाया था। इस मामले की जांच अभी भी चल रही है। इस बीच एक और मामला सामने आ गया है। 8 फरवरी 2021 की बोर्ड मीटिंग की कार्रवाई अब तक जारी नहीं होने के पीछे कई सवाल खड़े हो गए हैं।

नगरपरिषद बोर्ड बैठक की प्रोसिडिंग सात दिन के भीतर जारी कर दी जाती है। लेकिन 8 फरवरी की बैठक को हुए 1 माह 22 दिन हो गए और अब तक प्रोसिडिंग बाहर नहीं आई है। जानकार इसकी वजह यही बताते हैं कि जानबूझकर देरी करने के पीछे कार्रवाई में हेराफेरी करना होता है। ज्यादा समय बीत जाने के बाद चुपके से बैठक कार्रवाई आउट कर दी जाती है और उसमें मनमर्जी के कई निर्णय व मुद्दे जोड़ दिए जाते हैं। इसके बाद आगामी मीटिंग में गत बोर्ड बैठक की कार्रवाई का अनुमोदन करवा लिया जाता है।

प्रोसिडिंग की रिपोर्ट के कुछ बिंदू बाहर भी आ गए

बैठक की जो प्रोसिडिंग तैयार की गई है उसके कुछ प्वाइंट बाहर आ गए हैं और कई पार्षदों को इसकी जानकारी हो चुकी है। इस वजह से नगरपरिषद में खलबली मच गई है। बताया जा रहा है कि कई ऐसे निर्णय इसमें शामिल कर लिए गए हैं जो कि बैठक के दौरान रखे ही नहीं गए थे। बताया जा रहा है कि जमीन के एक मामले की एफआईआर रिपोर्ट को वापस तक ले लिया गया है।

कई फर्जी बिलों का भुगतान व जमीनों के आवंटन के मामले

हाल ही में तैयार हुई प्रोसिडिंग में पूर्व आयुक्त की ओर से कई ऐसे निर्णय शामिल किए गए हैं जिन पर बैठक में विचार ही नहीं हुआ। खासतौर पर 10 से 15 करोड़ के फर्जी बिलों के भुगतान और बेशकीमती जमीनों को कोड़ियो के भाव आवंटित करने के मामले हैं। जानकारी के अनुसार बैठक कार्रवाई में शामिल इन मुद्दों को लेकर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है।

पार्षदों ने पहले ही चेताया था

जानकारी के अनुसार 8 फरवरी की मीटिंग से पहले भाजपा के पार्षदों सहित करीब 20 पार्षदों ने नगरपरिषद आयुक्त को लिखित में ज्ञापन दिया था जिसमें यह कहा गया था कि बजट के अलावा किसी भी मामले का प्रस्ताव बैठक में नहीं लिया जाए। बावजूद इसके इस प्रोसिडिंग में कई प्रस्ताव ले लिए गए हैं।

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