1 साल से खटारा हालत में 108 एंबुलेंस:जैसलमेर-बाड़मेर से 100 किलोमीटर की दूरी पर बसे झिनझिनयाली गांव के बाशिंदे परेशान

जैसलमेरएक महीने पहले
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108 को इलाज की दरकार - Dainik Bhaskar
108 को इलाज की दरकार

जैसलमेर जिले में करीब 100 किलोमीटर दूर बाड़मेर बार्डर पर बसे झिनझिनयाली गांव के लोग पिछले एक साल से चिकित्सा सुविधाओं में कमियों की वजह से परेशान हैं। दरअसल उनको पिछले एक साल से 108 एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आपातकालीन स्थिति में उनको निजी वाहनों की मदद लेनी पड़ती है। हालांकि ऐसा नहीं है की वहां 108 की सुविधा नहीं है लेकिन वो पिछले 1 साल से खटारा हालात में है। अब अस्पताल प्रशासन और लोग परेशान हैं मगर इसका हल नहीं निकल पा रहा है।

खराब हालत में एंबुलेंस।
खराब हालत में एंबुलेंस।

1 साल से खटारा हालत में 108

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) झिनझिनयाली में रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज दूरदराज गांवों व ढाणियों से आते हैं। अभी तो मौसमी बीमारियों के प्रकोप के कारण मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। लेकिन जब कोई आपात स्थिति होती है तब यहां मौजूद 108 जवाब दे जाती है। डॉक्टर सुमेर सिंह बताते हैं कि गंभीर अवस्था में 108 कोई काम नहीं आ रही है। खटारा हालत कि वजह से ये गाड़ी कहीं आने जाने के लायक भी नहीं है। हमने उच्चाधिकारियों को इस बारे में जानकारी दे रखी है।

अब पुरानी हो चली है 108 एंबुलेंस।
अब पुरानी हो चली है 108 एंबुलेंस।

ग्रामीण परेशान

पिछले लगभग एक साल से यहां की 108 एंबुलेंस खटारा हालत में बंद है। यहां के डॉक्टर द्वारा किसी भी गंभीर मरीज को जब रेफर किया जाता है तो उसे आपातकालीन एंबुलेंस सुविधा नहीं मिलती है। जब मरीजों के द्वारा 108 में कॉल किया जाता है तो कहते हैं कि गाड़ी खराब है। ऐसे में मरीजों को किराया कर गाड़ी में ले जाना पड़ता है। क्षेत्र का सबसे बड़ा हॉस्पिटल और आसपास के भी कई लोग इस हॉस्पिटल से उम्मीद रख कर यहां आते हैं। यहां आकर जब 108 की हालत देखते हैं तो परेशान होते हैं।

आपात स्थिति में किसी काम की नहीं है 108
आपात स्थिति में किसी काम की नहीं है 108

नई एंबुलेंस कि जरूरत है

108 संचालक भवानी सिंह बताते हैं कि ये गाड़ी पुराना मॉडल है। और इसका सामान भी बड़ी मुश्किल से मिलता है। हर बार रास्ते में खराब हो जाती है। ऐसे मे आपात स्थिति में कहीं जाने से बीएचआर घबराते हैं कि कहीं रास्ते में खराब हो गई तो मरीज का क्या होगा। हमने इसके बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत भी करवा दिया है। फिलहाल गाड़ी के पट्टे टूटे हुए हैं।