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धर्म समाज:साध्वी मृगावती ने कहा सिद्धों और हमारी आत्मा समान, आत्मगुणों पर कर्मों के आवरण का अंतर

बाड़मेर15 दिन पहले
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  • जिनकांतिसागर सूरि आराधना भवन में चातुर्मासिक काल में साध्वियों ने दिए प्रवचन

साध्वी मृगावती के चातुर्मासिक प्रवास के दौरान बुधवार को प्रवचन का आयोजन हुआ। साध्वी मृगावती ने जिनकांतिसागर सूरि आराधना भवन में कहा कि जीव को हमेशा यह चिंतन करना चाहिए कि मेरी आत्मा और सिद्धों की आत्मा में कोई फर्क नहीं है। जो गुण सिद्धों की आत्मा में है वो गुण मेरी आत्मा में भी विद्यमान है लेकिन मेरे आत्मगुणों पर कर्मों का आवरण चढ़ा हुआ है। हमारे जीवन जीने के तीन स्तर है। संज्ञा प्रधान जीवन, बुद्धि प्रधान जीवन व आज्ञा प्रधान जीवन।

हम संज्ञा प्रधान व बुद्धि प्रधान जीवन को जीते है लेकिन आज्ञा प्रधान जीवन नहीं जीते है। इंद्रियों सुखों की प्राप्ति के लिए मन चाहा जीवन जीने के लिए हम अपने आत्मगुणों का घात कर देते हैं। हम प्रतिपल आहार, भय, मैथुन व परिग्रह संज्ञा में ही जीते हैं। साध्वी ने कहा कि हमारे महापुरुषों का आदर्श कभी भी हमें संज्ञा प्रधान जीवन जीने की प्रेरणा नहीं देता है। हम पुद्गलों के वशीभूत होकर पुद्गलानंदी बन गए है। परमात्मा ने जैसा कहा, जो कहा, जिस प्रकार कहा उसी आज्ञा के अनुसार जीवन जीना आज्ञा प्रधान जीवन है। परमात्मा के शासन में जन्म लिया है हमारे को परमात्मा की आज्ञा का पालन करना परम कर्तव्य है। परमात्मा की आज्ञा का पालन करके ही हम परमात्मा बन सकते है। चातुर्मास के इन चार माह में हमें पुद्गलानंदी से आत्मानंदी बनने का पुरूषार्थ करना है।

साध्वी नित्योदया ने कहा कि प्राणी दो प्रकार के होते है एक ज्ञानी व दूसरा अज्ञानी। जिनको आत्मज्ञान की जिज्ञासा रहती है वो ज्ञानी है तथा जिसे पुद्गलों का ख्याल रहता है उसमें ही मस्त रहता है वो है अज्ञानी जीव। अज्ञानी व्यक्ति पैसा, पद, प्रतिष्ठा व संबंधों को अपना मानकर जीता है तथा इसमें से किसी एक को भी नुकसान होता है तो उसका मन डांवाडोल हो जाता है।

मन में संकल्प-विकल्प उठने लगते है वहीं ज्ञानी व्यक्ति के करोड़ों का भी नुकसान हो जाए तो भी उसका मन विचलित नही होता है।खरतरगच्छ संघ चातुर्मास समिति के पारसमल मालू व मीडिया प्रभारी चन्द्रप्रकाश छाजेड़ ने बताया कि साध्वी मृगावती के सान्निध्य में प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक प्रवचन, सुबह 6.15 बजे से 7 बजे तक स्वाध्याय, दोपहर 2 से 4 ज्ञान चर्चा, नित्य प्रतिक्रमण, तप-त्याग आदि अनेकविध अभूत अनुष्ठान इत्यादि अनेक कार्यक्रम इस चातुर्मास के दौरान सम्पन्न होंगे।

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ में बुधवार को साध्वी अभिप्साश्री, साध्वी मानसश्री, साध्वी सुहानाश्री म.सा.आदि ठाणा-3 का चातुर्मासिक प्रवेश स्थानक भवन में हुआ।स्थानक भवन में साध्वीवृंदों के मंगल प्रवेश पर धर्मसभा का आयोजन हुआ। साध्वी अभीप्साश्री ने प्रवचन के दौरान कहा कि चातुर्मास जीवन को उन्नत बनाने का स्वर्णिम समय है, जीवन को धर्ममय बनाने का उत्तम अवसर है। हमें चातुर्मास में सामायिक, संवर, पोषध, जाप स्वाध्याय व त्याग-तपस्या आदि कार्य करने हैं और वर्जनीय कार्यों को छोड़ना है।

धर्मसभा में महिला मंडल से संतोष बोहरा, वीरता बांठिया, कुमकुम धारीवाल ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस कड़ी में संघ अध्यक्ष ताराचंद चौपड़ा, गेंदमल गोगड़, दिनेश लूणिया, जितेंद्र बांठिया, कैलाश बोहरा सहित कई लोगों ने कृतज्ञता प्रकट की। इस अवसर पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के उपाध्यक्ष अनुराग गांग, चेतनराज लूणिया, नाकोड़ा तीर्थ के ट्रस्टी छगनराज बोथरा, मुकेश बोहरा अमन एवं जिनशासन विहार ग्रुप के सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन मंत्री मूलचंद गोगड़ ने किया।

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