पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

मृत्यु पर गम बांटिए:कन्नोई के सरूपाराम ने मृत्युभोज नहीं करने की हिदायत दी, 1986 में निधन के बाद बेटों ने गांव में बनाया अस्पताल

जैसलमेर10 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • मृत्युभोज पर हाेने वाले खर्च काे सामाजिक सराेकार में लगाना ही सार्थक

मृत्युभोज जहां हर समाज के लिए बड़ी सामाजिक बुराई बन चुका है वहीं कई साल पहले से ही कई लोग मृत्युभोज के खिलाफ रहे हैं। इतना ही नहीं जिले में कई लोग मृत्युभोज का वर्षों से बहिष्कार करते आ रहे हैं। भास्कर की पहल के बाद सैकड़ों युवाओं ने भी मृत्युभोज में न जाने का संकल्प लिया है। वहीं कई समाज भी इस पहल से आगे आए हैं और अपने अपने समाज की बैठकों में मृत्युभोज पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।

कन्नोई के सरूपाराम शुरू से ही मृत्युभोज के खिलाफ रहे। वे पहले से ही इसका बहिष्कार करते आए और अपने आखिरी समय में उन्होंने अपने छह बेटों को मृत्युभोज न करने की हिदायत दी। 1986 में सरूपाराम का निधन हो गया। उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके पुत्र लीलाराम, मोहनलाल, किशनलाल, चिमनलाल, सरदाराराम, शंकरलाल व चतुर्भुज ने एक राय होकर गांव में अपने पिता की स्मृति में अस्पताल बनाने का निर्णय लिया। करीब 65 हजार की लागत से 34 साल पहले कन्नोई गांव में अस्पताल बनवाया। 13 मार्च 1986 को तत्कालीन कलेक्टर ललित के. पंवार व तत्कालीन जिला प्रमुख भोपालसिंह ने अस्पताल का उद्घाटन किया। 

सरूपाराम के पुत्र चतुर्भुज प्रजापत सेवानिवृत्त वरिष्ठ व्याख्याता डाइट ने बताया कि उनकेे पिताजी शुरू से ही मृत्युभोज के खिलाफ रहे थे, इसलिए उन्होंने अपने निधन के बाद मृत्युभोज न करने की स्पष्ट हिदायत दी थी। उनकी इच्छा के अनुसार हम सभी भाईयों ने ऐसा ही किया और उसके बाद भी हमारे परिवार में कभी भी मृत्युभोज नहीं किया। आज तक हम यही परंपरा निभा रहे हैं। परिवार में किसी के निधन होने पर सामाजिक कार्यों में राशि खर्च की जाती है।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आध्यात्मिक गतिविधियों में समय व्यतीत होगा। जिससे आपकी विचार शैली में नयापन आएगा। दूसरों की मदद करने से आत्मिक खुशी महसूस होगी। तथा व्यक्तिगत कार्य भी शांतिपूर्ण तरीके से सुलझते जाएंगे। नेगेट...

    और पढ़ें