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बड़ा खतरा:राज्य पक्षी खतरे में, डीएनपी में रह रहे 40 से कम गोडावण जंगली कुत्ताें, सूअर अाैर शिकारी बाजों से घिरे

जैसलमेर10 महीने पहले
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  • प्रजनन केन्द्र में गोडावण की फौज तैयार हो रही, डीएनपी में इनकी सुरक्षा में ही सेंध

जैसलमेर व बाड़मेर में करीब 3 हजार 162 वर्ग किमी में फैले डेजर्ट नेशनल पार्क में अब गोडावण सुरक्षित नजर नहीं आ रहा है। गोडावण पर बड़े खतरे मंडराने लगे हैं। पिछले तीन दशक में ऐसा पहला मामला सामने आया है जब किसी बाज ने एक गोडावण का शिकार कर दिया। 

लुप्त प्राय गोडावण को बचाने के लिए देश विदेश के विशेषज्ञ जुटे हुए हैं और इस बीच किसी शिकारी बाज के हमले की घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। इतना ही नहीं कुछ जानकारों का मानना है कि यदि शिकारी बाज की नजरें गोडावण पर रही तो वह दिन दूर नहीं जब डीएनपी में गोडावण नहीं बचेंगे।

40 से भी कम गोडावण बचे हैं। गोडावण की संख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। जहां 5 दशक पहले इनकी तादाद 1500 के करीब थी वहीं अब इनकी संख्या 150 के भीतर सिमट गई है। सर्वाधिक गोडावण जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में रहते हैं।

यहां इनकी संख्या 40 से भी कम है। हाल ही में वाटर हॉल पद्धति से हुई गणना में केवल 19 गोडावण ही नजर आए थे। यह गोडावण संरक्षण प्रोजेक्ट के लिए बड़ी चिंता का विषय है। संरक्षण को लेकर ठोस कमद उठाने की जरूरत है। 

  • श्वान व सूअरों का खतरा भी मंडरा रहा है 

डीएनपी में गोडावण संरक्षण के लिए क्लोजर बने हुए हैं। अधिकांश गोडावण क्लोजर में ही रहते हैं और प्रजनन वहीं करते हैं।  कुछ गोडावण डीएनपी क्षेत्र के बाहर भी विचरण करते हैं। इसमें मुख्य रूप से खेतोलाई व फील्ड फायरिंग रेंज का इलाका है। ऐसे में इन इलाकों में गोडावणों को श्वान व सूअर का भी खतरा है।

पिछले दिनों गोडावण के आसपास घूमते श्वान भी देखे गए थे। इनका खतरा भी बड़ा है। बताया जा रहा है कि कुछ साल पहले तक गोडावण का प्रजनन काल सबसे ज्यादा खतरे में रहता था। दर्जनों अंडों को श्वान नुकसान पहुंचा चुके हैं। 

  • इधर संरक्षण तो दूसरी तरफ सुरक्षा में सेंध 

प्रजनन केन्द्र में गोडावण की फौज तैयार की जा रही है तो दूसरी तरफ डीएनपी में रहने वाले गोडावणों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।  जानकारों का कहना है कि हो सकता है कि प्रजनन केन्द्र का प्रोजेक्ट सफल रहे लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि यह प्रोजेक्ट फेल भी हो सकता है। इसका पता आगामी कुछ सालों बाद ही चल पाएगा। इस बीच यदि डीएनपी क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ गई तो गोडावण लुप्त हो सकते हैं। 

बाज 120 किमी तक की भरता है उड़ान

जानकारों के अनुसार जिस बाज ने गोडावण पर हमला किया था वह कहां से आया था इसका पता लगाना मुश्किल है। शुरुआती तौर पर यह जांच की जा रही है कि रामदेवरा के आसपास कहीं बाज का झुंड तो नहीं है। लेकिन दूसरी तरफ जानकारों का यह भी कहना है कि एक बाज अपने स्थान से 120 किमी दूर तक उड़ान भर सकता है। ऐसे में गोडावण संरक्षण के क्लोजर तक शिकारी बाज कहीं से भी पहुंच सकते हैं। इस लिहाज से सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।   

गोडावण को मारने की पहली घटना 
गोडावण संरक्षण विभाग से जुड़े अधिकारी भी अचंभित है कि किसी शिकार बाज ने गोडावण को मार दिया। इससे पहले इस तरह की घटना गोडावण के साथ नहीं हुई। हालांकि श्वानों, सुअरों ने गोडावण पर कई बार हमला किया है लेकिन बाज ने पहली बार हमला किया है। ऐसे में खतरा बढ़ गया है क्योंकि क्लोजर में श्वान व सुअरों के प्रवेश पर रोक है और उन्हें क्लोजर में आने से रोका जा सकता है लेकिन आसमान में उड़ते बाज को क्लोजर में आने से रोकना असंभव है। 

जिम्मेदारों की लापरवाही : तीन साल से नहीं हुई गणना 
गोडावण को लेकर सरकार गंभीर है न अफसर। करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद पिछले डेढ़ दशक में गोडावण की संख्या में इजाफा नहीं हुआ। प्रजनन केन्द्र एक मात्र ऐसा प्रोजेक्ट है, इससेे गोडावण संरक्षण के प्रयासों को पंख लगे हैं। लापरवाही के कारण पिछले तीन साल से गोडावण की गणना नहीं की गई है। ऐसे में अधिकारियों को यह भी पता नहीं है कि डीएनपी में कितने गोडावण हैं। 

  • इस तरह की घटना पहली बार हुई है। क्लोजर की सुरक्षा कड़ी है और श्वान व सुअरों का बिल्कुल प्रवेश नहीं है। क्लोजर में बाज की घटना ने परेशान किया है लेकिन यह एक प्राकृतिक घटना है। अलग अलग टीमें गठित की जाकर क्लोजर की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। 
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