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अनदेखी:पर्यटन की राह में रोड़ा;दस साल से गिरोह सक्रिय पुलिस व पर्यटन विभाग लपकों को रोकने में नाकाम

जैसलमेरएक महीने पहले
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  • देसी सैलानियों की आवक शुरू होने के साथ ही लपके हो गए सक्रिय, पर्यटकों को गुमराह करने में जुटे

जिले का पर्यटन व्यवसाय लपकों से परेशान हैं। लपको की समस्या अब नासूर बन चुकी है। बावजूद इसके इन पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। साल दर साल पर्यटकों को लपकों द्वारा परेशान करने की घटनाओं में इजाफा होता जा रहा है।

करीब 10 साल में इस समस्या ने विकराल रूप ले लिया है, लेकिन इस दौरान पुलिस व पर्यटन विभाग के जिम्मेदार इस पर लगाम कसने में सफल नहीं हो पाए। वर्तमान में कोरोना के चलते वैसे ही सीजन चौपट हो रखी है।

हाल ही में कुछ देसी सैलानियों की आवक शुरू हुई है और इसके साथ ही लपके भी सक्रिय हो गए हैं। जैसलमेर से जोधपुर व बाड़मेर जाने वाले मार्ग पर 10 से 12 लपके अपनी बाइक पर बाहर से आने वाली गाड़ियों का पीछा करते हुए नजर आ जाएंगे।

जैसलमेर में जब भी नए पुलिस अधीक्षक ने ज्वॉइन किया है तो उन्होंने अपनी प्राथमिकता में लपकों पर लगाम लगाने की बात कही। लेकिन एक बार भी ऐसा नहीं हुआ कि पर्यटन सीजन में लपके शांत हो गए। कुछ दिन तक सख्ती रहती है और उसके बाद हालात जस के तस। 10 साल में जितने भी एसपी जैसलमेर लगे हैं उनमें से एक भी लपकों पर लगाम कसने में सफल नहीं हो पाए।

नया फंडा : जैसलमेर शहर में कोरोना का डर बताकर पर्यटकों को सीधे ही सम स्थित रिसोर्ट ले जा रहे

ऐसा है पर्यटन कारोबार
> स्वर्णनगरी में सालाना 7 से 8 लाख देसी विदेशी सैलानी आते हैं।
>सालाना 500 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर पर्यटन व्यवसाय से है।
>यहां 200 से अधिक होटलें संचालित है।
>सम व खुहड़ी में 100 से अधिक रिसोर्ट संचालित है।
>5 हजार परिवार सीधे तौर पर पर्यटन व्यवसाय पर निर्भर है।

कोरोना का खौफ बताकर सैलानियों को सम ले जा रहे हैं
हाल ही में सक्रिय लपकों ने नया फंडा अपना रखा है। जैसलमेर शहर में कोरोना का खौफ बताकर सैलानियों को सीधे ही सम ले जाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार लपके सैलानियों को भ्रमित कर रहे हैं और कहते हैं कि शहर में कोरोना डर है, सम क्षेत्र में कोरोना का एक भी मरीज नहीं आया है, ऐसे में सीधे ही रिसोर्ट में ठहरने की सलाह देते हैं। वापस आते वक्त शहर में दो तीन घंटे भ्रमण कर वापस लौट सकते हैं।

100की स्पीड से करते हैं गाड़ियों का पीछा,रोकता कोई नहीं है, झगड़े पर उतारू तक हो जाते हैं
जोधपुर व बाड़मेर मार्ग पर लपकों के जगह जगह अड्डे बने हुए हैं। बाहर से आने वाली गाड़ी का ये 100 की स्पीड में पीछा करते हैं और रास्ते में ही उन्हें भ्रमित करने के लिए तरह तरह की कहानियां बताकर अपने रिसोर्ट या होटल में बेहतर सुविधा देने का लालच देते हैं। यह नजारा इन मार्गो पर आम है।

इस मार्ग पर जिले के आला अधिकारियों ने भी ऐसे नजारे देखे हैं, पर्यटन व्यवसायियों को भी पता है लेकिन इन्हें रोकने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है। लपकों के हौसले इतने बुलंद है कि वे इस रोड से चलने वाले स्थानीय लोगों से कई बार झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं।

गाड़ियों के आगे पीछे तेज रफ्तार से बाइक चलाने वाले इन लपकों से कोई उलझना नहीं चाहता है। पुलिस की गाड़ियां भी इस रोड से निकलती है लेकिन लपकों पर इसका कोई असर नहीं होता। कई बार सैलानी इनकी नहीं मानते तो उनसे भी बहस करके झगड़ा करने को तैयार हो जाते हैं।

पर्यटन को बचाना है तो इन्हें रोकना होगा
जैसलमेर के पर्यटन को अगर बचाना है तो लपकों को रोकने की सख्त जरूरत है। कुछ साल पहले तक जैसलमेर में बड़ी तादाद में विदेशी सैलानी आते थे लेकिन इस समस्या के चलते जैसलमेर की छवि खराब हो गई और विदेशी सैलानियों की आवक घट गई है। समय रहते यदि सजग नहीं हुए तो देसी सैलानियों की आवक में भी कमी आ जाएगी जिससे जैसलमेर की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।

सख्त कार्रवाई से ही लपकों पर लगेगी लगाम

1. जिस होटल या रिसोर्ट के लिए यह लपके काम करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई हो, लाइसेंस रद्द किया जाए । 2. जो लपका एक से अधिक बार पुलिस की गिरफ्त में आ जाए, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि फिर से वह इस तरह की गलती न करे।

3. पुलिस व पर्यटन के जिम्मेदार गुजरात की गाड़ी में सिविल ड्रेस में सवार होकर लपकों के अड्डे पर पहुंचकर लपकों की समस्या को लाइव देख सकते हैं। 4. पुलिस की एक टीम इन पर निगरानी रखकर चिन्हित कर सकती है और उसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

जैसलमेर से सम रोड पर भी सक्रिय | अब लपकों ने अपना नया डेरा सम मार्ग पर बना लिया है। ये सभी लपके सम स्थित रिसोर्टस में कार्यरत हैं और वहां उनकी कमीशन की सैटिंग है। ऐसे में अमरसागर तिराहे से लेकर दामोदरा, कन्नोई और सम तक लपकों की अलग अलग टोलियां बैठी रहती है।

  • लपकों की समस्या को लेकर समय रहते सभी को सजग होना पड़ेगा। पुलिस व पर्यटन के साथ व्यवसायियों को भी समस्या के निस्तारण के लिए आगे आना होगा। पर्यटन को बचाने लपकों पर लगाम जरूरी है। - अविनाश बिस्सा, पर्यटन व्यवसायी
  • लपको की वजह से ही विदेशी सैलानियों की आवक घटी है, यदि अब इन पर रोक नहीं लगी तो देसी सैलानी भी जैसलमेर से अपना मुंह मोड़ लेंगे। सैलानियों के साथ इनके द्वारा दुर्व्यवहार किया जाता है। - सुरेन्द्रसिंह, पर्यटन व्यवसायी
  • लपकों पर रोक लगाने के पुलिस विभाग चुस्त है। आगामी दिनों में लपकों की धरपकड़ करने के साथ साथ इन्हें चिह्नित कर स्थाई समाधान भी करने का प्रयास किया जाएगा। - राकेश बैरवा, एएसपी, जैसलमेर

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