तालाबों पर नजर आ रहा बार हेडेडे गूज:8 हजार मीटर ऊंचे हिमालय को पार कर जैसलमरे पहुंंचा सफेद हंस

जैसलमेर7 महीने पहले
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बार हेडेड गूज।

सफेद हंस के नाम से जाना जाने वाले बार हेडेड गूज नामक विदेशी मेहमान पक्षी ने जैसलमेर के तालाबों पर अपनी दस्तक दी है। इन पक्षियों के समूहों ने जिले के लाठी, खेतोलाई, चाचा, देगराय तालाब में अपना डेरा जमा लिया है। इन इलाकों के तालाबों में इनकी अठखेलियां देखी जा सकती हैं। ये पक्षी एक बार में 1600 किलोमीटर तक की उड़ान भर सकते हैं। दरअसल चीन, मंगोलिया, साइबीरिया और तिब्बती देशों में जब तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस के नीचे चला जाता है और पहाड़ों पर बर्फ जमने के कारण खाने की कमी हो जाती है तो बार हेडेड गूज पक्षी भारत की ओर रुख करते हैं।

भारत में बड़ा सफेद हंस कहलाता है बार हेडेड गूज।
भारत में बड़ा सफेद हंस कहलाता है बार हेडेड गूज।

बार हेडेड गूज हिमालय की करीब आठ हजार मीटर ऊंची पहाड़ियों को पार कर भारत आते हैं। ठंड कम होते ही मार्च महीने में ये प्रवासी पक्षी अपने देश को लौट जाते हैं। इन्हें विश्व में सबसे ऊंचाई पर उड़ने वाला पक्षी माना जाता है। पक्षी प्रेमी सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि बार हेडेड गूज पानी में उगी घासों को ही खाते हैं। इसलिए इन्हें शाकाहारी माना जाता है। इन्हें जोड़ों में रहना पसंद है।

बेहद ही शांत स्वाभाव वाले ये मेहमान खतरा भांपते ही अपने डेरे को छोड़ देते हैं और दूसरी जगह अपना बसेरा बना लेते हैं। इस इलाके में बार हेडेड गूज की आवक शुभ संकेत दे रही है। लाठी इलाके में दुर्लभ प्रजाति के विदेशी पक्षियों लगातार पहुंच रहे हैं जो खुशी की बात है। पहले भी लाठी में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी देखे गए हैं। ऐसे पक्षियों के आने से से इलाके में प्रवासी पक्षियों का डेरा होगा और वन्यजीव पर शोध के लिए नया इलाका तैयार होगा।

बत्तख की प्रजाति है बार हेडेड गूज

बार हेडेड गूज का वजन दो से तीन कोलोग्राम का होता है। बत्तख की प्रजाति का होने के कारण इनका आकार दो से ढाई फीट होता है। सिर सफेद और उस पर दो काले रंग की धारी होती है। इसी खासियत के कारण इन्हें बार हेडेड कहा जाता है। गर्दन और सिर का रंग सफेद और बाकी हिस्सा स्लेटी कलर का होता है। भारत में इन्हें बड़े सफेद हंस के नाम से भी जानते हैं। मादा बार हेडेड एक बार में 6 से 8 अंडे देती है। अंडों से एक महीने के अंदर बच्चे बाहर आते हैं और दो महीने के अंदर उड़ना सीख जाते हैं। खून में हीमोग्लोबिन में अमीनो अम्ल पाए जाने के कारण ये 8 घंटे तक बगैर रुके उड़ने की ताकत रखते हैं। मई महीने के अंत में ये प्रजनन करते हैं। इनके आने से पर्यावरण प्रेमी व पक्षी प्रेमी सभी बहुत खुश हैं।