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मनमानी चल रही है:मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष के आदेश के बाद भी विभाग ने काम पर नहीं लिया

जैसलमेर18 दिन पहले
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  • 11 साल से समग्र शिक्षा अभियान में कार्यरत महिला संतोष को हटाया

जैसलमेर के समग्र शिक्षा अभियान में कार्यरत संतोष छंगाणी को 11 साल के अनुभव के बावजूद हटा दिया गया। इस पर गत 15 अप्रैल को संतोष छंगाणी द्वारा मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष गोपाल कृष्ण व्यास से जैसलमेर में आयोजित कोर्ट कैंप में मिलकर अपनी परिवेदना बताई थी। इस पर मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण व्यास द्वारा मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को परिवेदना का तुरंत निस्तारण करने के निर्देश देने के तीन महीने बाद भी शिक्षा विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष द्वारा दिए निर्देशों की शिक्षा विभाग द्वारा पालना नहीं की जा रही है। वहीं संतोष छंगाणी को भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। संतोष छंगाणी द्वारा तीन महीने से शिक्षा विभाग के चक्कर लगाएं जा रहे है। लेकिन अधिकारियों द्वारा परिवेदना का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। जिस पर संतोष छंगाणी ने कलेक्टर व एडीएम को भी ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई गई है।

यह है मामला : योग्य कर्मी को हटाकर दूसरे को लगाया

शिक्षा विभाग में पहले सर्व शिक्षा अभियान व राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की दो योजनाएं चलती थी। इसके बाद दोनों योजनाओं को मर्ज करते हुए समग्र शिक्षा अभियान में तब्दील कर दिया गया है। इसके बाद दोनों योजनाओं के मर्ज होने के कारण पदों में भी कटौती की गई। प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को अधिकारियों द्वारा अपनी मनमर्जी से हटा दिया गया। इसके साथ ही कर्मचारियों को परेशान करने के लिए अलग अलग जगहों पर नियुक्त कर दिया। जिसमें अधिकारियों द्वारा शैक्षणिक योग्यता व अनुभव को दरकिनार करते हुए द्वेषता पूर्वक संतोष को हटा दिया गया था। जबकि संतोष के पास शैक्षणिक योग्यता व अनुभव की कोई कमी नहीं थी। इसके साथ ही नए कर्मचारी जिनकी शैक्षणिक योग्यता व अनुभव संतोष से कम होने के बावजूद उनसे सेवाएं ली जा रही है।

शैक्षणिक योग्यता व अनुभव के बावजूद किया जा रहा है परेशान, परेशान हो रही है पीडि़ता

जैसलमेर के समग्र शिक्षा विभाग में संतोष छंगाणी करीब 11 साल से प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत थी। उन्होंने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा द्वेषता रखते हुए लंबे अनुभव के बावजूद भेदभाव करते हुए हटा दिया गया। संतोष ने अारोप लगाए है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा मुझसे कम शैक्षणिक योग्यता व अनुभव होने के बावजूद द्वेषता के चलते उनसे सेवाएं ली जा रही है। उन्होंने शिक्षा विभाग पर द्वेषता के साथ ही टालमटोल का रवैया अपनाते हुए महिला को परेशान करने का आरोप लगाया है।

अब दिया जवाब कि पद खाली नहीं

संतोष छंगाणी द्वारा पिछले एक साल से शिक्षा विभाग से लगातार पत्र व्यवहार किया जा रहा है। लेकिन संतोष को कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद संतोष छंगाणी द्वारा जैसलमेर कोर्ट कैंप में मानवाधिकार आयोग के समक्ष पेश होकर अपनी परिवेदना बताई गई। जिस पर मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष द्वारा मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रामखिलाड़ी बैरवा को इस प्रकरण का तुरंत निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। जिसके बाद अब शिक्षा विभाग द्वारा संतोष को यह जवाब देकर इतिश्री कर ली गई है कि अब शिक्षा विभाग में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कोई पद रिक्त नहीं है। जबकि संतोष को क्यों हटाया गया इसका जवाब कोई नहीं दे रहा है।

कोर्ट कैंप में मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष द्वारा परिवेदना निस्तारण के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अब समग्र शिक्षा अभियान में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कर्मचारी लिए जाते है। फिलहाल कोई भी पद रिक्त नहीं है। ऐसे में संतोष को लगाना संभव नहीं है।

दलपतसिंह सौलंकी, एडीपीसी, समग्र शिक्षा अभियान

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