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कोरोना का असर:नवरात्रा में इस बार तनोट माता के दर्शन को कम पहुंचे श्रद्धालु, प्रसाद भी नहीं चढ़ा सके

जैसलमेर5 दिन पहले
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  • घट स्थापना के साथ ही मंदिरों में गूंजे जयकारे, घर घर में की गई स्थापना

शारदीय नवरात्रा शनिवार से शुरू होने के साथ ही घट स्थापना के साथ देवी मंदिरों में जयकारे गूंज उठे। शनिवार को अधिकतर स्थानों पर लोगों ने सुबह सुबह ही घटस्थापना की। कुछ लोगों ने दोपहर में अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापित कर देवी की अराधना शुरू की। जिले भर में भक्ति का माहौल नजर आने लगा। परंपरा और संस्कृति की नगरी जैसलमेर में शारदीय नवरात्र से ही लोगों ने व्रत-उपवास रखने शुरू कर दिए। आगामी दिनों के व्रत-उपवास के साथ ही श्रद्धालुओं ने साधना के लिए अपने-अपने स्थान तय कर लिए। शहर के देवी मंदिरों में भीड़ देखी गई। तेरे शरणे आयो मां मोटी है जगदंबे मां...चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है...मां शेरा वाली मां मेहरों वाली...फूलों की जगह आंसू लिए आयो है पुजारी, म्हारी विणती सुन ले महतारी....संकट हरिणी मंगल करणी भक्त वत्सल महाराणी, हे महाकाले हे बलशाली मेरी जगदंबा भवानी...आदि भजन देवी मंदिरों में जोर-शोर गूंज रहे थे। सुबह से ही श्रद्धालु देवी मंदिरों में दर्शनों के लिए पहुंच रहे थे।

शारदीय नवरात्र आरंभ होते ही शहर की फिज़ां भी बदली-बदली सी नजर आने लगी है। चारों तरफ भक्ति और शक्ति पूजा का माहौल है। क्षत्रिय समाज के लोगों में भी देवी पूजा को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न जाति और समुदाय के लोग अपने-अपने ढंग से नवरात्र पर देवी उपासना में लीन देखे गए। शुभ मुहूर्त में भक्तों ने मिट्टी के शुद्ध बर्तन में और कहीं-कहीं पर शुद्ध रेत की वेदिका बनाकर ज्वारे बोए। शनिवार को स्वांगिया माता मंदिर, तेमड़ेराय, भादरिया, नभडूंगर, तनोट, कालेडूंगर, देगराय, हिंगलाज, होमगार्ड देवी मंदिर, गजरूपसागर और अन्य देवी मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए गए।

रामगढ़ | सीमावर्ती तनोट राय मंदिर में घट कलश स्थापना के साथ नो दिनों तक चलने वाला मेला प्रारंभ हो गया। पहले नवरात्र के मौके पर मंदिर पुजारी द्वारा हवन किया गया तथा आरती की गई तनोट माता के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ तनोट माता के दर्शन कराए गए। सीमा सुरक्षा बल के जवानों द्वारा भक्तों के हाथों को सेनेटराइज करने की व्यवस्था की गई। है वही मास्क लगाने के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। फिलहाल मंदिर में प्रसाद चढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई है भक्त केवल तनोट माता के दर्शन कर लौट रहे हैं।

जैसलमेर में भी गरबो को लेकर आमजन में विशेष क्रेज है। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते भीड़ इकट्‌ठी नहीं होने को लेकर गरबों का आयोजन नहीं किया जा रहा है। आमतौर पर शारदीय नवरात्रा में शाम होने के साथ ही शहर की गली गली में गरबों की खनक शुरू हो जती थी। लेकिन इस बार कोरोना के कारण गरबों का आयोजन नहीं किया जा रहा है।

पोकरण | वैश्विक महामारी कोरोना ने इन दिनों पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया है। वहीं जिले में पोकरण शहर से शुरू हुआ कोरोना पॉजिटिव मरीजों के मिलने का आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी वैश्विक महामारी को इन दिनों शक्तिपीठों पर भी पूरा असर दिखाई दिया है। शनिवार से शारदीय नवरात्रा शुरू होने के साथ ही जहां मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने के साथ ही पैर रखने की भी जगह नहीं होती थी। वहीं नवरात्रा के पहले दिन शहर के आशापुरा मंदिर, खींवज मंदिर, धरज्जवल माता मंदिर, ज्वाला माता मंदिर, खींवज मंदिर, कालका मंदिर में इक्का दुक्का श्रद्धालु ही देखने को मिले। कोरोना गाइड लाइन की पालना के साथ ही खुले शक्तिपीठों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा का जहां पूर्ण ध्यान दिया जा रहा है। वहीं माता के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालु भी गिने चुने ही नजर आ रहे हैं। जिसके कारण मंदिरों भीड़ नहीं दिखाई दे रही है। मंदिरों में मात्र नवरात्रा करने वाले पुजारी ही नजर आ रहे हैं।

देवी मंदिरों में नवरात्रा करने का संकल्प करने वाले श्रद्धालुओं ने इन दिनों कोरोना के कहर को देखते हुए अपने अपने घरों में ही घट स्थापना कर नवरात्रा को व्रत करने का संकल्प लिया। इसके साथ ही शहरवासियों ने अपने अपने घरों में अभिजीत मुहूर्त में पूजा अर्चना कर घट स्थापना की।पंडित आचार्य अजय व्यास ने बताया कि मंदिरों में जाकर नवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालु वहां पर पूरी तरह से क्वारेंटाइन रहते हैं। वह न तो किसी अन्य के सामान को छूते हैं और न ही किसी के बिस्तर पर सोते हैं। इन दिनों कोरोना के कहर के चलते कई लोगों ने अपने घरों में ही घट स्थापना की है।

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