ये अनदेखी ठीक नहीं:केन्द्र में हमारे दो मंत्री फिर भी नई ट्रेन व एक्सटेंशन का एक भी प्रस्ताव नहीं, हावड़ा व रूणिचा एक्सप्रेस को भी बंद किया

जैसलमेर5 महीने पहलेलेखक: सुधीर थानवी
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हर साल आते हैं आठ लाख पर्यटक, फिर भी रेल सुविधाएं नहीं। - Dainik Bhaskar
हर साल आते हैं आठ लाख पर्यटक, फिर भी रेल सुविधाएं नहीं।

हर साल 8 से 10 लाख सैलानी यहां आते हैं, जिले की आबादी 7 लाख से ज्यादा है, दर्जनों बाहरी कंपनियां यहां कार्यरत है, बीएसएफ, सेना व एयरफोर्स के हजारों सैनिक भी यहां रहते हैं लेकिन बावजूद इसके रेल सुविधा में जैसलमेर में शुरू से लेकर अब तक पीछे ही रहा है। यहां आने वालों के लिए रेल कनेक्टिविटी बड़ी समस्या है। लम्बी दूरी की ट्रेनों के नाम पर यहां इक्का दुक्का ट्रेन ही है। इसमें एक तो साप्ताहिक है।

जानकारों का मानना है कि यदि रेल कनेक्टिविटी बेहतर हो तो जैसलमेर जिले का विकास कई गुणा तेजी से हो सकता है और यहां पर्यटकों की आवक दुगुनी हो सकती है। जैसलमेर का दुर्भाग्य है कि इसकी पैरवी करने वाला कोई नहीं है। केन्द्र सरकार में हमारे दो मंत्री है एक बाड़मेर जैसलमेर सांसद कैलाश चौधरी और दूसरे जोधपुर पोकरण सांसद गजेन्द्रसिंह शेखावत लेकिन इनका फोकस बाड़मेर व जोधपुर पर ज्यादा है।

यही वजह है कि जैसलमेर की आवाज ऊपर तक नहीं पहुंच पाती है। पर्यटन मानचित्र पर जैसलमेर बहुत बड़ा पर्यटन स्थल है, जैसलमेर का आकर्षण सैलानियों को यहां खींच लाता है। यह जिला सोलर हब बनने के साथ साथ सामरिक दृष्टि से बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है लेकिन जैसलमेर के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार समझ से परे है।

कई ट्रेनें जोधपुर खड़ी रहती है लेकिन जैसलमेर तक एक्सटेंशन नहीं

जैसलमेर को अलग से नई ट्रेन नहीं दी जाए तो जोधपुर तक चलने वाली ट्रेनो को यहां तक एक्सटेंड किया जा सकता है। जिसमें मुख्य रूप से सूर्यनगरी एक्सप्रेस जो जोधपुर में सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक खड़ी रहती है। वहीं हावड़ा जोधपुर भी सुबह 6 से रात 11 बजे तक खड़ी रहती है। इसके अलावा बीकानेर दिल्ली के बीच चलने वाली ट्रेन बीकानेर में सुबह 7 से रात 10 बजे खड़ी रहती है, इन ट्रेनों को जैसलमेर तक बढ़ाया जा सकता है।

जिले से दो सांसद,फिर जैसलमेर की अनदेखी
जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र बाड़मेर संसदीय क्षेत्र में है और पोकरण विधानसभा क्षेत्र जोधपुर संसदीय क्षेत्र में, ऐसे में जैसलमेर को केन्द्र सरकार में कभी भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला। इसका बड़ा कारण यहां से चुने जाने वाले सांसदों के लिए बाड़मेर व जोधपुर ज्यादा महत्व रखते हैं, क्योंकि अधिकांश वोटर वहीं के हैं।

सबसे ज्यादा राजस्व देने पर भी फायदा नहीं
रेवन्यू के मामले में जैसलमेर रेलवे स्टेशन अव्वल है। एक तो लाखों सैलानियों का आवागमन और दूसरा जैसलमेर से सोनू लाइम स्टोन का बाहर जाना। रोजाना दो से तीन रैक मालगाड़ी लाइम स्टोन लेकर स्टील प्लांट्स में जाती है। सबसे ज्यादा रेवन्यू देने के बावजूद जैसलमेर को किसी तरह की सौगात नहीं दी जाती है।

जैसलमेर को एक भी ट्रेन नहीं

सीनियर डिवीजनल ऑपरेशन मैनेजर जोधपुर ने चीफ पैसेंजर ट्रांसपोर्टेशन मैनेजर को नई ट्रेनों व एक्सटेंशन ट्रेनों का प्रस्ताव भेजा है। इसमें बाड़मेर के लिए छह ट्रेनें है और जैसलमेर के लिए एक भी नहीं। स्वर्णनगरी पर्यटन के लिहाज से राज्य में सबसे अहम शहर है। यहां सालाना लाखों सैलानी आते हैं। यहां रोजाना 4-5 फ्लाइट भी चलती है, इन सबके बावजूद त्योहारी सीजन में यहां कभी भी स्पेशल रेल सेवा शुरू नहीं की गई।

हावड़ा को बाड़मेर शिफ्ट किया

काफी साल पहले जब बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रेल मंत्री थी तब जैसलमेर को सीधे कलकता से जोड़ दिया गया था। गौरतलब है कि जैसलमेर में हर साल बड़ी तादाद में बंगाल के सैलानी आते हैं। इसी वजह से यह ट्रेन शुरू की गई थी। लेकिन पहली लहर में जब सभी ट्रेन बंद हुई तब यह भी बंद हुई थी लेकिन इसे वापस शुरू नहीं किया। दूसरी लहर के बाद ट्रेनों को जब चालू किया गया तो हावड़ा एक्सप्रेस को जैसलमेर की जगह बाड़मेर शिफ्ट कर दिया।

रूणिचा एक्सप्रेस भी बंद
जैसलमेर से दिल्ली के बीच इंटरसिटी एक्सप्रेस चला करती थी। कुछ साल पहले इस ट्रेन का नाम बदलकर रूणिचा एक्सप्रेस कर दिया। एक मात्र ट्रेन थी जिसका नाम जैसलमेर के रामदेव बाबा की नगरी पर रखा गया। हाल ही में इस ट्रेन को भी बंद कर दिया। दिल्ली से आगे जम्मू तक ट्रेन को बढ़ा दिया और अब जम्मू तवी एक्सप्रेस सप्ताह में चार दिन चलती है। जबकि रूणिचा एक्सप्रेस जैसलमेर के लिए सबसे बेहतर कनेक्टिविटी थी।

जैसलमेर में बांद्रा को सप्ताह में दो दिन, हावड़ा को पुन: चालू करने तथा वाशिंग लाइन शुरू करने के प्रस्ताव हमने भिजवाए थे। एक भी ट्रेन का प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया है। इस संबंध में हम रेल मंत्री से मुलाकात करेंगे।-कमल ओझा, सदस्य, रेलवे परामर्शदात्री समिति।

जैसलमेर जिला एनर्जी हब बन चुका है, यहां लाखों सैलानी सालाना आते हैं, सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लेकिन केन्द्र सरकार जैसलमेर की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। नई ट्रेनों के प्रस्ताव में जैसलमेर को शामिल नहीं करना दुर्भाग्य है। इस जिले के दो सांसद केन्द्र में मंत्री है, बावजूद इसके जैसलमेर को कुछ नहीं मिला है।-साले मोहम्मद, केबिनेट मंत्री, राजस्थान सरकार।

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