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मिड डे मील:स्कूलों में पोषाहार पका रही जिले की दो हजार महिलाओं को नौ माह से नहीं मिला मानदेय

जैसलमेर2 महीने पहले
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  • लॉकडाउन के बाद एक बार भी भुगतान नहीं मिला, इस साल स्कूल नहीं खुलने से रोजी-रोटी पर संकट
  • वेतन पहले से कम और पिछले 9 महीने से मिला ही नहीं, 50 बच्चों पर एक महिला पकाती है पोषाहार

(दीपक शर्मा) जैसलमेर की स्कूलों में मिड डे मील की सरकारी योजना में कार्यरत कुक कम हैल्पर को पिछले 9 माह से वेतन नहीं दिया गया है। स्कूली बच्चों को भरपेट खाना खिलाने वालों के घर में आर्थिक किल्लत की वजह से चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। लॉकडाउन लगने के साथ ही सरकार द्वारा स्कूलों का अवकाश घोषित कर दिया गया।

मार्च के अंतिम सप्ताह से बंद हुई स्कूलों के ताले बच्चों के लिए अभी तक नहीं खुले है। जिससे कुक कम हैल्पर को वेतन भी नहीं दिया गया है। सरकार द्वारा हर महीने इन कुक कम हैल्पर को बहुत ही कम राशि मानदेय के रूप में दी जाती थी। इससे इन महिलाओं का घर चलता था लेकिन पिछले 9 महीने से सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है और ना ही इन महिलाओं के लिए मानदेय का बजट दिया गया। इससे जैसलमेर में कार्यरत करीब 2 हजार महिलाओं के परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहे है। कोरोना काल में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों तक अनाज पहुंचाया गया है। लेकिन स्कूल में पोषाहार पकाने वाली महिलाओं की तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया है।

1280 स्कूलों में पकता है पोषाहार
जैसलमेर के 1280 सरकारी स्कूलों में सप्ताह में तय मेन्यू के आधार पर तय पोषाहार पकाया जाता है। जैसलमेर की 722 प्राथमिक, 267 उच्च प्राथमिक, 18 संस्कृत, 183 मावि व उमावि, 87 पंजीकृत मदरसे तथा 3 मॉडल स्कूलों में पोषाहार पकाया जाता है। जैसलमेर की 1280 स्कूलों में 2020 कुक कम हैल्पर कार्यरत है।

मार्च तक का वेतन दिया, अप्रैल से अटका
सरकारी स्कूलों में पोषाहार पकाने वाली महिलाओं को मार्च महीने तक का वेतन दिया गया है। इसके बाद लॉकडाउन लगने व स्कूलें नहीं खुलने के कारण अल्प वेतनभोगी कुक कम हैल्पर को मानदेय नहीं दिया गया है। जिससे ऐसे करीब 2 हजार परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है।

स्कूलों में बच्चों को पोषाहार पकाकर देनी वाली महिलाओं के घर पर इन दिनों आर्थिक तंगी के चलते चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है। स्कूलों में कुक कम हैल्पर के रूप में कार्यरत महिलाओं को सरकार द्वारा पहले से कम मानदेय ही दिया जा रहा था। स्कूल में पोषाहार बनाने के लिए महिलाओं को महीने के मात्र 1320 रुपए का ही भुगतान किया जाता था और अब पिछले 9 महीने से यह राशि भी नहीं दी गई है।सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में मिड डे मील की योजना के तहत 50 बच्चों पर एक महिला को कुक कम हैल्पर के पद पर लगाया जाता है। जिन्हें मासिक रूप से 1320 रुपए का भुगतान होता है। 50 से ज्यादा नामांकन होने की स्थिति में 2 व 100 से ज्यादा नामांकन होने पर तीन कुक कम हैल्पर को लगाया जाता है। इन महिलाओं का काम बच्चों के लिए सुबह दूध गर्म करने के बाद पोषाहार पकाना होता है।

पिछले 10 महीने से तनख्वाह नहीं मिली है। इससे घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से खराब हो गई है। पहले से ही तनख्वाह कम है उसके बाद कोरोना के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा रहे है, तो पोषाहार भी नहीं पक रहा है। सरकार द्वारा बच्चों को सूखा अनाज पहुंचाया जा रहा है तो हमारी तरफ भी ध्यान देकर हमें भी वेतन देना चाहिए। इससे हमें व हमारे परिवार को संबल मिल सके। बिना पैसे से घर का गुजारा तक मुश्किल हो गया है। केंकू देवी, कुक कम हैल्पर

पोषाहार पकाने वाली कुक कम हैल्पर महिलाओं के मानदेय के संबंध में कोई भी दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए है। इन्हें मार्च तक का वेतन दे दिया गया है। उसके बाद स्कूल नहीं खुले है तो वेतन भी नहीं दिया गया है। हालांकि स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को सूखा अनाज भिजवाया जा रहा है। आगामी आदेश तक उन्हें सूखा अनाज ही पहुंचाया जाएगा। कुक कम हैल्पर के लिए अगर हमें बजट दिया जाता है तो उस बजट को स्कूलों को दे दिया जाएगा।
दलपतसिंह, प्रारंभिक जिला शिक्षा अधिकारी

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