कश्मीर सेब से महंगी हुई रेगिस्तान की ग्वारफली:120 रुपए पहुंचे भाव, बाकी सब्जियां भी होने लगी महंगी; लोग परेशान

जैसलमेर8 महीने पहले
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रसोई का बजट बिगाड़ रही सब्जिया - Dainik Bhaskar
रसोई का बजट बिगाड़ रही सब्जिया

सब्जियों की कीमतें पिछले एक महीने में दोगुनी बढ़ चुकी है। जिसके चलते लोगों की थाली से हरी सब्जियों गायब होती जा रही है। वैसे तो हर साल बारिश में हरी सब्जियां महंगी होती है लेकिन इस बार टमाटर और प्याज की कीमतें बढ़ने से लोगों की चिंता और भी बढ़ गई है। हालत तो ये है कि रेगिस्तान का मुख्य भोजन ग्वारफली भी अब कश्मीरी सेब से मंहगी हो गई है। कोरोना काल के बाद लोगों की आमदनी जहां घटी है वहीं रोजगार में भी कमी आई है। ऐसे में सब्जियों की कीमते बढ़ने से रसोई का जायका तो बिगड़ा ही है वही पब्लिक को परेशान करके रख दिया है। लॉकडाउन के बाद बेरोजगारी और कड़की की मार झेल रहे लोगों के लिए सब्जियों के आसमान छूते भाव कोढ़ में खुजली का काम कर रहे है।

सब्जियाँ खरीदना हुआ मंहगा
सब्जियाँ खरीदना हुआ मंहगा

सेब से मंहगी ग्वारफली

जैसलमेर में इन दिनों जमीन पर उगने बली सब्जियों के भाव आसमान को पहुंच गए है। वैसे तो बारिश के बाद सब्जिया मंहगी होती ही थी मगर इस बार पेट्रोल डीजल के भाव व यातायात आदि कई कारणों का भी हवाला देकर सब्जिया मंहगी हो गई है। हालात ये हो गए कि जैसलमेर में उगने वाली देशी सब्जी ग्वारफली कश्मीर के सेब से भी मंहगी हो गई है। ग्वारफली के भाव 120 रुपए किलो पहुंचने से लोग हैरान है जबकि सेब 80 से 100 रुपए किलो मिल रही है। ग्वारफली लोगों के घर घर मिलती थी लेकिन अब रेगिस्तान कि सब्जी भी लोगों कि थाली से गायब होने लगी है। हालांकि भाव बढ़ने की स्पष्ट कोई वजह भी नजर नहीं आ रही है। सब्जी बेचने वालों का कहना है कि आगे से कम व तेज भाव आने से ही यहां भी सब्जियों के दामों में उतार-चढ़ाव हो रहा है। इससे घरेलू बजट भी बिगड़ता जा रहा है। एक महीने में सब्जियों के भाव में करीब दो से तीन गुना तक बढ़ोतरी हो गई है।

प्याज टमाटर सब मंहगे

सबसे ज्यादा खाये जानी वाली सब्जियों में प्याज और टमाटर सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं। मंहगाई का असर सबसे ज्यादा इन पर ही देखने को मिल रहा है। 1 महिना पहले प्याज 20 रुपए किलो मिल रहे थे वही प्याज अब दोगुने भाव 40 रुपए प्रति किलो के हिसाब से मिल रहे हैं। वहीं टमाटर के भाव भी 30 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए कर दिये गए हैं। इतने मंहगे दामो में सब्जियों के मिलने से घर चलाने वाली गृहणीया ज्यादा परेशान है।

अंजना शर्मा का कहना है कि तेल घी सब मंहगे होते गए अब सब्जियाँ भी आउट ऑफ बजट जा रही है। खाना नहीं खाएँगे तो क्या करेंगे। देशी सब्जियाँ भी इतनी मंहगी कभी नहीं थी। बार्गेनिंग तो हम महिलाए भूल ही गई है। सामान्य परिवार में जहां एक महीने की सब्जी का खर्चा 1200- 1500 रुपए तक आता था, वहीं अब 2500 रुपए के करीब जा पहुंचा है। जिससे घर की रसोई का बजट एकदम से गड़बड़ा गया है।

वहीं सब्जी बेचने वाले फोटिया का कहना है कि पहले हर बार जून-जुलाई में सब्जियों के भाव बढ़ते थे और अक्टूम्बर-नवम्बर में तो सब्जियां काफी सस्ती हो जाती थी। लेकिन इस बार अक्टूम्बर में सब्जियों के भाव बढ़ना समझ से परे है। केवल जैसलमेर में ही नहीं, सभी जगह सब्जी महंगी हैं इसका कारण समझ से परे है। जो सब्जियां इन महीनों में 20-30 रुपये किलों मिलती थी उनके आज भाव 80-100 रूपये है।

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