स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से अधर में:दूसरे जिलों में वर्क ऑर्डर जारी हो गए, जैसलमेर में मेडिकल कॉलेज के भवन के टेंडर में हो रही देरी

जैसलमेरएक महीने पहले
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चिकित्सा के क्षेत्र में पिछड़े सरहदी जिले में मुख्यमंत्री बजट घोषणा में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई। जैसलमेर के लिहाज से मेडिकल कॉलेज बहुत बड़ी घोषणा थी। जिससे एकबारगी चिकित्सा व्यवस्था से प्रताड़ित लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। इसके बाद लगा अब जैसलमेर के दिन बदल जाएंगे। लेकिन चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण मेडिकल कॉलेज की फाइल किस स्तर तक पहुंची है

। इसकी किसी को जानकारी तक नहीं है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने करीब दो साल पहले विधानसभा सत्र के दौरान जैसलमेर सहित 6 जिलों में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की थी। इस घोषणा के साथ ही जैसलमेर में चर्चा तेज हो गई कि मेडिकल कॉलेज कब तक खुलेगा और इससे क्या लाभ होगा।

आमतौर पर यहां लोगों को छोटी-मोटी बीमारी में रेफर कर दिया जाता है। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि यहां साल में इक्का-दुक्का ऑपरेशन ही होते हैं। यहां गंभीर घायलों के लिए तो कोई सुविधा नहीं है। कई बार रेफर किए जाने के दौरान घायल दम तोड़ देते हैं। मेडिकल कॉलेज से इन समस्याओं से छुटकारा मिलने की संभावना थी। लेकिन मेडिकल कॉलेज का काम किस स्तर पर पेंडिंग चल रहा है। इसकी जानकारी पीएमओ तक को नहीं है। जबकि जिले में मेडिकल कॉलेज की पूरी फाइल इस स्तर से ही तैयार हुई है।

जैसलमेर के जवाहर अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को यह तक नहीं पता कि फाइल किस स्तर पर पेंडिंग है। इसके अलावा आगे क्या-क्या प्रोसेस है। पीएमओ के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है। अधिकारी की इससे बड़ी उदासीनता और क्या हो सकता है कि चिकित्सा के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी घोषणा को लेकर ना तो उन्हें जानकारी है और ना ही वे इसका प्रयास कर रहे है।

जैसलमेर में पहले अमर शहीद सागरमल गोपा आवासीय कॉलोनी के पास मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन आवंटित हुई थी। लेकिन उसमें कॉलेज व रेजीडेंस के लिए अलग अलग जगह भवन बनने के साथ ही हाइटेंशन लाइन को लेकर जगह बदलवाई गई। जिसके बाद 55 बीघा को बढ़ाकर 150 बीघा जमीन में बदलने के साथ जगह में भी बदलाव किया गया। लेकिन इसके बाद मेडिकल कॉलेज की फाइल ठंडे बस्ते में चली गई है। आज तक जैसलमेर के चिकित्सालय में सारे पद नहीं भरे गए।

जैसलमेर में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से फेल है। जिसके बाद करीब दो साल पहले मुख्यमंत्री द्वारा अन्य जिलों के साथ जैसलमेर में भी मेडिकल कॉलेज की घोषणा की गई। जिससे आमजन में चिकित्सा व्यवस्था सुधरने की उम्मीद जग गई। लेकिन ना तो अब तक मेडिकल कॉलेज का काम शुरू हुआ और ना ही चिकित्सा व्यवस्थाएं सुधरी। जैसलमेर के जवाहर अस्पताल में पिछले लंबे समय से व्यवस्थाएं बेपटरी है। जिला मुख्यालय पर जब चिकित्सा सुविधाओं की कमी है तो ग्रामीण क्षेत्रों में क्या हाल होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

ग्रामीणों को पहले जिला मुख्यालय और बाद में यहां से रेफर होना पड़ता है। यहां गंभीर बीमारियों से ग्रसित सभी मरीजों का इलाज जोधपुर, अहमदाबाद व जयपुर में चलता है। जैसलमेर में मेडिकल कॉलेज खुलने की स्थिति में यहां पर चिकित्सा संबंधी सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।

पहले गत 23 नवंबर को मेडिकल कॉलेज के लिए टेंडर प्रक्रिया होनी थी। इसके बाद उसे स्थगित करते हुए 6 दिसंबर को टेंडर खाेले जाने थे। गत 23 नवंबर को बाकी जिलों में टेंडर भी हो गए। इसके बाद संबंधित फर्म को वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिए गए है। लेकिन जैसलमेर के अधिकारियों की उदासीनता मेडिकल कॉलेज पर भारी पड़ रही है।

^जैसलमेर के मेडिकल कॉलेज की फाइल किस स्तर पर पेंडिंग है। मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैने हाल ही में पीएमओ के पद पर कार्यग्रहण किया है। इसके साथ ही एक इंजीनियर नियुक्त किया गया है। वह ही सारा मामला देख रहा है।। मैने उससे फाइल की डिटेल मांगी है। वह जल्द ही इसकी पूरी जानकारी मुझे उपलब्ध करवाएंगा। दूसरे जिलों की तुलना में हमारा काम अच्छा है। -डॉ. वी. के. वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी।

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