ओलिंपिक में मेडल के सपने ने बना दी शूटिंग रेंज:निशानेबाजी जैसे महंगे शौक को जुनून में बदला, दोस्त की 80 बीघा जमीन पर तैयार कर दी पश्चिमी राजस्थान की पहली शूटिंग रेंज

जैसलमेर3 महीने पहलेलेखक: सिकंदर शेख

जैसलमेर के केसरी सिंह भाटी ने निशानेबाजी में कई मेडल जीते, लेकिन उनका सपना देश को ओलिंपिक में गोल्ड मेडल दिलाना है। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने लाखों रुपए खर्च कर पश्चिमी राजस्थान में पहली शूटिंग रेंज ही स्थापित कर दी। यह शूटिंग रेंज जैसलमेर से 14 किमी दूर डाबला गांव में 80 बीघा में फैली हुई है। कई सालों की मेहनत के बाद आज इस शूटिंग रेंज में आज 30 मेंबर हैं। ये सभी निशानेबाजी सीख रहे हैं। केसरी सिंह का मानना है कि शूटिंग जैसे महंगे शौक के प्रति लोगों की अब रुचि पैदा हो रही है।

निशाना लगाते केसरी सिंह भाटी।
निशाना लगाते केसरी सिंह भाटी।

केसरी सिंह ने शूटिंग में जीते कई मेडल
40 साल के केसरी सिंह खुद कमाल के शूटर हैं। वे बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही निशानेबाजी का शौक था। साल 2010 से शूटिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। राजस्थान ओपन स्टेट कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया। देश भर के 450 निशानेबाजों को पीछे करते हुए केसरी सिंह ने चौथी पोजीशन हासिल की। उन्होंने प्री नेशनल कॉम्पिटिशन में भी हिस्सा लेकर चौथा स्थान हासिल किया था। इसके बाद से वे लगातार कई प्रतियोगिताओं में जाते रहे और निशानेबाजी में हाथ आजमाते रहे। इस दौरान केसरी सिंह ने स्टेट लेवल के 4 मेडल अपने नाम किए, जिसमें 2 सिल्वर और 2 कांस्य पदक हैं।

जैसलमेर की पहली शूटिंग रेंज में स्थापित निशानेबाजी का टारगेट।
जैसलमेर की पहली शूटिंग रेंज में स्थापित निशानेबाजी का टारगेट।

2012 में देखा था शूटिंग रेंज का सपना
केसरी सिंह बताते हैं कि निशानेबाजी को और ज्यादा मजबूत करने के लिए प्रैक्टिस की जरूरत रहती है। बिना शूटिंग रेंज के यह संभव नहीं था। शूटिंग रेंज नहीं मिलने से कई शूटर्स को अपनी प्रतिभा निखारने का प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता। साल 2012 में मैंने शूटिंग रेंज स्थापित करने का सपना देखा, जो अब जाकर साकार हुआ है।

शूटिंग के प्रति जुनून को देखते हुए दोस्त महेंद्र सिंह ने डाबला गांव में स्थित अपने फार्म हाउस के नजदीक 80 बीघा जमीन पर फायरिंग रेंज बनाने का ऑफर दिया। लंबी सरकारी प्रक्रिया से गुजरने के बाद हम पश्चिमी राजस्थान की पहली फायरिंग रेंज लगाने में कामयाब हुए।

टारगेट पर निशाना लगाते निशानेबाज।
टारगेट पर निशाना लगाते निशानेबाज।

बच्चों को दी जा रही ओलिंपिक स्कीट की ट्रेनिंग
केसरी सिंह बताते हैं कि JSM शूटिंग रेंज राजस्थान राइफल एसोसिएशन से एफिलिएटेड है। शूटिंग रेंज में फिलहाल 30 लाइफ टाइम मेंबर स्टूडेंट हैं। इन बच्चों को ओलिंपिक स्कीट की ट्रेनिंग के लिए सुविधाएं और टारगेट बना रखे हैं। जिसमें 15 मीटर राइफल, 25 मीटर पिस्टल और 10 मीटर राइफल पिस्टल सिखाई जा रही है। ट्रेनिंग के लिए फिलहाल 4 गन उपलब्ध हैं। जिसमें 2 राइफल, 12 बोर और पिस्टल शामिल है। एक गन करीब 2 लाख से लेकर 5 लाख रुपए तक आती है। हमारे पास 4 गन इम्पोर्टेड हैं।

एक स्टूडेंट से साल के 40 हजार रुपए बतौर ट्रेनिंग फीस ली जाती है। इसमें उनको गन और करीब 25 राउंड के करीब टारगेट हिट करने को मिलते हैं। ट्रेनिंग ले रहे 9 स्टूडेंट स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ शूटिंग सीख रहे हैं। केसरी सिंह ने बताया कि जल्द ही शूटिंग के नामी कोच शिराज शेख जॉइन करने वाले हैं। शिराज शेख अंतरराष्ट्रीय मेडलिस्ट हैं। भारत की तरफ से ISSF वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स में खेलते हैं।

भारत को ओलिंपिक में गोल्ड दिलाने का सपना
केसरी सिंह कहते हैं कि आज भारत के निशानेबाज कई नेशनल-इंटरनेशनल शूटिंग कॉम्पिटिशन में नाम कमा रहे हैं। अगर इस टैलेंट को सही दिशा और ट्रेनिंग मिले तो हम ओलिंपिक में शूटिंग के हर फॉर्मेट में गोल्ड ला सकते हैं। जैसलमेर जैसे सरहदी इलाके में भी टैलेंट को बाहर लाने के लिए हम प्रयासरत हैं।

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