मांग / 37 साल से ओरण भूमि पर 600 परिवारों का आवास व दो स्कूल

Housing 37 families and two schools on Oran land for 37 years
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Housing 37 families and two schools on Oran land for 37 years

  • सरपंच ने आबादी क्षेत्र में शामिल करने की राजस्व मंत्री से मांग की

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 06:54 AM IST

जसोल. ग्राम पंचायत जसोल सरपंच ईश्वर सिंह चौहान ने राजस्व मंत्री हरीश चौधरी से मुलाकात कर जसोल के अमरपुरा व भील बस्ती क्षेत्र को आबादी क्षेत्र में शामिल करने की मांग की। सरपंच ईश्वर सिंह चौहान ने बताया कि बाढ़ व वक्त के लम्हे के साथ ही बढ़ती आबादी के लिए गांव में जमीन नहीं बची तो लोगों ने धीरे-धीरे ओरण-गोचर भूमि में रहना शुरू कर दिया। अच्छे रोजगार व कमाई के साथ ही यहां बने कच्चे झोंपे अब पक्की इमारतों में तब्दील हो गए।

करीब 37 वर्षों से जसोल गांव की ओरण भूमि में रहने वाले 600 परिवारों में से कइयों को बीपीएल का लाभ जरूर मिल रहा है, लेकिन अपने भूखंडों के पट्टे नहीं बनने का मलाल आज भी है। वस्तुस्थिति को देखते ग्राम पंचायत ने भी प्रस्ताव लेकर ओरण भूमि को आबादी में रूपांतरित करने का प्रस्ताव भिजवाया, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई प्रत्युत्तर नहीं मिलने से मामला अटका हुआ है।

ऐसे में ग्रामीण पट्टे के लिए आवेदन नहीं कर सकते और इसके अभाव में प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ, ऋण इत्यादि सुविधाओं से वंचित हैं। अमरपुरा व भील बस्ती क्षेत्र को आबादी क्षेत्र में शामिल करने हेतु सभी मापदण्ड पूरे कर दिए गए हैं।
 जसोल के वार्ड-1 व 2 की पूरी बसावट इसी ओरण भूमि पर 
ग्राम पंचायत जसोल का अधिकांश क्षेत्र नगर परिषद बालोतरा का परिधीय ग्राम (पैराफैरी बेल्ट) है। आबादी भूमि के रूपांतरण के लिए नगर परिषद से अनापति प्रमाण-पत्र सहित क्षतिपूर्ति भूमि के खसरा नम्बर अंकित कर प्रस्ताव भिजवाया गया है। ऐेसे में नियमानुसार ग्राम पंचायत की ओर से हर मापदण्ड पूरे कर लिए हैं, अब महज राज्य सरकार की स्वीकृति का इंतजार है।

जसोल के वार्ड-1 व 2 की पूरी बसावट ओरण भूमि पर है, वहीं वार्ड-3 का आधा हिस्सा ओरण व आधा आबादी में अवस्थित है। वहीं ओरण भूमि में दो सरकारी विद्यालय, सार्वजनिक टांका, डिस्कॉम कार्यालय, पशु चिकित्सालय भी बने हुए हैं। वार्ड 1, 2 व 3 ओरण भूमि में होने से यहां से निर्वाचित वार्डपंच से रहवासी सड़क, पानी, बिजली इत्यादि मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग कर रहे हैं, ऐसे में लम्बे समय से यह क्षेत्र विकास से भी अछूता है।

वर्तमान में करीब 200 बीघा ओरण भूमि पर लोगों का रहवास है। दशकों से ग्रामीण ओरण की भूमि में रह रहे हैं, इसमें 301 बीघा भूमि को आबादी में रूपांतरित करवाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भिजवाया गया है। इसकी क्षतिपूर्ति में अन्य सरकारी भूमि ओरण के नाम दर्ज करवाने की भी सूची भेजी गई है।

चौहान ने कहा कि ओरण में बसे सैकड़ों परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। मूलभूत सुविधा के अभाव में हर दिन परेशानी झेलनी पड़ रही है। जनप्रतिनिधियों से भी समस्या के समाधान के लिए गुहार लगाई गई है, शीघ्र आबादी भूमि में रूपातंरित करें।

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