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दुर्दशा:बाढ़ के 14 साल बाद भी नहीं बढ़ी सुविधाएं सर्विस सड़कों की मरम्मत हुई न रैम्प बना

कवासएक महीने पहले
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  • हाइवे से रैम्प उतारने की ग्रामीणों की मांग पर केंद्रीय राज्यमंत्री चौधरी ने दिया आश्वासन

21 अगस्त 2006 के मध्य रात्रि कवास में आई भयंकर बाढ़ को 14 वर्ष हो गए। लेकिन गांव में सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं मिल रही है। इसको लेकर आज भी दर्जनों गांवों के साथ स्थानीय लोग परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ ने जख्म नहीं दिए उससे ज्यादा कवास को दो भागों में बांटने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 25 और रेलवे स्टेशन आदि पर सुविधाओं के अभाव में हजारों लोग परेशान है। बांदरा, नागाणा, जोगासर, मूढों की ढाणी आदि क्षेत्र के लोगों को कस्बे में अपने कामकाज के साथ हाइवे पुलिया से उस पर लोगों के खेतों में जाने के लिए 2 किलोमीटर का चक्कर निकलना पड़ता है।

रेलवे स्टेशन बाढ़ के बाद में गांव के उस पार ऊपर की साइड में बनाया गया है। 2006 आई बाढ़ से गांव में करीब 30-40 फिट ऊंचाई में पानी आया। गांव में सड़क मार्ग व रेलवे स्टेशन को ऊंचाई में बनाने से गांव के लोग अभी भी परेशान है। ग्रामीणों की 14 साल बाद भी यही मांग है कि रेलवे स्टेशन इसी जगह होता तो अब आम आदमी को यात्रा के लिए रेलवे टिकट लेने के लिए सुविधा होती। अब रेल लाइन को पार करके 25 फिट ऊंचाई तक जाना पड़ता है। हाल ही में विभाग द्वारा उत्तरलाई, बायतु, बालोतरा आदि के साथ कई रेलवे स्टेशन पर नवीनीकरण किया गया। लेकिन कवास में सुविधाओं को लेकर 14 साल बाद भी इंतजार है।

वहीं नागाणा एमपीटी में तेल कंपनियों के यहां आने से कस्बे में हजारों बाहरी राज्यों के लोग किराए पर निवास कर रहे है। लेकिन सुविधाओं के अभाव काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसको लेकर ग्रामीणों ने सांसद व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने जल्द ही रैम्प की स्वीकृति प्रदान करने का आश्वासन दिया है। कवास के आसपास लगने वाले दर्जनों गांव बांदरा, नागाणा, जोगासर, चौखला, सर का पार बांदरा, सांसियों की बस्ती आदि के साथ दर्जनों गांवों के लिए एक मात्र कवास स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। लेकिन गांव के दो भागों में बांटने वाला हाइवे पुलिया से मरीजों को इलाज के लिए 2 किलोमीटर का चक्कर निकालना पड़ता है।

14 साल से हाइवे से कवास गांव में रैम्प की मांग, अब तक नहीं हुई पूरी
नेशनल हाइवे बनाने पर हाइवे मार्ग के दोनों ओर वैकल्पिक मार्ग के लिए सड़क का निर्माण किया गया था। जो हाल में पीडब्ल्यूडी, नेशनल हाइवे विभाग के कागजों में नहीं होने से पिछले 10 सालों से क्षतिग्रस्त पड़ा है। जिससे कस्बे में आवागमन के लिए ग्रामीणों के साथ वाहन चालक परेशान होना पड़ रहा है।

आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों के लिए कस्बे में सरकारी विभाग बैंक, चिकित्सालय, विद्यालय, रेल सुविधा आदि के साथ व्यापारियों तक जाने के लिए एमपीटी जाने वाले सड़क मार्ग के सामने जीरो पॉइंट पर रैम्प की मांग की जा रही है। लेकिन पिछले 14 से दो सरकार आई व गई लेकिन आज तक रैम्प की सुविधा नहीं हुई। रैम्प की मांग को लेकर ग्राम पंचायत में प्रस्ताव लिया गया। जिसमे सरपंच व वार्डपंच द्वारा प्रस्ताव संख्या 6 में प्रशासन व सरकार से नेशनल हाइवे से गांव में रैम्प बनाने के लिए उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भिजवाने की मांग की गई है।

रैम्प के लिए प्रस्ताव लिया गया, लेकिन अफसरों ने स्वीकृति जारी नहीं की

  • कवास गांव में हाइवे से रैम्प बनाने को लेकर पंचायत से प्रस्ताव लिया गया। जिसको लेकर प्रशासन, राज्य व केन्द्र सरकार के साथ जनप्रतिनिधियों से मांग की गई। जल्द ही उच्च अधिकारियों को रैम्प बनाने की स्वीकृति दिलाई जाए। - विजय परिहार, वार्डपंच, कवास
  • ग्राम पंचायत द्वारा प्रस्ताव लिया गया है। जिसमें हाइवे से कस्बे में रैम्प बनाने के लिए प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से मांग की गई है। रैम्प उतारने से दर्जनों गांवों के लिए आवागमन में सुविधा हो जाएगी। - गुड्डी माली, सरपंच, कवास
  • मेरे पास कवास में हाइवे से रैम्प उतारने को लेकर सरपंच व ग्रामीण प्रस्ताव लेकर आये थे। जल्द ही कार्रवाई कर विभाग से स्वीकृति लेकर कार्य शुरू किया जाएगा। - कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री
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