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बाड़मेर के 10 मुमुक्षु लेंगे दीक्षा:10 मुमुक्षु पहली बार एक साथ पालीतणा में लेंगे दीक्षा, इसमें दो सगे भाई-बहिन और दो बहिनें

धनाऊ8 महीने पहलेलेखक: संजय जैन
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मुमुक्षु सोना मालू - Dainik Bhaskar
मुमुक्षु सोना मालू
  • मई में पालीतणा में होगी 21 दीक्षाएं

भौतिक सुविधाओं का त्याग कर संयम पथ को अंगीकार करना आज के युग में सबसे बड़ा और प्रेरणादायी फैसला है। वर्तमान में मोबाइल के मायावी जाल में फंसे युवा हरदम उसी में उलझे नजर आ रहे हैं। ऐसे माहौल में से बाड़मेर के दस युवा भौतिक संसार को त्याग कर संयम पथ को अग्रसर हो रहे हैं। इस मार्ग पर दो जोड़ी कपड़ा, पैदल विहार और एक ही लक्ष्य कि भगवान महावीर की वाणी को जन जन तक पहुंचाते हुए स्वयं के जीवन विचरण से मुक्त करना।

मोक्ष को ही लक्ष्य बनाकर 5 मई को बाड़मेर जिले से 1 व 6 मई को 9 लोग गुजरात के पालीतणा तीर्थ पर आचार्य मणिप्रभ सुरिश्वर की निश्रा में संयम जीवन अंगीकार करते हुए अपने नए जीवन की शुरुआत करेंगे। संयम पथ की ओर अग्रसर होने वाले मुमुक्षुओं ने भास्कर के साथ इसकी ओर प्रेरित होने के कारणों को साझा किया।

मुमुक्षु विनिता व भावना सगी बहिनें, महावीर और मुस्कान सगे भाई-बहिन, रवीना की दादी व छोटी बहिन पहले से ही संयम पथ पर

मुमुक्षु महावीर बोहरा
भूणिया निवासी महावीर पढ़ाई के दौरान आचार्य के सम्पर्क में आए। उनके प्रवचन से प्रभावित होकर उन्होंने माता उषा देवी एवं पिता रमेश कुमार से गुरुदेव के साथ रहने की इजाजत मांगी। कुछ वर्ष तक आचार्य के साथ शिक्षा के बाद संयम जीवन अंगीकार करने का निर्णय लिया। बोहरा बीए प्रथम वर्ष में अध्ययनरत है।

मुमुक्षु मुस्कान बोहरा
भाई महावीर के गुरुदेव के साथ रहने के बाद परिवार का जुड़ाव धर्म के साथ बढ़ा। अपने भाई महावीर से प्रभावित होकर साध्वी डाॅ. विद्युत प्रभा के साथ रहने लगी। परिजनों ने इनकी जिद को देखते हुए दोनों को संयम जीवन की आज्ञा प्रदान की। 19 वर्ष की आयु में पालीतणा में दीक्षा लेकर नए नाम एवं नए जीवन की शुरुआत करेंगी।

मुमुक्षु सोना मालू
कगाऊ गांव निवासी 24 वर्षीय सोना मालू को 2016 में बाड़मेर में साध्वी शशिप्रभा के प्रवचनों ने इतना प्रभावित किया कि चातुर्मास के चार महीनों बाद उन्होंने साध्वीवर्या के साथ विहार करना प्रारम्भ किया। बी काॅम तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद अब माता एवं पिता की आज्ञा के साथ संयम जीवन की राह अपना रही है।

मुमुक्षु भावना संखलेचा
साध्वी प्रिय स्नेहजना के प्रवचनों ने 28 वर्षीय भावना एवं उनकी छोटी बहन विनिता संखलेचा को प्रभावित किया। कई वर्षों तक अपने गुरुजनों के साथ रहने के बाद आखिरकार दीक्षा लेने का भाव अपने पिता सम्पतराज संखलेचा एवं माता शांति देवी संखलेचा को बताया। भावना नगर परिषद में वार्ड संख्या 8 से पार्षद भी रही है।

मुमुक्षु विनिता संखलेचा
अपनी बहन में आए बदलाव से प्रेरित होकर गुरुजनों के सानिध्य में जाना प्रारम्भ किया। बीएससी की पढाई पूरी करने के साथ ही अपनी बहन के साथ ही संयम जीवन की मांग अपने परिजनों से की। करीब दो वर्ष तक विभिन्न तप आराधना करने के बाद संसार के सुखों को त्याग करते हुए संयम की पथ पर जाने का निर्णय लिया।

मुमुक्षु रजत सेठिया
दसवीं की पढ़ाई के बाद से ही चौहटन निवासी रजत ने संसार के सुख को क्षणिक मानते हुए स्थाई सुख को अपनाने का फैसला कर लिया। पिता रमेश कुमार सेठिया एवं माता मीना देवी के लाडले ने शिक्षा के साथ ही भगवान महावीर के विचारों को पढ़ा। गुरु के साथ 5 साल गुजारने के बाद शेष जीवन उनके सानिध्य में गुजारने का फैसला लिया।

मुमुक्षु शुभम सिंघवी
6 वर्ष पूर्व उपधान तप की आराधना की। वहीं से जीवन में बदलाव आना प्रारम्भ हुआ। गुरुदेव के प्रवचनों ने जीवन की सोच को बदलकर रख दिया। 5 साल गुरुदेव के साथ रहकर शास्त्रों का अध्ययन किया। चौहटन निवासी ओमप्रकाश सिंघवी एवं लीला देवी सिंघवी के पुत्र शुभम ने दीक्षा लेने का संकल्प लिया।

मुमुक्षु रवीना सेठिया
बीए कर चुकी रवीना ने आत्म कल्याण का भाव लिए संयम जीवन पथ को स्वीकार किया। चौहटन निवासी सुरेश सेठिया एवं उषादेवी की पुत्री रवीना भगवान महावीर के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य है। रवीना की दादी भी दीक्षा संयमलता एवं उनकी छोटी बहन रिजु प्रभा संयम जीवन का निर्वहन कर रही है।

मुमुक्षु नर्बदा देवी
​​​​​​​हिंदी में एमए करने के बाद शिक्षिका बनी। 22 वर्षों तक बच्चों को शिक्षा देने का कार्य किया। पति की मौत ने उन्हें संसार को त्यागकर संयम जीवन अपनाने का निर्णय लिया। परिवार की सारी जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब 6 मई को 56 वर्ष की आयु में संयम जीवन अंगीकार करेंगी।

मुमुक्षु कपिल बोथरा
​​​​​​​ 5 साल तक लगातार संताें के साथ करीब 8 हजार किलोमीटर पैदल यात्रा की। करीब 7 हजार संतों के सानिध्य ने मन में वैराग्य जागृत हुअा। 10वीं तक की पढ़ाई के बाद धर्म शास्त्र की शिक्षा ली। परिवार में 6 भाई और 2 बहनें है। पिता एवं माता नहीं है। भाइयों का संयम जीवन की आज्ञा में समय लिया।

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