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एक साल का काेरोना:135 दिन बाद एक ही दिन में 21 संक्रमित, एक्टिव रोगी 7 दिन में दुगुने; बाड़मेर की 10% आबादी ने लगाए टीके

बाड़मेर12 दिन पहले
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  • आज ही के दिन बाड़मेर के कितनोरिया में मिला था कोरोना का पहला रोगी

कोरोना वायरस की दूसरी लहर तेज हो गई है। जिस तरह से अगस्त-सितंबर कोरोना का पीक समय था, उससे दुगुनी रफ्तार से कोरोना के केस अप्रैल में बढ़ रहे है। बुधवार को 135 दिन बाद रिकार्ड एक साथ 21 केस आए है। 22 दिसंबर 2020 के बाद यह पहली बार है कि इतनी तादाद में एक साथ जिले में संक्रमित केस आए हो। आज 8 अप्रैल है और आज ही के दिन पिछले साल बाड़मेर जिले के कितनोरिया में कोरोना का पहला केस मिला था।

इस बार कोराेना के लक्षण गत साल से कुछ अलग है। बुखार, सिर-दर्द के अलावा, उल्टी-दस्त, पेट दर्द और जोड़ों के दर्द जैसे लक्षण वाले मरीज भी कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं। ऐसे में सतर्कता बरतने की जिम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ जाती है। एक साल में बाड़मेर में कोरोना के रोगियों का आंकड़ा 5687 तक पहुंच चुका है। जिले में एक्टिव मरीजों का आंकड़ा भी 100 के करीब है। बुधवार को जिले में रिकार्ड 1015 सैंपल लिए गए, जिसमें 21 कोरोना रोगी और 994 निगेटिव आए है।

ऐसे में अब तक जिले के कुल कोरोना रोगियों की संख्या 5687 हो गई है। इधर वैक्सीनेशन को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है। 112 दिन में 301868 टीके लगाए है। बुधवार काे जिले में 14084 टीके लगे। जिसमें 12979 ने पहली और 1105 ने दूसरी डाेज लगाई।

112 दिन में टीकाकरण का रिकार्ड: बाड़मेर की 30 लाख आबादी में से 3.01 लाख ने टीके लगवाए
तब: खौफ था, ट्रेवल हिस्ट्री, होम कोरेनटाइन की सख्ती थी

पिछले साल 8 अप्रैल काे बाड़मेर जिले के कितनोरिया स्कूल का प्रिंसिपल कोरोना संक्रमित आया था। उस दौर में कोरोना का खौफ इतना था कि संक्रमित तो चौहटन के कितनोरिया में आया था, लेकिन जिलेभर के लोग सहमे हुए थे। सख्ती इतनी थी कि संक्रमित जयपुर से बाड़मेर पहुंचने के बीच जहां-जहां रुका था उसकी पूरी ट्रेवल हिस्ट्री बनी थी। यहां तक कि गाड़ी का पंचर निकालने वाले की दुकान को सैनेटाइज किया था, उसे होम आइसोलेट में रहना पड़ा। संक्रमित के खिलाफ महामारी एक्ट में मामला दर्ज हुआ था। नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा।

अब: बेखौफ हुए लोग, सख्ती भी उतनी नहीं, संक्रमण बढ़ा
कोरोना के एक साल बाद लोगों को में कोरोना को लेकर उतना डर नहीं है, जितना उस दौर में था। प्रशासन की भी सख्ती कमजोर हुई है। जब पहली बार शहर के गांधी नगर की एक गली में रोगी मिला था, उस इलाके से लोगों ने गुजरना छोड़ दिया। प्रशासन ने भी 500 मीटर में हर गली को सील किया था। ट्रेवल हिस्ट्री निकाल संपर्क में आने वाले लोगों को होम क्वारेंटाइन कर रहे थे, लेकिन अब तक संक्रमित की न ट्रेवल्स हिस्ट्री निकाली जा रही है और न ही उसके संपर्क में आने वाले लोगों की सूची बन रही है।

बड़ा सवाल: जनवरी से केस घटने लगे थे, अब बढ़े क्यो?
अगस्त से दिसंबर तक कोरोना का पीक समय रहा, लेकिन जनवरी में अचानक केस कम हो गए। लोगों को उम्मीद जगी कि अब कोरोना विदाई की ओर है। सरकार ने भी पाबंदियां कम की। सरकार की ढिलाई के साथ ही लोग लापरवाह होते गए। इस बर्ताव ने ही दूसरी लहर में केस बढ़ाए हैं। पहली लहर के समय बच्चे घरों में कैद थे। पिछले साल अनजाना डर सता रहा था। मास्क पहनना, हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग रखना, तीन अहम नियम थे। लोगों को लगा कि ट्रीटमेंट के बाद लोग ठीक हो रहे हैं तो उन्होंने भी महामारी के साथ जीना सीख लिया।

इधर: 3 लाख लोगों ने टीके लगाए, 40 हजार डोज मिले
16 जनवरी से देशभर में वैक्सीनेशन शुरू हुआ था। शुरूआत हेल्थ केयर वर्कर से हुई, इसके बाद 1 फरवरी से फ्रंट लाइन वर्कर को टीके लगाए गए। 1 मार्च से 60 साल और गंभीर बीमारी वालों को टीके लगाने शुरू हुए। अब 45 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी लोगों को टीके लग रहे है। महज 112 दिन में स्वास्थ्य विभाग का यह सफर 200 सेंटरों पर टीके लगाने तक पहुंच गया है। अब तक 3.01 लाख लोगों ने कोरोना की फस्ट डोज लगवा ली है। इसके लिए 35 हजार ऐसे लोग है, जो दूसरी डोज भी लगा चुके है। वैक्सीनेशन अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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