वितरण:20 गांवों के 1066 समिति सदस्यों को 26625 नेपियर घास वितरित

बाड़मेरएक महीने पहले
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सोसायटी टू अपलिफ्ट रूरल इकॉनामी बाड़मेर द्वारा केयर्न वेदांता फाउंडेशन के सौजन्य से संचालित डेयरी विकास एवं पशुपालन परियोजना के तहत गठित 20 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों जाटों का गोलिया ए, जाटों का गोलिया बी, विष्णुगढ, भगवानजी की ढाणी, मूली ढाणी, मूली गांव, देवड़ा, डांगियों की ढाणी, डारनाडी, धरनावास, गोलिया, धरनावास ढाणी, भूतेल, जेलातरा, खंगारजी जाट की ढाणी, शरावगों की ढाणी, जोजारडी नाडी, पमाना इत्यादि गांवों के 1066 सदस्यों को 26625 नेपियर घास के डंठल निशुल्क वितरण किए गए।

कार्यक्रम प्रबंधक हनुमान राम चौधरी ने बताया कि काजरी जोधपुर के डेयरी फार्मिंग पशु संवर्धन केंद्र से गन्ने की प्रजाति उक्त गांवों में दुग्ध उत्पादकों के खेतों मैं लगने से हरे चारे की समस्या का स्थाई समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि बुवाई के समय खेत की जोताई कर डंठल का एक पैरा भूमि में एवं एक बार ऊपर रखा जाता है। एक बार पौधा विकसित होने पर निरंतर सात साल तक हरा चारा देता है एक पौधा वर्ष में चार बार कटाई करने से 1 मण हरा चारा देता है। चौधरी ने कहा कि नेपियर घास समतल भूमि नेट पर भी लगा सकते हैं। उपवास में प्रोटीन विटामिन एवं कार्बोहाइड्रेट की मात्रा प्रचुर मात्रा में होती है। चौधरी ने बताया कि परियोजना क्षेत्र बाड़मेर एवं जालौर जिले के अन्य गांवों के समिति सदस्यों को द्वितीय एवं तृतीय चरण में 4000 सदस्यों को 1 लाख नेपियर घास के डंठल निशुल्क वितरण करने का लक्ष्य है। नेपियर घास से पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के साथ स्वस्थ रहते हैं ।

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