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  • 28 Admitted In Emergency Of 10 Beds Capacity In District Hospital; 3 3 On A Bed, Serious Patients Increasing Continuously For Four Days

चिकित्सा व्यवस्था लड़खड़ाई:जिला अस्पताल में 10 बेड क्षमता की इमरजेंसी में 28 भर्ती; एक बेड पर 3-3, चार दिन से लगातार बढ़ रहे हैं गंभीर रोगी

बाड़मेरएक महीने पहले
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कोरोना की दूसरी लहर जानलेवा होने के साथ बेकाबू होती जा रही है। कोरोना के बढ़ते रोगियों के कारण जिला अस्पताल में अब चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह से लड़खड़ा चुकी है। हाल ये है 10 बेड क्षमता वाली इमरजेंसी में हर घंटे 10 लोग आ रहे हैं। ऐसे हाई फ्लो मास्क से ऑक्सीजन सप्लाई लगे दर्जनों रोगी एक-एक बेड पर 3-3 और फर्श पर भी भर्ती है।

ये कहे कि इमरजेंसी के हाल बहुत बुरे है। यहां 24 घंटे सेवा दे रहे नर्सिंग स्टाफ हर मरीज की जान को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। इमरजेंसी में रोज 65-70 से ज्यादा रोगी भर्ती हो रहे हैं। पिछले 4 दिनों से लगातार बढ़ रहे सीरियस मरीज और अस्पताल के फुल हो जाने से इमरजेंसी के हालात बेहद खराब है।

जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की क्षमता 10 बेड की है। कोरोना के हर सीरियस मरीज की एंट्री इसी इमरजेंसी में होती है। इसलिए आए वार्डों की ज्यादा इमरजेंसी के हालात खराब है। सीरियस मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण जगह नहीं होने के बावजूद भी अस्पताल प्रशासन उन्हें एक बारगी जैसे-तैसे भर्ती कर जान बचाने का प्रयास कर रहा है।

एक-एक बेड पर तीन-तीन लोग भर्ती है। इतना ही इमरजेंसी का हर कोना, फर्श पर मरीज भर्ती है। पाइपलाइन से ऑक्सीजन सप्लाई के 10 प्लग ही है। इसके बावजूद फर्श पर क्षमता से ज्यादा भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर पर सपोर्ट देकर रखा जा रहा है।

ये 10 नर्सिंगकर्मियों की टीम, हर जान को बचाने में जुटी, 24 घंटे दे रहे सेवाएं
इमरजेंसी में 24 घंटे 10 नर्सिंग कर्मी समेत डॉक्टर सेवा दे रहे हैं। इसमें जगदीश सोनी, नरेश सोनी, जितेंद्र अणखिया, दीक्षित जोशी, जेठाराम, चंद्रभान खत्री, मनोज कुमार, हनीफ खां, दिनेश सोनी, सुभाष चंद्र मरीजों की जान बचाने में जुटे हुए है।

10 की क्षमता, 28 रोगी भर्ती रहते हैं
इमरजेंसी की क्षमता भले ही 10 बेड की हो, लेकिन कोविड काल की परिस्थितियों के चलते यहां एक साथ 28 रोगी तक रखे जा रहे हैं। हर बेड पर 2-3 रोगी है तो खाली जगह की फर्श पर भी रोगी लेट रहे है। हाल ये है कि रोगी, डॉक्टर और परिजनों की भीड़ के कारण इमरजेंसी पूरी तरह से भरा रहता है।

बेड खाली होने पर वार्डों में शिफ्ट होते हैं
दरअसल इमरजेंसी में सीरियस मरीजों का तत्काल इलाज तो शुरू कर दिया जाता है, लेकिन इसके बाद उसे भर्ती करने के लिए वार्डों में बेड खाली नहीं होने से घंटों तक इमरजेंसी में रखना पड़ रहा है। जैसे ही वार्ड में बेड खाली होता है तो उसकी सूचना इमरजेंसी को मिलती है। इसके बाद मरीज को वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है।

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