118 दिन बाद कोक ड्रम कच्छ से पहुंचेंगे रिफाइनरी:300 टायर के ट्रेलर से लाए जा रहे ड्रम, 35 लोगों की टीम चलती है साथ

बाड़मेर2 महीने पहले
कच्छ गुजरात से पचपदरा रिफाइनर आते कोक ड्रम।

देश की सबसे हाई टैक्नोलॉजी BS-6 मानक की रिफाइनरी का काम तेजी से चल रहा है। गुजरात के कच्छ में मुद्रा पोर्ट से अगस्त में रवाना हुए मुख्य कोक ड्रम 118 दिन की यात्रा के बाद गुरुवार को रिफाइनी पहुंचेंगे। इन ड्रमों को रिफाइनरी की अहम कड़ी माना जाता है। 190 टन वजनी चारों ड्रम 300 टायर की चार गाड़ियों में लाए जा रहे हैं।

ये चारों ड्रम 100 मीटर ऊंचे हैं और पाइप के आकार के हैं। इसे सुरक्षित लाने में लॉजिस्टिक टीम के 35 सदस्य रास्ते में साइनबोर्ड हटाने सहित सुरक्षित सफर के लिए साथ में रहते हैं। चारों भारी भरकम वाहनों के आगे एक एस्कॉर्ट वाहन भी साथ रहता है। दरअसल, जिले के पचपदरा में रिफाइनरी का काम तेजी से चल रहा है जो 2024 तक पूरा होना है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। 65 हजार करोड़ की लागत से बनने वाली रिफाइनरी में लगने वाले मुख्य कोक ड्रम इसकी अहम कड़ी माने जाते हैं। मुख्य कोक ड्रम लगने के बाद रिफाइनरी का शेष कार्य रफ्तार के साथ पूरा हो सकेगा। मुख्य कोक ड्रम लगने के लिए HPCL की टीम बेसब्री से इंतजार कर रही है।

मेगा हाईवे से गुजरता कोक ड्रम ट्रेलर।
मेगा हाईवे से गुजरता कोक ड्रम ट्रेलर।

6 अगस्त को गुजरात के कच्छ से हुआ था रवाना

ये कोक ड्रम 6 अगस्त को गुजरात के कच्छ में मुंद्रा पोर्ट से 300 टायर के ट्रेलर में रवाना हुए थे। इस ट्रेलर में 190 टन वजन के कुल 4 मुख्य कोक ड्रम हैं। यह रोज करीब 11 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। रिफाइनरी तक 540 किलोमीटर का सफर तय करने में गाड़ियों को 118 दिन लगे। चारों कोक ड्रम को को बड़े ही सुरक्षा बंदोबस्त के बीच रिफाइनरी तक लाया जा रहा है।

35 सदस्यों की टीम साथ में

गुजरात कच्छ मुद्रा पोर्ट से रवाना होने के साथ 35 सदस्यों की टीम वाहनों के आगे-पीछे चलती रही। वहीं रास्ते में आने वाले संकेतक बोर्ड, सूचना पट्‌ट सहित अन्य अवरोध को हटाया गया। वहीं चारों कोक ड्रम मेगा हाइवे से पचपदरा रिफाइनरी की ओर गुजरने के दौरान इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस विशाल ड्रमों को रिफाइनरी में अपने स्थान पर स्थापित करने के लिए 2500 टन क्षमता वाली क्रेनों की जरूरत होगी। 1250 टन क्षमता वाली क्रेन का पुर्जा-पुर्जा ट्रकों में यहां लाकर जोड़ा जाएगा। इसका सबसे ऊंचा ढांचा चिमनियां है, जो 140 मीटर ऊंची है। इन्हें भी इसी तरह स्थापित किया जाएगा।

4 महीने पहले रिफाइनरी में 15 करोड़ की लागत से कोक ड्रम की छत करवाई थी तैयार।
4 महीने पहले रिफाइनरी में 15 करोड़ की लागत से कोक ड्रम की छत करवाई थी तैयार।

15 करोड़ की लागत से बनाई थी कोक ड्रम की छत

पचपदरा रिफाइनरी में चार महीने पहले एक हिस्से में कोक ड्रम की छत का काम सिर्फ बीस घंटे में पूरा किया गया था। इस पर लागत 15 करोड़ रुपए आई थी। बाड़मेर की मैसर्स तन सिंह चौहान कंपनी ने यह काम टाटा प्रोजेक्ट के जरिये एचपीसीएल और ईआईएल की देखरेख में किया है। कोक ड्रम जब तैयार होगा तब इसकी ऊंचाई 130 मीटर होगी जो पचपदरा से 54 किलोमीटर दूर से भी दिखेगा। प्रदेश में अब तक संभवतया यह सबसे ऊंची व्यवसायिक बिल्डिंग होगी।

बताया जा रहा है कि प्रदेश में 130 मीटर ऊंची एक भी ऐसी इमारत नहीं है। रिफाइनरी में कोक ड्रम बनाने वाली तनसिंह चौहान कंपनी की ओर से जोगेंद्र सिंह चौहान और राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि सुरक्षा और गुणवत्ता के साथ जो काम तीस घंटे में पूरा करने का टास्क मिला था,वह बीस घंटे में ही पूरा किया गया। इस कोक ड्रम की छत प्रदेश में पहली ऐसी है जिसकी मोटाई दस फीट है। अमूमन घरों और व्यवसायिक इमारतों की छतों पर कंक्रीट उपयोगिता अनुसार छह इंच से शुरू होकर दस इंच तक बिछाई जाती है। ये पहली बार है कि कोक ड्रम की छत दस फीट मोटी बनाई गई है।