पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

कोरोना इफैक्ट:41 साल पुरानी रामलीला का इस बार कोरोना ने रोका मंचन

बाड़मेर7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • बाड़मेर शहर में 1979 में शुरू हुई थी रामलीला, उस समय जुड़े कलाकारों व आयोजकों ने भास्कर से साझा किए अपने अनुभव
  • कोरोना काल संकट चहुंओरा, काल हरो अब रघुवीरा। कोदंड पर चढ़े प्रत्यंचा, दुष्ट काल का करो विनाशा।।

41 साल पुराना रामलीला का मंचन इस बार काेविड-19 के कारण नहीं हाेगा। हर बार नवरात्रा शुरू होते ही रामलीला का मंचन शुरू होता है और रामनवमी के अवसर पर इसका समापन हो जाता है। दशहरे के दिन राम बने कलाकार तीर से रावण के पुतले का दहन करते हैं। इस बार महामारी के कारण परंपरागत इस त्यौहार का रंग फीका हो गया है। न तो इस बार रामलीला का मंचन होगा और न ही दशहरे का भव्य आयोजन।

चार दशक से चली आ रहा रामलीला का मंचन 1979 में स्थानीय लोगों ने मिलकर शुरू किया था। उस समय गांधी चौक में इसका मंचन किया जाता था। यह बाड़मेर शहर के लिए नया अनुभव था। लोगों में रामलीला का इंतजार रहता था। मंच सज्जा से लेकर पूरे मंचन तक अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की जाती थी।

उस समय रात को कलाकार मंचन करते थे और दिन में चंदा एकत्रित करते थे। रामलीला से जुड़े पुराने कलाकारों व आयोजकों से विशेष बातचीत में 41 सालों में शुरू से लेकर अब तक रामलीला मंचन के बदलाव के बारे में बताया।

पुष्कर प्रदीप

सन 1979-80 का दौर में बाड़मेर जिले में लोग साधन संपन्न ज्यादा नहीं थे। सांगीलाल सांगड़िया व मैने मिलकर रामलीला को मंच पर उतारने का कार्य किया। उस समय में कई लोग हमारे साथ जुड़े और एक टीम बनाई। यह बाड़मेर की जनता के लिए नया था। गांधी चौक में रामलीला का मंचन किया गया। पहली बार रामलीला मंचन शुरू करने के दौरान कई कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा।

हमारे साथ कई बुजुर्ग अनुभवी लोग भी थे। रामलीला मंच तैयारी से लेकर कॉस्ट्यूम, दृश्य सज्जा सहित कई बारीकियों को ध्यान में रखकर काम किया जाता था। उस दौरान टीम में शामिल सभी सदस्य पूरे मनोयोग से काम करते थे। मंचन नवरात्रा शुरू से लेकर रामनवमीं तक चलती थी।

शहर के सैकड़ों लोग शाम को रामलीला का मंचन देखने आते थे और मंच पर प्रसंगों के मंचन के दौरान जय श्रीराम के जयकारे गूंजते थे। उस दौरान बच्चों में रामलीला का इतना क्रेज था कि उन्हें भगवान राम से संबंधी सभी प्रसंग जुबानी याद हो जाते थे। पहले रामलीला मंचन में भगवान श्रीराम का किरदार रूपेश ने निभाया था।

वर्ष 2012: रामलीला में मेघनाद और लक्ष्मण के बीच युद्ध के दृश्य का मंचन करते कलाकार

नरेंद्रसिंह आलोक पुत्र धन्नीराम

धन्नीराम सरकारी कार्मिक थे, वो रामलीला की शुरुआत से ही जुड़े हुए थे। उनके पुत्र नरेंद्रसिंह आलोक आज भी रामलीला कमेटी से जुड़े हुए है। नरेंद्रसिंह ने बताया कि उनके पिता रामलीला मंचन के दौरान पूरी व्यवस्थाओं के साथ साथ कलाकारों में भी साथ थे। रामलीला से पंद्रह दिन पहले से ही तैयारियों में जुट जाते थे। पहले कलाकारों की भूमिकाएं तय की जाती थी।

इसके बार उनकी रिहर्सल होती थी। मंच पर प्रसंग के अनुसार मंच सज्जा करना और उसे उसी के अनुरूप मंचित करने की जिम्मेदारी रहती थी। रात को रामलीला का मंचन करते थे और दिन में लोगों के पास पूरी टीम के साथ चंदा मांगते थे। उस समय चंदा भी कम मिलता था लेकिन खर्चे भी बहुत ही कम होते थे।

गांधी चौक में मंच तैयार किया जाता था और देखने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा रहती थी। दो-ढाई दशक तक गांधी चौक में ही रामलीला का मंचन हुआ, इसके बाद हाईस्कूल मैदान में शुरू किया गया। शाम के समय लोग रामलीला शुरू होने से पहले ही आकर मंच के सामने बैठ जाते थे।

ओम जोशी

80 के दशक में रामलीला मंचन शुरू होने के बाद मैं कमेटी से जुड़ा। उस समय माहौल अलग था और लोग एक दूसरे का बहुत ही आदर करते थे। इतनी भागदौड़ भरी जिंदगी नहीं थी। नवरात्रा शुरू होते ही रामलीला का मंचन किया जाता था। उस दौरान व उससे पहले रिहर्सल और कलाकारों के कॉस्ट्यूम तय करने पड़ते थे।

कास्ट्यूम दिल्ली जाकर लाते थे। उस समय इतनी महंगाई नहीं थी। धीरे-धीरे लोग रामलीला कमेटी के प्रति जुड़ने लग गए और फिर कुछ समय बाद चंदा भी ठीक ठाक आना शुरू हो गया। इससे मंच को बेहतर बनाने में सुविधाएं रहती थी। उस दौरान लोग मन से जुड़ाव रखते थे। रामलीला किसी उत्सव से कम नहीं था।

महिलाएं व बच्चे मंचन शुरू होने से पहले ही आकर बैठ जाते थे और इंतजार करते थे। चार दशक बाद अब कई कलाकार व आयोजन कमेटी के सदस्य हमारे बीच नहीं है। लेकिन नई पीढ़ी भी इसको लेकर आगे आए तो हमारी लोक संस्कृति व परंपरा को बेहतर मंच व स्थान मिलेगा।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- सकारात्मक बने रहने के लिए कुछ धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में समय व्यतीत करना उचित रहेगा। घर के रखरखाव तथा साफ-सफाई संबंधी कार्यों में भी व्यस्तता रहेगी। किसी विशेष लक्ष्य को हासिल करने ...

    और पढ़ें