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काेराेना वाॅरियर्स:काेराेना के गंभीर मरीजों के लिए 7 एनेस्थेसिया के डॉक्टर कर रहे ड्यूटी, पीपीटी किट पहनने तक का समय भी नहीं होता

बाड़मेर14 दिन पहले
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- डाॅ. आर.के. आसेरी, प्राचार्य, मेडिकल काॅलेज । - Dainik Bhaskar
- डाॅ. आर.के. आसेरी, प्राचार्य, मेडिकल काॅलेज ।

जिला अस्पताल में काेराेना के गंभीर मरीजों के लिए एनेस्थेसिया विभाग की टीम सात सदस्यीय टीम पिछले एक महीने से तैनात है। एनेस्थेसिया के डॉक्टर ऐसे फ्रंट लाइन योद्धा है, जिन पर सबसे ज्यादा कोराेना संक्रमण का खतरा मंडराता रहता है। यह खतरा अन्य हैल्थ वर्कर्स की तुलना में 15 गुना ज्यादा हाेता है। मरीज के गंभीर अवस्था में हाेने तथा इमरजेंसी में आने पर इन्हें पीपीटी किट सहित बचाव सामग्री तक पहनने का समय तक नहीं मिल पाता। भास्कर लाइव...। एनेस्थेसिया के इन सात डॉक्टराें की जुबानी

सभी डॉक्टरों काे सलाम, जाे खुद काे भूल ड्यूटी पर तैनात

मैं स्वयं एनेस्थेसिया डॉक्टर हूं। डाॅ. शारदा की देखरेख में पांच सदस्यीय टीम 24 घंटे काम कर रही है। जिला अस्पताल में एक भी ऐसा गंभीर मरीज नहीं है, जिसे एनेस्थेसिया टीम की ओर से अटेंड नहीं किया गया हाे। मेरे अस्पताल के डॉक्टर मरीजों काे बचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। कई मरीजों काे समय पर अटैंड करने से उनकी जान बची है। गंभीर मरीजों के लिए एक मिनट की देरी भी घातक है। सबसे ज्यादा रिस्क पर एनेस्थेसिया के डॉक्टर हाेते हैं। मरीज काे वेंटिलेटर पर लेना, ट्यूब लगानी ऐसे में एनेस्थेसिया के डॉक्टर काे वहीं काम करना हाेता है और वे सीधे मरीज के संपर्क में आते हैं, जहां सबसे अधिक संक्रमण का खतरा हाेता है। - डाॅ. आर.के. आसेरी, प्राचार्य, मेडिकल काॅलेज ।

ऑक्सीजन सिस्टम के चेयरमैन, एनेस्थेसिया के टीम लीडर

एनेस्थेसिया के पांच डॉक्टर की टीम गठित की गई है। इनमें दाे डॉक्टर 12-12 घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी पर तैनात किए गए है। वहीं इमरजेंसी में ऑपरेशन हाेने पर डॉक्टर काे काॅल पर बुलाया जा रहा है। प्राचार्य के निर्देशन पर अस्पताल में ऑक्सीजन सिस्टम तथा टीम की देखरेख कर रहा हूं। दाेनाें ऑपरेशन थिएटर में चालू है। गंभीर ऑपरेशन के साथ गायनिक के सिजेरियन लगातार किए जा रहे है। प्राचार्य का स्टूडेंट रहा हूं इसलिए उन्हें काम करते देखता हूं ताे मैं भी अपने आम काे 20 वर्षीय युवक ही समझ रहा हूं।- डाॅ. मदनलााल शारदा, विभागाध्यक्ष एनेस्थेसिया।

मरीज के गंभीर हाेने पर पीपीई किट पहनने का भी समय नहीं

काेई महामारी हाे, दुर्घटना या कठिन ऑपरेशन सभी में एनेस्थेसिया की भूमिका अहम है। 376 बेड के अस्पताल में अधिकतर मरीज ऑक्सीजन पर है। उनका ऑक्सीजन लेवल तथा अधिक गंभीर हाेने पर वेंटिलेटर पर लिए जा रहे हैं। ऐसे में काॅल आने पर तुरंत ही पहुंचना पड़ता है। एक सैकंड की देरी मरीज की जान ले सकती है। ऐसे में पीपीटी किट पहनने का समय ही नहीं मिलता।ऑक्सीजन की खपत कम करने के लिए बैन सर्किट का उपयोग किया जा रहा है, इससे खपत आधी रह जाती है। मरीज को भी प्रेशर के साथ ऑक्सीजन देने से आराम मिलता है। दूसरी ओर ओटी में भी ऑपरेशन हाे रहे हैं। परिस्थितियां विकट है, लाेगाें काे भी सचेत हाेना आवश्यक है।- डाॅ. भीमराज सिंघवी, एनेस्थेसिया।

अधिकतर मरीज गंभीर, समय पर अटेंड करना जरूरी

जिला अस्पताल में आने वाले प्रत्येक गंभीर मरीज के पास हम पहुंच रहे हैं। 19 वार्ड में काेविड के लगभग 350 मरीज से अधिक मरीज भर्ती है। सीरियस होते मरीज के लिए ऑक्सीजन मैनेजमेंट से लेकर सीपीआर और एएलएस की भागदौड़ एक युद्ध की तरह लगती है। इस बीमारी को अर्ली स्टेज में रोकना हमारा मेन टारगेट होना चाहिए। इसके लिए 2 पी पर फोकस करें। प्रोन्निंग (छाती के बल उल्टा लेटना दिन में लगभग 6घंटे) और पेरासिटामोल ले। मरीजों काे वेंटिलेटर पर लेना, हाई फ्लो नेजल केन्यूला लगाना रिससिटेशन जैसी जीवन रक्षक प्रक्रिया की जा रही है।- डाॅ. जगदीश कुमावत, एनेस्थेसिया।

हम सभी एक साथ मिलकर कर रहे हैं ड्यूटी

पूरा अस्पताल गंभीर मरीजों से भरा है। आईसीयू, आईसीसीयू, एसआईसीयू के सभी गंभीर मरीजों की देखभाल की जा रही है। ऐसे में सभी एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। मरीजों काे वेंटिलेटर, बाई पेप, इंटुबेशन, बैन सर्किट पर लेने में देरी नहीं की जा सकती। -डाॅ. अलका लूनिया, एनेस्थेसिया।

भगवान ने बनाया ही इसलिए, हमारी सबसे ज्यादा जरूरत

हमारी ड्यूटी बनती है कि उन्हें तुरंत ऑक्सीजन सहित आपात सुविधाएं मुहैया करवाएं। इस दाैरान सेफ्टी किट तक पहनने का समय नहीं रहता। पांच माह की बच्ची भी है उसकी देखरेख सास कर रही हैं। भगवान ने डॉक्टर भी ताे इसलिए बनाया है। फर्ज काे निभाना ही पड़ेगा। - डाॅ. मुकेश चाैधरी, एनेस्थेसिया।

एनेस्थेसिया विभाग ऑन द टू काम कर रहा

अस्पताल में जिस अवस्था में मरीज आ रहे हैं, स्थिति सभी के सामने है। हमारी शत प्रतिशत काेशिश जारी है। इमरजेंसी से काॅल आती है और मरीज का ऑक्सीजन सेचुरेशन 6 प्रतिशत तक का आ रहा है। यह हाे क्या रहा है। हमारे भाग्य है कि अस्पताल में ऑक्सीजन भी पर्याप्त चल रही है। हम ऑन द टू काम कर रहे हैं।- डाॅ. महेंद्र चाैधरी, एनेस्थेसिया।

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