केंद्र सरकार को भेजा प्रस्ताव:प्रदेश के 25 जिलों में 60 हजार हेक्टेयर में बबूलों को नष्ट करने पर खर्च होंगे 954 करोड़

बाड़मेर9 महीने पहलेलेखक: पूनमसिंह राठौड़
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
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  • राज्य ने प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा,जल्द मिलेगी मंजूरी

प्रदेश के बाड़मेर समेत 25 जिलों में विलायती बबूल (जूलीफ्लोरा) वनस्पति के लिए खतरा बन गए हैं। बढ़ते रेगिस्तान की रोकथाम के लिए हेलीकॉप्टर से बबूलों के बीजों का छिड़काव किया गया था। बीते 80 साल में प्रदेश के वन क्षेत्र में 15 फीसदी विलायती बबूल पनप गए हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार ने 954 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा है। जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके बाद टेंडर जारी कर विलायती बबूलों को नष्ट कर दूसरी प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे।

वन विभाग ने बाड़मेर समेत प्रदेश के 25 जिलों का प्लान तैयार किया है। पहले चरण में 60 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र से बबूलों को नष्ट किया जाएगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय समीक्षा समिति के स्तर पर प्रस्ताव का अनुमोदन के बाद केंद्र सरकार को भेजा दिया है। गौरतलब है कि विलायती बबूलों की समस्या को लेकर विधायक कई बार विधानसभा में मुद्दा भी उठा चुके हैं।

लंबे इंतजार के बाद राज्य सरकार ने इसके समाधान की कवायद शुरू की है। विलायती बबूल का वैज्ञानिक नाम जूलीफ्लोरा है। यह मूल रूप से दक्षिण और मध्य अमेरिका व कैरीबियाई देशों में पाया जाता है। यह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिम उत्तर प्रदेश में पाया जाता है।

बढ़ते रेगिस्तान को रोकने विलायती बबूल लगाए, अब वनस्पति को निगल रहे
वन क्षेत्र में फैले जंगलों के लिए विलायती बबूल खतरा साबित हो रहा है। वन्य क्षेत्र में बहुतायत में उग आया विलायती बबूल अब अपने आसपास किसी अन्य वनस्पति को पनपने नहीं दे रहा है। विलायती बबूल धीरे-धीरे अरावली पहाड़ियों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी फैल चुका है। जिससे अरावली पहाड़ियों पर पाई जाने वाली अमूल्य वन व वानस्पतिक संपदा को बबूल निगलता जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली कुछ संस्थाओं की ओर से किए सर्वे के मुताबिक विलायती बबूल देशी जानवरों और पौधों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है जिसके चलते जैव विविधता कम हो गई।

80 साल पूर्व अंग्रेजों ने हेलीकॉप्टर से छिड़के थे बीज
वर्ष 1940 में ब्रिटिश अधिकारियों ने उस समय राजस्थान में बढ़ रहे रेगिस्तान को रोकने के लिए मेक्सिको का एकेसिया का बीज बाड़मेर, जैसलमेर समेत राजस्थान के अधिकांश जिलों में छिड़का गया था। अकाल व कम बारिश के बावजूद धीरे-धीरे बबूल पनपने लगे और बीते 80 सालों में लाखों हेक्टेयर में फैल चुके हैं।

विधानसभा में उठाया था मुद्दा,अब समाधान होगा
विलायती बबूलों का क्षेत्रफल लगातार बढ़ना चिंताजनक है। बाड़मेर शहर समेत गांवों में बबूल सबसे बड़ी समस्या बन गए हैं। विधानसभा में इसको लेकर मुद्दा उठाया था। अब राज्य सरकार ने प्लान तैयार किया है। अब जल्द ही समस्या का समाधान होने की उम्मीद जगी है।
-अमीन खां, विधायक शिव।

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