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टीवी पर प्रवचन सुन घर छोड़ा:धार्मिक प्रवचन सुनकर वृंदावन जाने का प्लान बनाया, नाबालिग बोली- देखना चाहती थी, बाबा असली है या नकली

बाड़मेर19 दिन पहले
पुलिस थाना मंडली।

बानियावास गांव से लापता हुई तीन नाबालिग बहनों को पुलिस रविवार को जयपुर से बाड़मेर लेकर आई। यहां पुलिस ने उनसे पूछताछ की। सामने आया कि नाबालिग बहनों में सबसे बड़ी बहन धार्मिक चैनल पर आने वाले प्रवचन सुनकर प्रभावित हुई थीं। घर से अकेली वृंदावन जाने के लिए निकली थीं। थोड़ी दूर जाने के बाद घर के बाहर खेल रही उसकी चचेरी बहनों ने रोकते हुए पूछा कि आप कहां जा रही हो तो उसे लगा कि ये दोनों घर वालों को बता देगी। इस पर उसने उन दोनों को भी साथ ले लिया। चिट्ठी में 'बाबा असली निकला तो वापस नहीं आऊंगी, नकली निकला तो वापस आ जाऊंगी' लिखने के बारे में नाबालिग ने बताया कि उसके लिखने का मतलब था कि टीवी में जो दिखता है, वो असली है या नकली।

मंडली थानाधिकारी सुमन बुंदेला ने बताया कि नाबालिग बहनें धार्मिक चैनलों पर प्रवचन देखती और सुनती थीं। इन चैनलों पर कथावाचक प्रवचन सुनाया करते थे। वहां की सारी व्यवस्थाएं देखकर उनका मन भी वहां जाने का हुआ। उन्होंने सोचा कि घर वालों को बताएंगे तो जाने नहीं देंगे, इसलिए तीनों बिना बताए घर से निकल गईं। तीनों नाबालिग घर से करीब दो-ढाई किलोमीटर दूर एक गांव पहुंची। जहां एक व्यक्ति को अपने माता-पिता के जोधपुर में होने की बात कही। किराए के लिए पैसे नहीं थे, तो 1100 रुपए में सोने की बाली बेच दी। यहां से 500 रुपए किराए पर टैक्सी लेकर आगोलाई पहुंचीं। यहां से बस में सवार होकर जोधपुर के लिए रवाना हुईं।

बुंदेला ने बताया कि सीसीटीवी खंगालने से पता चला कि तीनों नाबालिग बहनें जोधपुर के आकलिया चौराहे पर उतरी थीं। यहां एक टैक्सी ड्राइवर को जयपुर जाने की बात बताई है। ड्राइवर ने उनको रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की टिकट दिलाकर जयपुर की ट्रेन में बैठा दिया। जयपुर उतरने के बाद आगे का रास्ता इनके लिए कठिन हो गया। तीनों बहनें जयपुर की सड़कों पर इधर-उधर घूमने लगीं। इस दौरान लोगों को लगा कि बच्चियां रास्ता भटक कर आ गई हैं, तो उन्होंने चाइल्ड हेल्प लाइन को सूचना दी। हेल्प लाइन ने तीनों को बाल सुधार गृह भिजवाकर पुलिस को सूचना दी।

यह है मामला
गांव बनियावास में मंगलवार शाम को तीन चचेरी नाबालिग बहनें और उनकी दादी घर पर थीं। बच्चियों के पिता-मां खेत में काम रहे थे। दादी घर के काम में उलझ गईं। इसी दौरान तीनों बहनें घर से बिना बताए निकल गईं। इनमें सबसे बड़ी बहन 17 साल, दूसरी 15 साल और तीसरी 8 साल की है। थोड़ी देरी बाद दादी को तीनों बहनें नहीं दिखी, तो उन्होंने पड़ोस और गांव में देखा, लेकिन उनका पता नहीं लगा। इसके बाद रात करीब 8 बजे बच्चियों की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई।

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