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  • After Three Months, Jasol Dham, The Center Of Faith Will Open On 16, Devotees Will Have Darshan Of The Mother, Only Those Who Take The First Dose Will Have Darshan

भक्तों को होंगे माता के दर्शन:3 महीने बाद 16 को खुलेगा आस्था का केंद्र जसोल धाम, श्रद्धालुओं को होंगे माता के दर्शन, पहली डोज लगने वालों को ही होंगे दर्शन

बाड़मेर2 महीने पहले
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कोरोना महामारी से बचाव और लॉकडाउन के चलते तीन मााह से बंद जिले का सबसे बड़ा माता राणी भटियाणी मन्दिर 16 जुलाई से खुलेगा। यह मंदिर 16 अप्रैल से बंद था। करीब तीन माह से श्रद्धालु मन्दिर में पहुंचकर माता के दर्शन नहीं कर पा रहे थे।

मन्दिर संस्थान की ओर से मंदिर बंद रहने के दौरान भी पूर्व की भांति मंदिर के मुख्य द्वार पर एलईडी से माता के दर्शन व आरती सहित विविध प्रकार के पूजा-अर्चना का वेबसाईट से भक्तों को घर बैठे दर्शन लाभ मिल रहा था, मंदिर में कार्यरत पुजारियों की ओर से माता की पूजा-अर्चना नियमित रूप से की जा रही है। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में धार्मिक स्थल खोलने के निर्णय के बाद मन्दिर ट्रस्ट द्वारा कोविड गाइडलाइंस की पालना के साथ श्रद्धालुओं के लिए जसोल धाम 16 जुलाई से खुलेगा।

श्री राणी भटियाणी मन्दिर संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने बताया कि जसोल धाम में स्थित विख्यात माता राणी भटियाणी मन्दिर कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद 16 जुलाई से श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। श्री राणी रूपादे मंदिर पालिया व श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, मालाजाल-तिलवाड़ा 12 जुलाई से खुल चुके हैं।

पहली डोज अनिवार्य

मन्दिर में माता के दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं को कोरोना की गाइड लाइन का कड़ाई से पालन करनी होगी। मन्दिर के भीतर दर्शन को आने वाले सभी श्रद्धालुओं को कोविड 19 की पहली वैक्सीन लगी होनी चाहिए। वहीं, मास्क पहनने के साथ सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करनी होगी। संस्थान के वाहन पार्किंग में निर्माण कार्य जारी होने की वजह से पार्किंग 31 जुलाई 2021 तक बंद रहेगी।

पहुंचते थे प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु

जसोलधाम का माता राणी भटियाणी मन्दिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते थे। लेकिन कोरोना महामारी के बीच फैलते संक्रमण के चलते धार्मिक स्थलों के बन्द के बाद इन दिनों मुख्य सड़क मार्गों व मंदिर परिसर सहित अन्य स्थानों पर सन्नाटा पसरा नजर आ रहा था।

मंदिर के कारण ही यहां करीब 100 से अधिक छोटी बड़ी दुकान चलाकर दुकानदार परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। बाजार और दुकाने बंद होने के कारण उन लोगों का भी हाल बेहाल है। अब मन्दिर खुलने के साथ ही खुशी का माहौल बना हुआ है।

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