पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

1 लाख 41 हजार 614 मजूदरों को मिला रोजगार:मनरेगा में रोजगार देने में बाड़मेर प्रदेश में अव्वल, कोरोना महामारी में मनरेगा ग्रामीणों के लिए बनी वरदान

बाड़मेर4 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
मनरेगा योजना के तहत काम करती महिलाएं। - Dainik Bhaskar
मनरेगा योजना के तहत काम करती महिलाएं।

वैश्विक महामारी कोविड-19 में महात्मा गांधी नरेगा योजना ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रही है। लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ महात्मा गांधी नरेगा योजना को अनलॉक करने से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने लगा है। इसकी बदौलत बाड़मेर जिला मनरेगा में 1 लाख 41 हजार 614 मजूदरों को रोजगार के साथ प्रदेश में अव्वल स्थान पर है।

कोविड-19 की रोकथाम के लिए पूरे प्रदेश में पिछले काफी समय से लॉकडाउन लगा हुआ है। सार्वजनिक परिवहन के साधनों पर अंकुश रहने से ग्रामीणों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया था। इस विकट परिस्थिति में ग्रामीणों के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजना खासी मददगार साबित हो रही है।

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहनदान रतनू के मुताबिक महात्मा गांधी नरेगा योजना में स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों के साथ बेरोजगार प्रवासियों को भी रोजगार मिल रहा है। उनके मुताबिक कार्य स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करवाने के साथ मास्क की अनिवार्यता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अनलॉक के बाद बना अव्वल

कुछ दिन पूर्व राज्य सरकार ने महात्मा गांधी नरेगा योजना को अनलॉक करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। मौजूदा समय में बाड़मेर जिला श्रमिक को रोजगार देने के लिहाज से पूरे राज्य में अव्वल स्थान पर है। बाड़मेर जिले में 1 लाख 41 हजार 614 मजदूरों को रोजगार दिया गया है जबकि 1 लाख 27 हजार 035 श्रमिकों के रोजगार के साथ बांसवाड़ा जिला दूसरे एवं 69 हजार 281 श्रमिकों के रोजगार के साथ डूंगरपुर जिला तीसरे स्थान पर है।

प्रधानमंत्री आवास और व्यक्तिगत कामों पर जोर

कार्यस्थल पर अधिकाधिक भीड़भाड़ नहीं हो, इसके लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना एवं व्यक्तिगत श्रेणी के कार्यो को प्राथमिकता दी गई है। सार्वजनिक प्रवृति के कार्यो पर सोशल डिस्टेंस, साबून से हाथ धोने तथा मास्क के इस्तेमाल के लिए श्रमिको से समय-समय पर समझाइश की जा रही है।

बेरोजगार प्रवासियों को मिला रोजगार

बाड़मेर जिले के हजारों लोग गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब समेत दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में विभिन्न प्रतिष्ठानों और दुकानों में करते थे। लॉकडाउन लगने के साथ बड़ी तादाद में बाड़मेर लौटे प्रवासियों के सामने रोजगार का संकट हो गया। ऐसी स्थिति में महात्मा गांधी नरेगा योजना में बड़ी तादाद में बेरोजगार प्रवासियों को रोजगार मुहैया कराया गया।

खबरें और भी हैं...