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बगावत:डेढ़ साल से जहर के घूंट पी रहे थे, अब थक गए: चौधरी

बाड़मेर10 महीने पहले
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  • 6 बार विधायक रहे हेमाराम के कांग्रेस से बगावती सुर

40 साल से कांग्रेस से छह बार विधायक, राजस्व मंत्री और प्रतिपक्ष नेता रहे गुड़ामालानी विधायक के सुर पिछले एक साल से बदल-बदले हुए थे, लेकिन अब खुलकर कांग्रेस के विरोध में उतर आए है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे घमासान के बीच विधायक हेमाराम चाैधरी भी पिछले चार दिन से अज्ञातवास में है। पायलट खेमे में शामिल होकर मुख्यमंत्री गहलोत के विरोध में है, यहां तक की चौधरी ने प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन करने की भी मांग कर दी है।

40 साल के कांग्रेस पार्टी में राजनीतिक कॅरियर को अब दांव पर लगाकर वे  विरोध में उतर आए है। हालांकि जब से प्रदेश में कांग्रेस की गहलोत सरकार बनी है तब से वे नाराज है। पहले मंत्री मंडल के शपथ ग्रहण के दिन भी नाराजगी दिखाई थी और वे विधानसभा में नहीं पहुंचे थे। मंत्रिमंडल में भी जगह नहीं मिलने से काफी खफा थे और विधानसभा में दो बार खुलकर सरकार का विरोध कर चुके हैं। एक बार इस्तीफा भी दिया था, लेकिन स्वीकार नहीं किया गया। 

सचिन खेमे में गए हेमाराम चौधरी ने कहा प्रदेश में मुख्यमंत्री बदला जाए

विधायक हेमाराम चौधरी अब गहलोत से अलग होकर सचिन पायलट गुट में शामिल हो गए है। चौधरी ने कहा कि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत है। डेढ़ साल में कोई काम नहीं हो रहे हैं। जनता हमारे कपड़े फाड़ रही है, हम परेशान है। मैं सचिन पायलट के साथ इसलिए हूं कि पायलट ने 2013 में जिस कांग्रेस को सिर्फ 21 विधायक मिले थे, उसके लिए सड़कों पर संघर्ष किया।

5 साल बाद 2019 में कांग्रेस की सरकार बनाई, लेकिन जब मुख्यमंत्री की बारी आई तो पायलट को साइड लाइन कर गहलोत मुख्यमंत्री बन गए। किसानों को बिजली नहीं मिल रही, किसानों का कर्ज तक नहीं दे रहे है। घोषणा पत्र के वादे पूरे नहीं हुए है। डेढ़ साल से सरकार का सहयोग किया और जहर के घूंट पीते रहे। अब हम डूबने लगे तो बचाव की कोशिश की है।

मंत्रीमंडल में जगह नहीं मिलने के बाद से खफा है हेमाराम

  •  27 जनवरी 2019: गहलोत-पायलट के बीच मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री पद के बंटवारे के बाद मंत्रीमंडल विस्तार हुआ, लेकिन 6 बार विधायक बने हेमाराम चौधरी को जगह नहीं मिली। इससे हेमाराम विधानसभा सदस्य के लिए भी शपथ लेने दूसरे दिन पहुंचे थे।
  •  31 अगस्त 2019: कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मंच पर कहा था कि किसानों को ऋण देने में भ्रष्टाचार हो रहा है। पंचायती राज चुनाव में तीन संतान का नियम सरकार हटाए।
  •  9 मार्च 2020: ना मैं पार्टी से नाराज हूं...ना ही खुश हूं... अब चुनाव नहीं लड़ूंगा। सरकार में मेरी सुनवाई नहीं, मेरा धैर्य जवाब दे रहा, कभी भी विधायक पद से इस्तीफा दे सकता हूं।

विधायक हेमाराम का राजनीतिक कॅरियर

हेमाराम चौधरी पेशे से वकील है। किसान परिवार में 1948 में जन्म हुआ और अपने 72 साल के जीवन में 40 साल राजनीतिक सफर तय किया है। ये कहे कि महज 32 साल की उम्र में 1980 में गुड़ामालानी से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1985, 1998, 2003, 2008, 2019 में विधायक चुने गए।

छह बार विधायक रहे है। 1978 में पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ कर राजनीति की दहलीज पर पैर रखा था। जाट समाज के प्रभावशाली लीडर रहे हंै। राजस्थान सरकार में राजस्व मंत्री, प्रतिपक्ष नेता सहित कई पदों पर रह चुके हैं। कांग्रेस के वफादार सिपाही के रूप में काम किया है।

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