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सतर्कता:मोबाइल में आरोग्य सेतु है तो ब्लूटूथ और जीपीएस 24 घंटे ऑन जरूरी

बाड़मेर8 महीने पहले
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  • कोरोना की चपेट में आने से बचाने के लिए एप का इस्तेमाल जरूरी, अब तक 16 करोड़ लोग कर चुके इंस्टाल

कोरोना महामारी का संक्रमण तेजी से फैल रहा है और आम लोगों को इसकी चपेट में आने से बचाने के लिए सरकारें हरसंभव प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से लाया गया ऐप आरोग्य सेतु भी इसी कवायद का हिस्सा है। यह एप अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लोग आसपास किसी संक्रमित व्यक्ति के होने की जानकारी खुद के मोबाइल पर ही देख सकते हैं आंकड़ों की मानें तो 7 अक्टूबर तक 16 कराेड़ लाेग यह एप डाउनलाेड कर चुके हैं।

यह एप काेराेना संक्रमित की जानकारी ताे दे रहा है लेकिन चिंता की बात यह है कि इसके जरिए साइबर क्रिमिनल यूजर्स के मोबाइल में घुसकर निजी जानकारियां और डेटा चुरा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आरोग्य सेतु के लिए हर समय ब्लूटूथ और जीपीएस ऑन रखना पड़ता है और यह खतरनाक हो सकता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालांकि नए मोबाइल में आने वाले ब्लूटूथ के सिक्योरिटी फीचर्स ज्यादा मजबूत होते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्लूटूथ या जीपीएस को बंद करना इसका समाधान नहीं है। ब्लूटूथ के जरिए हैकर तभी मोबाइल में सेंध लगा सकता है।

आरोग्य सेतु का सही इस्तेमाल करना क्यों है जरूरी
यदि कोई कोरोना पॉजिटिव है, तो ब्लूटूथ और जीपीएस इंटरनेट के साथ हमेशा चालू रखना ही चाहिए, ताकि आरोग्य सेतु ऐप का ट्रेकिंग सिस्टम सुचारू काम करता रहे और दूसरों को संक्रमण से बचाने में मदद मिलती रहे। अन्य व्यक्तियों को चाहिए कि घर से बाहर या कार्य स्थल पर जाने से पहले एप के ट्रेकिंग सिस्टम को चालू रखें ताकि अगर किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ रहे हैं तो इसकी जानकारी मिल सके।

हैक होने से बचा सकती हैं सुरक्षा सेटिंग्स
मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले ब्लूटूथ की सिक्योरिटी सेटिंग्स जांच लें। डिवाइस को ट्रस्टिंग करने वाली डिवाइस लेवल सिक्योरिटी सेट करें व सिर्फ उसी डिवाइस को कनेक्ट करने की अनुमति दें, जिसके बारे में जानते हों। अनजान कनेक्शन से रिक्वेस्ट आए तो भी उसे रिजेक्ट कर दें।

हैकर ब्लूटूथ से फोन में यूं लगाते हैं सेंध
हैक करने के लिए क्रिमिनल्स अलग-अलग तरीके काम में लेते हैं। इनमें मुख्य ब्लूस्मैकिंग, ब्लूजैकिंग, ब्लूस्नर्फिंग या ब्लूबगिंग जैसी तकनीक शामिल हैं। सामान्य भाषा में ये एक तरह की ब्लूटूथ नेटवर्किंग कहलाती है। ब्लूबगिंग तब होती है, जब एक हैकर आपके मोबाइल फोन पर कंट्रोल कर लेता है।

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