पशुपालन एवं डेयरी एक भरोसेमंद व्यवसाय:चौधरी ने कहा पशुपालन एवं डेयरी भरोसेमंद व्यवसाय

बाड़मेर19 दिन पहले
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पशुपालन एवं डेयरी प्राचीन काल से हमारी आजीविका का प्रमुख आधार रहा है। गांव में खेत-खलिहानों के साथ पशुपालन एवं डेयरी को एक व्यवसाय के रूप में अपनाकर खेती-बाड़ी के जोखिम को कम किया जा सकता है। इस व्यवसाय को करने के लिए किसी अतिरिक्त योग्यता की जरूरत नहीं होती है। पशुपालन एवं डेयरी एक भरोसेमंद व्यवसाय है।

यह बात श्योर द्वारा केयर्न वेदांता फाउंडेशन के सौजन्य से संचालित डेयरी विकास एवं पशुपालन परियोजना के तहत दुग्ध अवशीतलन केंद्र परिसर डांगियों की ढाणी देवड़ा में परियोजना के तहत आयोजित जन जागरूकता प्रशिक्षण एवं कार्यशाला में बोलते हुए संदर्भ व्यक्ति एवं कार्यक्रम प्रबंधक हनुमान राम चौधरी ने कही।

उन्होंने उपस्थित अतिथियों संभागियों का स्वागत करते हुए एवं संस्था केयर्न वेदांता फाउंडेशन परियोजना एवं कार्यशाला के उद्देश्य की स्पष्टता करते हुए कहा कि दुग्ध उत्पादक उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं की बृहत स्तर पर पालन कर डेयरी व्यवसाय को सफल बनावें। चौधरी ने उपस्थित दुग्ध उत्पादकों से आह्वान करते हुए कहा कि दुग्ध उत्पादक जागरुक व सशक्त बनकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से डेयरी व्यवसाय कर सहकारिता सामुदायिकता एवं सहभागिता से स्वावलंबी बने।

उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादक एवं महिलाएं सशक्त एवं जागरूक बनकर डेयरी सरकारी गैर सरकारी नाबार्ड एवं बैंकिंग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाएं। चौधरी ने उपस्थित दुग्ध उत्पादकों को जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ सहकारिता की भावना से एक दूसरे के प्रति समर्पित बनने का आह्वान किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में समिति सचिव नाथाराम डांगी ने परियोजना के तहत किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की और उपस्थित दुग्ध उत्पादकों को गुणवत्ता युक्त ताजा दूध प्रतिदिन डेयरी पर लाकर डेयरी के सफल संचालन एवं प्रबंधन में सहयोग करने की अपील की।

कार्यशाला में प्रगतिशील किसान सुरेश कुमार चौधरी, वगताराम सुथार, वर्षादेवी मेघवाल, अध्यक्ष महिला स्वयं सहायता समूह रेखा देवी, रमकु देवी, लक्ष्मी देवी, सुआदेवी, किसनाराम चौधरी, छगन देवी, सुरका कुमारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में 22 महिलाओं सहित कुल 46 संभागियों ने भाग लिया।

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