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गंभीर लापरवाही:जिला अस्पताल की बर्न यूनिट पांच माह से बंद, 42 डिग्री तापमान में मरीजों को सामान्य वार्ड में कर रहे भर्ती

बाड़मेर9 दिन पहले
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  • एक कमरा जहां दाे बेड, पंखा एक ही, एसी बंद, मरीज फिमेल सर्जिकल वार्ड में भर्ती
  • भीषण गर्मी में बर्न यूनिट संचालित नहीं होने से मरीजों का बढ़ रहा दर्द

जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में आने वाले बर्न केस के मरीजों का अस्पताल प्रशासन कागजाें में एडमिशन ताे बर्न यूनिट में कर रहा है, लेकिन उन्हें भर्ती फिमेल सर्जिकल वार्ड में किया जा रहा है। जिला अस्पताल की बर्न यूनिट पिछले पांच महीने से बंद है। ऐसे में बर्न केस के मरीजों काे सामान्य वार्ड में भर्ती करना उनके जख्मों पर नमक डालने से कम नहीं।

एक ओर भीषण गर्मी और तापमान का 42 डिग्री तक पहुंचना और दूसरी ओर बर्न के मरीजों के लिए पंखे तथा एसी की व्यवस्था तक नहीं हाेने से उनका यह दर्द नासूर बन रहा है। जिला अस्पताल में बर्न केस के मरीजों के लिए फिलहाल पुरानी बिल्डिंग में बनी ओटी के सामने के पाेस्ट ऑपरेटिव वार्ड में दाे बेड की ताे व्यवस्था की गई है, लेकिन पंखा सिर्फ एक लगवाया गया है।

ऐसे में दूसरे मरीज के आने की स्थिति में उसे मेल या फिमेल सर्जिकल वार्ड में रखा जा रहा है। वहीं एडमिशन बर्न यूनिट का बनाया जा रहा है। अस्पताल में किसी कारण से जलने पर महिला व उसकी दाे साल की बेटी काे फिमेल सर्जिकल वार्ड में रखा गया है, जहां गर्मी के माैसम के चलते उनकी स्थिति दयनीय बनी हुई है। गर्मी के कारण बेटी दर्द से कराह रही है ताे महिला भी असहनीय पीड़ा भुगत रही है।

काेविड-19 महामारी के दाैरान केस बढ़ने के कारण पुरानी बिल्डिंग के वार्डाें काे काेराेना वार्ड में बनाया गया। ऐसे में बर्न के केस आने पर उन्हें पुरानी ओटी के पास बनाए गए पाेस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट किया गया। लेकिन वार्ड में किसी प्रकार की बर्न के मरीजों की सुविधा नहीं की गई। गौरतलब है कि जिला अस्पताल की बर्न यूनिट बीते पांच माह से बंद है। इसे शुरू करने को लेकर अस्पताल प्रशासन गंभीर नहीं है।

जिले के सबसे बड़े अस्पताल में अव्यवस्थाओं ने बढ़ाई मरीजों की परेशानी
मां और बेटी सर्जिकल वार्ड में भर्ती :
चाैहटन निवासी विशाखा(20)पत्नी दर्शन कुमार व उसकी दाे वर्षीय बेटी आसना के जलने पर जिला अस्पताल लाया गया। डाॅक्टर ने इलाज के बाद उन्हें बर्न यूनिट में भर्ती किया। लेकिन वहां एक ही कमरे में दाे बेड की व्यवस्था हाेने के कारण उन्हेें सर्जिकल वार्ड में रखा गया है। जहां गर्मी के कारण बेटी को परिजन उसे कपड़े से हवा दे रहे हैं। दूसरी ओर महिला भी भीषण गर्मी में जलने के कारण असहनीय पीड़ा झेल रही है ।

पाेस्ट ऑपरेटिव में बनाया गया बर्न यूनिट, बेड दाे, पंखा एक: बलाई निवासी अशाेक सिंह पुत्र भाेजराज जलने के बाद अस्पताल लाया गया और ओटी के पास संचालित पाेस्ट ऑपरेटिव वार्ड में वैकल्पिक व्यवस्था पर बनाई गई बर्न यूनिट में भर्ती किया गया। एक ही पंखा होने से गर्मी से हाल बेहाल हो रहे हैं।

बर्न यूनिट में ये सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी
बर्न यूनिट में रोगियों के लिए आइसोलेटेड बेड, स्पेशल टॉयलेट बाथरूम, किचन, कपड़े धुलने के लिए लांड्री आदि की व्यवस्था होती है। मरीजों के वार्ड पूरी तरह से वातानुकूलित हाेते हैं। अलग से डॉक्टर एवं नर्सिंग स्टाफ की सुविधा भी मुहैया कराई जाती है।

काेविड-19 महामारी के कारण पुरानी बिल्डिंग के वार्डाें काे काेविड वार्ड में तबदील किया गया था। नवंबर के बाद से बर्न के केस भी कम हाेने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पाेस्ट ऑपरेटिव वार्ड के एक रूम काे बर्न यूनिट बनाया गया था। एसी काे रिपेयर करवाकर इसे जल्द की खाेला जाएगा।
- डाॅ. बीएल. मसूरिया, पीएमओ

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