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ये है हमारे असली हीरो:आतंकी हमले में घायल जवान के दिमाग के एक हिस्से को डॉक्टरों ने पेट में रखा, 17 माह अस्पताल में भर्ती रहे, अब घर पहुंचे फौजी गेमराराम

बाड़मेरएक महीने पहलेलेखक: शैलेश वासु
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गेमराराम चौधरी - Dainik Bhaskar
गेमराराम चौधरी
  • भारतीय सेना के जवान ने अपने हौसले और हिम्मत से हरा दी मौत, कोरोना पॉजिटिव भी रहे, जिंदगी जीती
  • आतंकी हमले में ब्रेन व रीढ़ की हड्‌डी फ्रैक्चर, फिर भी हार नहीं मानी

आतंकी हमले में 17 माह तक घायल। ब्रेन तथा रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर। इसके बावजूद हौसले और हिम्मत से जिंदगी की जंग लड़ रहा है भारतीय सेना का जवान गेमराराम चाैधरी। हिम्मत अब इतनी कि, बोले ठीक होते ही वापस जाऊंगा ड्यूटी पर और जंग में 81 मोर्टार से दुश्मन को ध्वस्त कर दूंगा। पैरालिसिस, डेढ़ माह तक कोमा तथा तीन महीने कमांड हॉस्पिटल उधमपुर के आईसीयू में भर्ती रहने के बावजूद इस सैनिक की हिम्मत आज भी देखते ही बनती है।

हाल ही में बाड़मेर का यह रणबांकुरा अपने घर आया है। भास्कर टीम जब इस जवान के घर पहुंची और उसे सोता देख उनके परिजनों से बात करने लगी तो यह जवान खड़ा हुआ और परिचय के बाद बोला कि आज भी शरीर में वही ताकत है। घायल हुआ तो क्या हुआ? इस जवान ने सेना में स्पेशल प्लाटून के रूप में सेवाएं दी है। उसे 51 तथा 81 माेर्टार स्पेशलिस्ट के रूप में बटालियन में जाना जाता है। 81 माेर्टार की मार 5200 फीट तक जाती है जाे दुश्मन का नामोनिशान मिटा देती है। इतने बुलंद हौसलों के साथ बाड़मेर जिले के शंभूसर गांव का जवान गेमराराम भारतीय सेना की 4 राजपूताना राइफल्स बटालियन में नायक पद पर कार्यरत है।

फिलहाल गेमराराम शहर के तिलक नगर में बाबा रामदेव काॅलाेनी स्थित अपने घर पर है। पैरालाइसिस हाेने के कारण उनकी पत्नी देवी तथा भारतीय सेना की सेना काेर बटालियन से सेवानिवृत चचेरे भाई रेखाराम चाैधरी उसे प्रतिदिन फिजियोथैरेपी के लिए लगभग सात किमी वाॅकिंग तथा व्यायाम करवा रहे हैं। इस हादसे के बाद से गेमरामरा और उसका पूरा परिवार कई कठिनाइयों से जूझ रहा है फिर भी यह सेना का जवान अपने दाेनाें बेटों काे भारतीय सेना में भर्ती करवाना चाहता है।

जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में घायल होने से लेकर ठीक होकर घर पहुंचने तक की कहानी
जम्मू कश्मीर के अखनूर जिले के पल्लनवाला सेक्टर में ड्यूटी पर तैनात था। 17 नवंबर 2019 काे ड्यूटी पर तैनात आर्मी ट्रक में सवार अपने तीन साथियों के साथ एलओसी पर पेट्रोलिंग के दाैरान आतंकियों ने आईआईडी ब्लास्ट किया। इस हादसे में ट्रक के परखच्चे उड़ गए तथा एक जवान शहीद हो गया। मुझे व मेरे एक और साथी काे सेना के कमांड हॉस्पिटल उधमपुर में रेफर करवाया गया। हॉस्पिटल में ब्रेन तथा रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया गया। आईसीयू में डेढ़ माह तक कोमा में रहने के बाद उसे हाेश आया। तीन माह उधमपुर हॉस्पिटल में भर्ती रहने के बाद उसे फिजियोथैरेपी के लिए पूना के मिलिट्री हॉस्पिटल खिड़की भेजा गया।

हॉस्पिटल में ही वह काेराेना संक्रमित भी हुआ। गेमराराम के ब्रेन के ऑपरेशन के दाैरान उसके ब्रेन के हिस्से (स्कल बाेन) काे प्लेसमेंट प्रोसिजर के लिए राइट इंटीरियर एब्डोमिनल वाल्व (पेट के दाहिने हिस्से) में रखा गया है और पूना के डाॅक्टरों ने कुछ समय बाद उसे दुबारा ऑपरेशन करने के लिए बुलाया है। गेमराराम फरवरी 2003 में सेना में भर्ती हुआ था। इस बीच जयपुर, मणिपुर, आसाम, यूपी के फैजाबाद, जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा तथा अखनूर में सेवाएं दी।

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