शहर की सरकार के 3 साल:नगरपरिषद को पहली बार 3 साल में 60 करोड़ की आय, 45.70 करोड़ पट्‌टों से कमाए, 36 करोड़ किए

बाड़मेर2 महीने पहलेलेखक: भवानीसिंह राठौड़
  • कॉपी लिंक
पृथ्वी चण्डक, प्रतिपक्ष नेता और दिलीप माली, सभापति। - Dainik Bhaskar
पृथ्वी चण्डक, प्रतिपक्ष नेता और दिलीप माली, सभापति।

नगर परिषद में 3 साल में बदले 6 आयुक्त, वर्तमान आयुक्त ने दी विकास को गति
शहर की सरकार के कार्यकाल को आज तीन साल पूरे हो गए है। कांग्रेस बोर्ड के शुरुआत दिनों में कोरोना काल होने से विकास कार्य प्रभावित हुए। उसके बाद तीसरे साल वादों के अनुरूप काम करने के पूरे प्रयास किए। हालांकि कई वादे तीन साल बाद भी पूरे नहीं कर पाए है। शहर में सीवरेज सिस्टम आज भी बदहाल है। शहर में सौंदर्यीकरण, स्वच्छता और धरोहरों के संरक्षण को लेकर काम हुए हैं। अतिक्रमण व व्यवस्थित पार्किंग नहीं होने से समस्याएं बढ़ रही है। तीन साल के कार्यकाल में पहले दो साल कोरोना के भेंट चढ़ गए। इसके बाद परिषद से आय का जरिया बढ़ाया और परिषद ने 60 करोड़ रुपए कमाए, जो अब तक नगर परिषद के इतिहास में रिकॉर्ड है। इससे पहले 2012 के पूरे कार्यकाल में 57 करोड़ की आय हुई थी।

दरअसल, नगर परिषद बोर्ड गठन के दौरान आयुक्त पवन मीणा थे। उसके बाद लगातार आयुक्त बदलते गए। पवन मीणा के एपीओ होने के बाद प्रमोद जांगिड़, ललित सिंह को लगाया, लेकिन उन्हें भी एपीओ होना पड़ा। लंबे समय तक आयुक्त पद रिक्त पर सहायक राजस्व अधिकारी अशोक शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। उसके बाद दिलीप पूनिया को लगाया, फिर उन्हें हटाकर मई 2022 में योगेश आचार्य को नगर परिषद में आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई।

अगले दो साल: 17 करोड़ से तिलक बस स्टैंड में मार्केट व 6 करोड़ से आदर्श स्टेडियम में टाउन हॉल बनेगा
दो साल तक आमदनी नहीं, अब सुधरा बोर्ड का ढांचा: नगर परिषद बोर्ड के शुरूआत दो साल के कार्यकाल कंगाली के दौर में गुजरा। कोरोना के दिनों में नगर परिषद के कोष में 10 से 12 लाख रुपए बचे थे। उस समय वेतन देना भी मुश्किल हो गया था। दो साल में महज 13 करोड़ की आय हुई थी और विकास पर 17 करोड़ रुपए खर्च किए। ऐसे में आय से ज्यादा खर्च करने पड़ गए थे।

विकास : 3 साल में पर खर्च किए 36 करोड़: कांग्रेसनीत बोर्ड ने तीन साल के कार्यकाल में विकास के नाम पर 36 करोड़ रुपए खर्च किए है। जबकि तीन साल के कार्यकाल में 60 करोड़ रुपए की आय हुई है। आय सर्वाधिक इस साल हुई है, जो नगर परिषद ने सर्वाधिक 13 हजार पट्टे जारी किए। यह प्रदेश का रिकॉर्ड था। नगर परिषद ने सड़क, नाली पर करीब 32 करोड़ खर्च किए है। इसके अलावा सौंदर्यीकरण पर 1.7 व विद्युतीकरण पर 2.3 करोड़ रुपए खर्च किए है।

  • 13 हजार पट्टे जारी कर कमाए 45.70 करोड़,
  • पालिका बाजार की दुकानों से 9.21 करोड़
  • महावीर नगर भूखंडों की नीलामी से 2.43 करोड़
  • नगर विकास कर के नाम 41 लाख
  • नाकारा सामान, किराया से 48.43 लाख
  • बकाया लीज से 1.71 करोड़
  • गंदे पानी नीलामी से 21 लाख व कंपोस्ट खाद से 23 लाख
  • तीन साल में तिलक बस स्टैण्ड की भूमि पर कॉम्पलेक्स बनाने का सपना अधूरा
  • सीवरेज कार्य ने बिगाड़ दिया शहर फिर भी बोर्ड नहीं करवा पाया सुधार
  • शहर में फायर फाइटिंग सिस्टम लागू नहीं, बाजार में बड़े हादसे भी हुए

8 साल से लंबित पट्टों की पत्रावलियों पर पट्टे जारी किए, प्रदेश में टॉप रहने का अवार्ड, नरेगा के तहत 1500 लोगों को रोजगार आमजन की सुविधा के लिए टीनशेड पहली बार रंग बिरंगी रोशनी से शहर को सजाया इंदिरा रसोई से स्वादिष्ट भोजन देने में प्रदेश में दूसरा पायदान पार्को का सौंदर्यीकरण व झूले लगाए स्टेडियम में 31 लाख की लागत से दो वॉलीबॉल मैदान व 800 लोगों के बैठने के लिए पैवेलियन।

इन प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा करने का दावा तिलक बस स्टैंड पर 17 करोड़ खर्च कर मल्टीप्लेक्स मार्केट बनाया जाएगा। आदर्श स्टेडियम में 6 करोड़ खर्च कर अत्याधुनिक सुविधाजनक टाउन हॉल का निर्माण करेंगे। सोन तालाब से अरिहंत नगर तक सड़क पहुंचाने का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। शहर में गंदे पानी की निकासी के लिए 16 करोड़ की लागत से सात किमी लंबा नाला बनेगा।

नगर परिषद बोर्ड के कार्यकाल को तीन साल पूरे हो गए हैं। लेकिन तीन साल में कभी भी समय पर बोर्ड की बैठक नहीं बुलाई गई। साथ ही पेचवर्क में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है। पट्टों के नाम पर बंदरबांट हुई है, अभी खारिज कर रहे हैं और कह रहे है कि जेईएन नया था। विकास कार्यों में पार्षदों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएं, ताकि शहर का विकास हो सके। - पृथ्वी चण्डक, प्रतिपक्ष नेता

दो साल कोरोना में बीत गए, उस दौरान भामाशाहों के सहयोग से शहर में कोई भूखा न सोए इसी लक्ष्य के साथ काम किया। प्रशासन शहरों के संग अभियान में प्रदेश में पहले पायदान पर रहे। कचरा निस्तारण प्लांट भी लगाया। इससे अब हर साल 50 लाख रुपए मिलेंगे। नंदी गौशाला का सफल संचालन हो रहा है। कई प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जो दो साल में पूरे करेंगे। - दिलीप माली, सभापति

खबरें और भी हैं...