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रोष:शिक्षकों के वेतन से जबरन वसूली की कवायद को लेकर शिक्षक संघ में रोष

बाड़मेरएक महीने पहले
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प्रदेश के शिक्षकों के माह मई के वेतन से जबरन वसूली की संभावनाओं को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील ने विरोध किया। संघ ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और प्रमुख शासन सचिव वित्त को ज्ञापन भेज कर शिक्षकों के वेतन से जबरन कटौती नहीं करने की आवाज उठाई।

प्रदेशाध्यक्ष बनाराम चौधरी ने कहा कि प्रदेश के शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर एक याेद्धा के रूप में कोरोना के फैलाव को रोकने के कार्यों में अग्रिम मोर्चे पर डटे हुए है। कोरोना कार्य में लगे तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकार द्वारा समस्त सुविधाओं के साथ उनका व परिवार के सदस्यों का टीकाकरण करवाया गया लेकिन शिक्षकों की पूरी तरह से उपेक्षा की गई।

इसके कारण सैकड़ाें शिक्षक एवं विभागीय अधिकारी असमय मृत्यु को प्राप्त हुए। उनके परिवार दयनीय स्थिति में है। आज भी शिक्षकों को कोरोना से बचाव के न्यूनतम संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए गए है तथा उनके टीकाकरण का भी कोई व्यवस्थित प्रबंधन सरकार व प्रशासन द्वारा नहीं किये गए है। शिक्षकों के परिवार के सदस्यों के टीकाकरण की वाजिब मांग अनसुनी की जा रही है जिससे शिक्षकों में निराशा और आक्रोश है।

उन्होंने ज्ञापन में कहा कि सरकार कोरोना के नाम से शिक्षकों के वेतन से एकतरफा जबरन कटौती करने जा रही है। उक्त संभावित आर्थिक खतरे के समाचार से शिक्षक हतोत्साहित और निराश है। संघ के प्रवक्ता भेराराम भाखर ने कहा कि शिक्षक कोरोना के दौरान स्वैच्छिक दान कर रहे है। वेतन से जबरन वसूली करना अलोकतांत्रिक निर्णय है इससे शिक्षक समुदाय में भयंकर नाराजगी है।

नहीं बन रहें वेतन बिल: सरकार ने शुक्रवार को शिक्षक संघों से वार्ता कर सहमति लेने के लिए बैठक बुलाई लेकिन संयुक्त एकीकृत कर्मचारी महासंघ और शिक्षक संघ प्रगतिशील सहित अन्य संगठनों के विरोध के कारण ऐनवक्त पर बैठक स्थगित कर दी गई। दूसरी ओर पे-मैनेजर पर वेतन बिल बनाने की प्रक्रिया सरकारी स्तर पर रोकी हुई है।

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