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पीएम फसल बीमा किसानों के साथ धोखा:2018 में बाजरा की बीमित राशि थी 19 हजार, अब 6856 रुपए की

बाड़मेर2 दिन पहले
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  • प्रदेश में सर्वाधिक बाजरा उत्पादन बाड़मेर में, सबसे ज्यादा बीमित राशि जयपुर में क्यों

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों को सपने दिखा रहे हैं कि 2022 तक किसानों की आमदनी दुगुनी करेंगे, लेकिन हाल ये है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बाड़मेर के किसानों के लिए धोखा साबित हो रही है। यहां अब फसलों का बीमा करवाने के बाद भी उनके खराबे की भरपाई के लिए किसानों को पर्याप्त क्लेम नहीं मिल पाएगा, क्योंकि बीमा कंपनियों ने क्लेम देने से बचने के लिए फसलों की बीमित राशि को ही कम कर दिया है।

2018 में बाजरा की बीमित राशि प्रति हेक्टेयर 19000 रुपए थी, अब उसे घटाकर प्रति हेक्टेयर 6856 रुपए कर दिया है। यानि अब एक हेक्टेयर में बोई बाजरे की फसल 100% खराब हाे जाएगी, तभी भी महज 6856 रुपए का ही क्लेम मिलेगा। जबकि एक हेक्टेयर में बाजरे की उपज करीब 40-50 हजार रुपए की होती है। ऐसे में किसानों के साथ फसल बीमा के नाम सरकारें धोखा कर रही हैं। आपदा में किसानों की फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए बीमा करवाने के नाम इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम ले लेती है और किसानों को फसलों का क्लेम ऊंट के मुहं में जीरे के बराबर भी नहीं है।

बाड़मेर के करीब 5 लाख से ज्यादा किसान हर साल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ की अलग-अलग फसलों का बीमा करवाते हैं। 31 जुलाई बीमा करवाने की कट ऑफ डेट है। एआईसी कंपनी को बाड़मेर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का इंश्योरेंस करने के लिए अधिकृत कर रखा है। 2018 में जिले में भीषण अकाल पड़ने के बाद टाटा एआईसी को करीब 550 करोड़ रुपए क्लेम किसानों को देना पड़ा था।

इसके बाद सरकार ने टाटा एआईजी को फसल बीमा के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया और इंश्योरेंस के लिए एआईसी को जिम्मेदारी दे दी। 2019 के बाद एआईसी की ओर से इंश्योंरेस किया जा रहा है, लेकिन फसलों की बीमित राशि 60 से 70 फीसदी घटा दी गई।

कृषि विभाग ने कहा; उत्पादन से तय होती है बीमित राशि, कम पैदावार से राशि घटी

फसल बीमा के नाम किसानों के साथ इंश्योरेंस कंपनियां मनमर्जी से बीमित राशि तय कर रही है। जयपुर में एक हेक्टेयर बाजरे की बीमित राशि 32777 रुपए है तो बाड़मेर 6856 रुपए है। इसी तरह नागौर में बाजरे की बीमित राशि 19542, जोधपुर में 18162, सिरोही में 16021, सीकर में 25935, श्रीगंगानगर में 28245, जालोर में 12392 रुपए है। इसी तरह ग्वार की बाड़मेर में बीमित राशि 9785 रुपए है। जबकि जयपुर में 38732, नागौर में 22674, जोधपुर में 23044, सिरोही में 25905, सीकर में 29642, श्रीगंगानगर में 35167, जालोर में 15153 रुपए है। बाड़मेर में अगर एक हेक्टेयर में ग्वार का खराबा होता है क्लेम 9785 रुपए मिलेगा, जबकि जयपुर में उसी ग्वार का 38732 रुपए प्रति हेक्टेयर क्लेम मिलेगा।

ये राज्य सरकार तय करती है: सोलंकी

फसलों की बीमित राशि जिले में फसलों के उत्पादन पर तय होती है। पिछले कुछ सालों से उत्पादन कम था इसी वजह से 2019 में बीमित राशि कम हुई थी। 2020 में फसलों का उत्पादन अच्छा था, लेकिन इसके आंकड़े रेवन्यू बोर्ड से सरकार को जाते है और राज्य सरकार ही नोटिफिकेशन जारी करती है। बीमित राशि तय करना राज्य स्तर का मामला है।
-वीरेंद्रसिंह सोलंकी, उप निदेशक, कृ़षि विभाग

2 साल से बीमित राशि नहीं बढ़ाई

बाड़मेर में एआईसी कंपनी को फसलों का इंश्योरेंस करने के लिए अधिकृत किया गया है। 2020 में बीमित राशि को 70 प्रतिशत घटाकर कम कर दिया था। इसके बाद अब 2021 में भी इस राशि को बढ़ाया नहीं गया। जबकि 2020 में बाड़मेर में अच्छा सुकाल था। ऐसे में बीमित राशि इस बार बढ़ाई जानी थी, लेकिन कंपनी ने 2020 की ही पुरानी राशि से फसलों का इंश्योरेंस कर दिया।

इंश्योरेंस कंपनियों ने खुद का प्रीमियम बढ़ाया

2018 के बाद एआईसी ने फसलों का बीमा करने के लिए खुद के लिए प्रीमियम तो बढ़ा दी, लेकिन बीमा घटा दिया। 2018 में बाजरे का प्रीमियम 39% था, जबकि अब 41% है। अब 6856 रुपए के बाजरे का बीमा करवाने के लिए सरकार और किसान इंश्योरेंस कंपनी को 2674 रुपए प्रीमियम भर रहे हैं। इसी तरह ग्वार का 2018 में प्रीमियम 38% था, जबकि अब 42% है। यानि अब एक हेक्टेयर ग्वार का 9785 रुपए बीमा करवाने के लिए सरकार और किसान 3914 रुपए प्रीमियम भर रहे हैं। इसी तरह अन्य फसलें मोठ, तिल, मूंग, मूंगफली का प्रीमियम बढ़ा दिया है।

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