धर्म समाज:भारत की सभ्यता और संस्कृति दुनिया में सर्वश्रेष्ठ: साध्वी प्रेम बाईसा

बायतुएक महीने पहले
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  • श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भीष्म पितामह की झांकी रही आकर्षण का केंद्र

जन जीव कल्याण सेवा संस्थान के तत्वावधान और महंत विरमनाथ महाराज के सानिध्य में सेवनियाला के खेल मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा का वाचन करते हुए साध्वी प्रेम बाईसा ने कहा कि भारत की धरती बहुत ही पुण्यशाली है। इस भूमि पर जन्म लेने के लिए देवता भी तरसते हैं। वे यहांं जन्म लेकर कई लीलाएंं करते हैं। भारत की संस्कृति व सभ्यता संसार में सर्व श्रेष्ठ है।

साध्वी ने भारतीय सभ्यता को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। ईश्वर की कृपा के बिना संसार में कुछ भी संभव नहीं है। कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती हैं, जब इसे व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए। भागवत कथा से श्रवण से मन को शांति व मुक्ति मिलती हैं। कलयुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। साध्वी बाईसा ने बताया कि शंकर भगवान ने पार्वती को अमर कथा सुनाई। कथा के दौरान भीष्म पितामह की झांकी आकर्षण का केंद्र रहीं।

बावन बाणों के बिस्तर पर लेटे हुए झांकी को देखकर पांडाल में उपस्थित श्रोतागण भाव विभाेर हुए। कथा के दौरान रामजी रो नाम मिठो घणो लागे....., रामजी मिल जावे नेछो राखो सांची बात रो, नारायण नारायण जपा करो.... सहित भजनों की प्रस्तुतियां दी गई। इस दौरान सेवनियाला, नोसर, बोड़वा, खरंटिया, सणपा मानजी, धोलानाडा, सरणु, भोजासर, नगोणीं धतरवालों की ढाणी सहित आस पास के गांवों से कई भक्त मौजूद रहे।

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