कोरोना से जंग:बाड़मेर की सीख से सुनीता कोरोना वॉरियर, जयपुर में पॉजिटिव मरीजों का कर रही है इलाज

बाड़मेर2 वर्ष पहले
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(दोस्त अली) साल 2006 में बाड़मेर के नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर में नर्सिंग की 3 साल की पढ़ाई के दौरान मरीजों के सेहत की हिफाजत और उनका ख्याल रखने को सिखाई गई बारीकियां आज राजधानी जयपुर में सुनीता को कोरोना वॉरियर्स बना चुकी है। 
सुनीता लोटासरा इन दिनों सवाई मानसिंह अस्पताल के उस न्यू सिटी वार्ड में स्टाफ नर्स के पद पर अपनी सेवाएं दे रही है, जहां लगाए गए 16 बेड पर 16 कोरोना पॉजिटिव मरीज भर्ती हैं। बीते 14 अप्रैल से लगातार इसी वार्ड में सेवाएं दे रही सुनीता का घर अस्पताल से 14 किलोमीटर दूर जगतपुरा में है ऐसे में 28 किलोमीटर का सफर रोज करना बेहद कठिन होने के चलते अस्पताल प्रशासन ने नजदीक के कल्याण धर्मशाला में ही आवास की सुविधा कर ली है। 
सुनीता के मुताबिक शुरू में शुरू में मन आशंकित रहता था, लेकिन जैसे-जैसे बिना अवकाश के कार्य करते रहे तो डर अपने आप मिट गया। अब मरीजों की सेहत की हिफाजत को पहला धर्म मानकर काम मे जुटी हुई हैं। अपने सात साल के बेटे को झुंझुनूं स्थित ननिहाल भेज दिया है। वहीं पति डॉ.महेश साउ स्वास्थ्य कल्याण फिजियोथैरेपी कॉलेज सीतापुरा में सेवाएं दे रहे हैं। सुनीता बताती है कि वार्ड में जाने से पहले ओटी यूनिफॉर्म, उस पर कोविड की अलग-अलग रंग की यूनिफॉर्म, उसके ऊपर सिर से पांव तक पीपीई किट पहनते हैं। हाथों में 4 दस्ताने और मुंह पर सर्जिकल मास्क, एन 95 मास्क और फिर सर्जिकल मास्क पहन कर प्रवेश करना पड़ता है। सुनीता जहां तैनात है वहां नर्स ग्रेड प्रथम की 2 और नर्स ग्रेड द्वितीय की 6 स्टाफ ही प्रवेश कर सकती है। 14 अप्रैल से लगातार कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रही सुनीता बताती है कि बाड़मेर में तीन साल में शंकर भवानी, गितम्मा, वीणा एमपी, नारायण सरीखे शिक्षकों ने जो सिखाया अाैर सहपाठी ओम बाला चौधरी, वरजु चौधरी, उषा के साथ बैठकर जो नर्सिंग की बारीकियां सीखी वह  काम आ रही है। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के कोविड न्यू सिटी वार्ड में रामगंज, एमडी रोड के 16 कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती है। इनमें 25 साल से 50 साल तक की आयु वर्ग के लोग हैं। इन मरीजों के सुनीता सवालों के जवाब देने के साथ इनका हौसला बढ़ाने और कोरोना की बीमारी से डटकर मुकाबला करने की प्रेरणा भी दे रही है। सुनीता कहती है कि कोरोना संक्रमण के दौरान सवाई मानसिंह अस्पताल में काम करने का अब तक का अनुभव जहां साथ निभा रहा है, वही फ्लोरेंस नाइटिंगेल की सेवा की शपथ जो बाड़मेर में दिलाई गई थी, वह शपथ ही आज इस विकट हालातों में हौसले का आधार बनी हुई है। सुनीता जयपुर में होते हुए भी बाड़मेर के तीन साल के नर्सिंग ट्रेनिंग को जिंदगी की कठिनाई में हर सफलता की कूची बताती है। ऐसे कोरोना वॉरियर्स सही मायने में बाड़मेर के लिए किसी प्रेरणा से कम नही है।

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